जिस स्कूल में जीवन भर पढ़ाया, उसी स्कूल के गरीब बच्चों के लिए शिक्षक ने दान कर दी रिटायरमेंट की सारी रकम
विजय कुमार चंसोरिया, जो मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रहने वाले हैं, उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए दान कर दी।
भोपाल, 2 फरवरी। हम में कई लोग ऐसे हैं जो जीवनभर मोटा पैसा कमाते हैं, लेकिन जब दान देने की बारी आती है तो हाथ खड़े कर देते हैं, मानो उनके पास कुछ है ही नहीं। वहीं, कुछ लोगों का दिल इतना बड़ा होता है कि वे कम कमाई के बाद भी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों में दान करना नहीं भूलते। आज हम आपको एक ऐसे शिक्षक से मिलवाने जा रहे हैं, जिसने अपने रिटायरमेंट का सारा पैसा गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया।

पैसा गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए दान कर दिया।
इनका नाम है विजय कुमार चंसोरिया, जो मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रहने वाले हैं, पूरे इलाके में इनकी खूब चर्चा हो रही है। दरअसल इस चर्चा का कारण है उनकी दरियादिली। 39 साल नौकरी करने के बाद चंसोरिया हाल ही में रिटायर हुए और रिटायरमेंट के बाद उन्हें जो 40 लाख रुपए की रकम मिली उसे उन्होंने गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया। चंसोदिया के इस फैसले की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

बेहद गरीबी में गुजरा चंसोदिया का जीवन
गरीब बच्चों के लिए अपनी जीवनभर की कमाई दान करने वाले चंसोदिया ने कहा कि उन्होंने गरीबी को करीब से देखा है, उन्हें पता है कि गरीबी क्या होती है। गरीबी की वजह से मैं बड़ी मुश्किल से अपनी पढ़ाई पूरी कर सका। इसलिए मैं नहीं चाहता कि इन बच्चों को भी मेरे जैसा संघर्ष करना पड़े। रिटायरमेंट से पहले चंसोदिया खदिंया के प्राइमरी स्कूल में अपनी शिक्षाएं दे रहे थे। 31 जनवरी को रिटायरमेंट वाले दिन ही उन्होंने स्कूल के बच्चों के लिए रिटायरमेंट की सारी रकम दान करने की घोषणा की।

मेरे दोनों बच्चे स्थापित हो चुके हैं इसलिए लिया दान का फैसला
मीडिया से बात करते हुए चंसोदिया ने कहा कि मैं चाहता हूं कि हर बच्चे को बेहत सुविधाएं मिलें। रिटायरमेंट की सारी रकम दान करने के लिए मैंने अपनी पत्नी और बच्चों से सलाह ली तो वे राजी हो गए। चंसोदिया ने कहा कि हमारे बच्चे स्थापित हो चुके हैं और बेटी की भी शादी हो गई है और इसलिए मैंने रिटायरमेंट की सारी रकम दान करने का फैसला लिया। चंसोदिया ने कहा कि उनका जीवन बेहद गरीबी में गुजरा है। पढ़ाई का खर्चा चलाने के लिए उन्होंने दूध बेचा, रिक्शा तक चलाया और वे नहीं चाहते कि इन बच्चों को भी यह सब झेलना पड़े।












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