पेड़ के ऊपर लगे हैं 9 पेड़, अजूबा है कोंडागांव का 200 साल पुराना वटवृक्ष
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में भी एक ऐसा स्थान है,जहां 200 साल पुराना एक पेड़ बुजुर्ग बनाकर हम सबको आशीष प्रदान करता है। यह पेड़ जितना खूबूसरत है,उसकी महिमा भी निराली है। इस पेड़ में 9 प्रकार के पौधे पल रहे हैं।
कोंडागांव, 23 जून। हमारा इतिहास केवल इंसानों के बनाये ढांचों पर ही नहीं इठलाता,बल्कि उसका गौरव कुदरत की खूबसूरती में भी छिपा है। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में भी एक ऐसा स्थान है,जहां 200 साल पुराना एक पेड़ बुजुर्ग बनाकर हम सबको आशीष प्रदान करता है। यह पेड़ जितना खूबूसरत है,उसकी महिमा भी निराली है। इस पेड़ में 9 प्रकार के पौधे पल रहे हैं। ग्रामीण इसे देव स्वरूप मानकर इसकी पूजा भी करते है।

200 साल पुराना वटवृक्ष
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर पड़ने वाले बनियागांव में अंदाजन 200 वर्ष पुराना एक बरगद का पेड़ इतिहास का गवाह है। इसने कोंडगांव को बढ़ते देखा है, अंग्रेजों का जमाना देखा है,देवता के रूप में स्थानीय लोगों की आस्था को जीवित रखा है। इस पेड़ की एक खासियत उसे लम्बी आयु पूर्ण कर चुके दूसरे पेड़ो से अलग बनाती है।इस वटवृक्ष में 9 अलग अलग प्रजतियों के पौधे लगे हुए हैं। यह विशाल बरगद का पेड़ लोगो की आश्चर्य, आस्था के साथ ही रिसर्च का विषय भी बन गया है।

9 अलग-अलग प्रजाति के नौ दल
बनियागांव का यह विशालकाय बरगद के पेड़ देखने में बेहद सुंदर है। यह एक मुख्यमार्ग में पड़ता है,इसलिए यहां से गुजरने वाले राहगीरों को यह ठंडी छांव देता हैं। लोगों को अचरज इसलिए होता है क्योंकि इसकी टहनियों से 9 अलग-अलग प्रजाति के नौ दल, चचान जुंडी, तेंदू , बड, पीपल, इमली, सिंदूर, माकड तेंदू और अमरबेल के पौधे निकल आए हैं।

पेड़ के नीचे स्थापित हैं माता शीतला
इस पेड़ का धार्मिक महत्व भी है। इसके नीचे ग्राम देवी शीतला माता का मंदिर स्थापित है। गांव के पुजारी नरपति पोयाम का कहना है कि इस पेड़ में 9 प्रजाति के पौधे निकले हैं, जो देवी माता के 9 रूप हैं। स्थानीय निवासी शीतला माता मंदिर और बरगद के पेड़ को वर्षों से पूजते आ रहे हैं। शीतला माता मंदिर समिति के मेंबर नरपति पटेल ने बताया कि ग्रामीण इस स्थान को देवस्थल के रूप में बरसों से पूजते आ रहे हैं, इस वटवृक्ष से 9 पौधे निकलना अचम्भित करता है,इसी कारण यह हम लोगों की आस्था का केंद्र भी है।

है तो अद्भुत
इस पुराने बरगद के पेड़ में 9 प्रजाति के पेड़ होने को जानकार अपनी नजर से देखते हैं। गुंडाधुर कालेज के वनस्पति शास्त्र के प्रोफेसर शशिभूषण कन्नौजे का कहना है कि पेड़ में अन्य पौधों का निकल आना एक स्वाभाविक प्रकिया है ,लेकिन यह एक शोध का विषय भी है,क्योंकि बरगद में 9 प्रजाति के अलग-अलग प्रजाति के पौधे लगे हैं ,वह भी औषधीय गुणों से युक्त हैं, जो इस स्थान पर आसपास नहीं मिलते हैं।
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