आया हमारी पृथ्वी से भी बड़ा तूफान, 640 KMPS की रफ्तार से चल रही हैं हवाएं, सफेद की जगह लाल रंग के बादल
हमारे सौरमंडल में 8 ग्रह हैं, जिसमें बृहस्पति को सबसे ज्यादा रहस्यमयी माना जाता है। इसके अलावा ये हमेशा से ही खगोलविदों के लिए जिज्ञासा का केंद्र रहा। कुछ दिनों पहले इसके वायुमंडल में एक तेज रोशनी दिखाई दी थी, हालांकि अभी तक ये नहीं पता चल पाया कि वो क्या था। अब इस ग्रह पर एक तूफान का पता चला है, जिसके बारे में अभी रिसर्च जारी है।

8 प्रतिशत बढ़ी रफ्तार
हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों को पता चला कि बृहस्पति की सतह पर आए तूफान की गति बढ़ रही है। साथ ही बृहस्पति के ग्रेट रेड स्पॉट के सबसे बाहरी "लेन" में हवाएं तेज हो रही हैं। इस बात के भी संकेत मिल रहे कि तूफान की सीमाओं के भीतर हवा की औसत गति, जिसे हाई-स्पीड रिंग के रूप में जाना जाता है, 2009 से 2020 तक 8 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके अलावा रेड स्पॉट के सबसे अंदरूनी क्षेत्र में हवाएं काफी धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं।

पृथ्वी से बड़ा भंवर
वैज्ञानिकों के मुताबिक इस रेड स्पॉट को 150 से अधिक वर्षों से ग्रह पर उग्र रूप में देखा गया है। साथ ही लाल रंग के बादल 640 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से वामावर्त घूमते हैं। खास बात तो ये है कि तूफान पृथ्वी से भी बड़ा है। मामले में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता माइकल वोंग ने कहा कि जब उन्होंने शुरू में इसे देखा तो वो कुछ नहीं समझ पाए, क्योंकि ऐसा पहले कभी किसी ने नहीं देखा था।
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रेड स्पॉट है तूफानों का राजा
उन्होंने आगे कहा कि ग्रेट रेड स्पॉट हमारे सौरमंडल में तूफानों का राजा है। जूनो अंतरिक्ष यान के हाल ही में हुए फ्लाईबाई ने वैज्ञानिकों को ये निर्धारित करने में मदद की कि तूफान की जड़ें बृहस्पति के वायुमंडल में कम से कम 320 किलोमीटर तक फैली हुई हैं, जबकि पृथ्वी पर एक सामान्य ऊष्णकटिबंधीय चक्रवात केवल लगभग 15 किलोमीटर तक फैला होता है।

व्यास 16 हजार किलोमीटर
वहीं नासा का कहना है कि ग्रेट रेड स्पॉट बृहस्पति के आंतरिक भाग से चीजों का ऊपर की ओर उठता है। साथ ही ये भी नोट किया गया कि इसका आकार सिकुड़ रहा है। अब ये अंडाकार की जगह गोलाकार हो रहा है। वर्तमान में इसका व्यास 16,000 किलोमीटर से अधिक है यानि हमारी पृथ्वी पूरी तरह से इसके अंदर समा जाएगी।

बृहस्पति से क्या टकराया?
वहीं कुछ दिनों पहले जर्मन खगोलशास्त्री हेराल्ड पालेस्के बृहस्पति के चंद्रमा की छाया देख रहे थे। इसी दौरान उनको लगा कि कोई रहस्यमयी वस्तु बृहस्पति से टकराई। जिसके बाद तेज चमक पैदा हुई। वहां से 382.76 मिलियन मील दूर पृथ्वी पर हेराल्ड ने इस घटना को रिकॉर्ड कर लिया। उन्होंने काफी देर तक उसका अध्ययन किया लेकिन उनकी समझ में ये मामला नहीं आया।












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