Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

राजस्थान के इस शहर में करोड़पति हैं कबूतर, 126 बीघा जमीन और 27 दुकानों के हैं मालिक

राजस्थान के इस शहर में करोड़पति हैं कबूतर, 126 बीघा जमीन और 27 दुकानों के हैं मालिक

नई दिल्ली, 10 जनवरी: अरबपति और उद्योगपतियों की सैकड़ों कहानियां आपने सुनी होगी। सोशल मीडिया पर अक्सर हम ऐसी कहानियों के बारे में पढ़ते हैं। लेकिन आप में से बहुत कम ही लोगों ने सुना होगा कि कोई पक्षी और जानवरों के नाम पर भी करोड़ों की संपत्ति हो सकती है। लेकिन ये सच है। राजस्थान के नागौर जिले में स्थित राज्य के छोटे से कस्बे जसनगर में कबूतर भी करोड़पति हैं। जी हां, राजस्थान के जसनगर शहर में कबूतरों के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति है। इन कबूतरों को ''बहु-करोड़पति'' कबूतर कहा जाता है। आइए जानें इन कबूतरों के पास इतनी संपत्ति कहां से आई और ये करोड़पति कैसे बने।

126 बीघा जमीन, 27 दुकान, 400 गौशाला के मालिक हैं कबूतर

126 बीघा जमीन, 27 दुकान, 400 गौशाला के मालिक हैं कबूतर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये कबूतर कई दुकानों के मालिक हैं। कई किलोमीटर तक फैली जमीन और नकद रुपये भी इनके पास जमा है। कबूतरों के नाम जहां 27 दुकानें हैं। वहीं ये कबूतर 126 बीघा जमीन के भी मालिक हैं। इसके अलावा इनके पास 30 लाख रुपये की नकदी भी है। जसनगर के करोड़पति कबूतरों के पास 400 से अधिक गौशालाएं भी हैं। ये गौशाला 10 बीघा भूमि पर भी संचालित किए जाते हैं।

कैसे बने ये कबूतर करोड़पति

कैसे बने ये कबूतर करोड़पति

चार दशक पहले यानी 40 साल पहले यहां एक नए उद्योगपति ने कबूतारण ट्रस्ट की स्थापना की थी। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के मुताहिक 40 साल पहले पूर्व सरपंच रामदीन चोटिया के निर्देशों और अपने गुरु मरुधर केसरी से प्रेरणा लेकर अप्रवासी उद्योगपति स्वर्गीय सज्जनराज जैन व प्रभुसिंह राजपुरोहित ने कबूतारण ट्रस्ट की स्थापना की थी। इन्ही लोगों ने कबूतरों के संरक्षण व नियमित दाने पानी के लिए स्बे में 27 दुकानें बनवाई और इन्हें कबूतरों के नाम कर दिया।

ट्रस्ट की कमाई से करोड़पति हुए हैं कबूतर

ट्रस्ट की कमाई से करोड़पति हुए हैं कबूतर

प्रभुसिंह राजपुरोहित ने कहा कि लगभग चार दशक पहले, एक नए उद्योगपति ने यहां कबूतारण ट्रस्ट की स्थापना की थी और यह व्यवस्था हमारे पूर्वजों, साथ ही पूर्व सरपंच रामदीन चोटिया और उनके गुरु मरुधर केसरी से प्रेरणा लेकर की गई थी। हम सभी को मूक पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है। अब इसी ट्रस्ट की कमाई से पिछ्ले 30 सालों से रोजाना तीन बोरी अनाज की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि उद्योगपति सज्जनराज जैन इस परियोजना में अग्रणी थे।

कैसे काम करता है कबूतारण ट्रस्ट

कैसे काम करता है कबूतारण ट्रस्ट

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट हर दिन 4 हजार रुपये लगाकर तीन बोरी धान की व्यवस्था कबूतरों के लिए करता है। वहीं इस ट्रस्ट द्वारा चलने वाले गोशाला में 470 गाय रहते हैं। इन गायों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था भी ट्रस्ट द्वारा ही की जाती है। 27 दुकानों से जो हर महीने किराया मिलता है, उसकी कीमत 80 हजार रुपये हैं। वहीं 126 बीघा जमीन अचल संपत्ति है। जो भी इस ट्रस्ट की कमाई होती है, उसे कबूतरों के रख-रखाव में लगाया जाता है और जो पैसा बचता है ,उसे गांव के बैंक में जमा करा दिया जाता है। यही पैसा बैंक में जमा होकर 30 लाख रुपये हो गया है।

Recommended Video

    Rajasthan: करोड़ों की प्रोपर्टी के मालिक हैं ये कबूतर, दान में देते हैं लाखों रुपये | वनइंडिया हिंदी
    कबूतरों के ट्रस्ट को दान में भी मिलते हैं रुपये

    कबूतरों के ट्रस्ट को दान में भी मिलते हैं रुपये

    कबूतारण ट्रस्ट के सचिव प्रभुसिंह राजपुरोहित के मुकाबिक जसनगर के कबूतरों के लिए लोग दान भी करते हैं। हमें हर महीने कई लोगों के दान मिलते हैं। कबूतरों के लिए खोली गई 27 दुकानों से सलाना आय 9 लाख रुपये की होती है।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+