दो टुकड़ों में विभाजित हुआ जापान का 'किलिंग स्टोन', 1000 साल बाद फिर से आजाद हो गया शैतान!, डरे हुए हैं लोग

जापान के लोग इस समय बुरी तरह से डरे हुए हैं और इस डर की वजह बना है 1000 साल पुराना पत्थर जो अब दो भागों में विभाजित हो गया है।

टोक्यो, 9 मार्च। जापान के लोग इस समय बुरी तरह से डरे हुए हैं और इस डर की वजह बना है 1000 साल पुराना पत्थर जो अब दो भागों में विभाजित हो गया है। जापान में इस पत्थर की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि पत्थर के टूटने की खबर मिलते ही स्थानीय और राष्ट्रीय सरकारों को आपात बैठक बुलानी पड़ी है। प्रसिद्ध ज्वालामुखी के इस पत्थर को किलिंग स्टोन के नाम से जाना जाता था। इस पत्थर के लेकर स्थानीय लोगों का कहना था कि इसमें एक बुरी आत्मा कैद है और अब यह बुरी आत्मा पत्थर टूटने से आजाद हो गई है। लोग इस बात को लेकर काफी डरे हुए हैं।

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पत्थर के पास जाने भर से हो जाती है मौत

पत्थर के पास जाने भर से हो जाती है मौत

जापान में एक कहावत है कि जो भी इस पत्थर के पास जाता है, उसकी मौत हो जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सेशो-सेकी नाम की यह ज्वालामुखी चट्टान टैमोमो-नो-मै नाम के एक शैतान का घर थी, जिसने 1107 से 1123 तक जापान के शासक सम्राट टोबा को मारने के लिए एक खूबसूरत महिला का रूप धारण कर लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार टैमोमो-नो-मै वास्तव में एक नौ पूंछ वाली लोमड़ी थी, उसे एक योद्धा ने मार डाला जिसके बाद उसकी लाश सेशो-सेकी बन गई।

पत्थर में 1000 साल से कैद था शैतान

पत्थर में 1000 साल से कैद था शैतान

एक और किवदंती के अनुसार इस पत्थर को बौद्ध भिक्षु द्वारा निकाला गया था। अब इस पत्थर के टूट जाने पर लोगों में भय का माहौल है लोग इस पत्थर के पास जाने से डर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस पत्थर की फोटो शेयर कर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
एक यूजर ने फोटो पोस्ट करते हुए कमेंट किया जापान के नासू स्थित सेशो-सेकी पत्थर जिसमें एक शैतान कैद था अब वह टूट चुका है और शैतान अब आजाद हो चुका है। जहां कुछ लोग इस घटना को लेकर काफी गंभीर हैं, वहीं कुछ लोग सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर जापान के लोगों का मजाक भी बना रहे हैं।

स्थानीय लोगों में डर का माहौल

स्थानीय लोगों में डर का माहौल

एक स्थानीय मीडिया ने इस पत्थर के टूटने को लेकर कहा कि कई साल पहले इस चट्टान में दरारें दिखाई दी थीं। विशेषज्ञों ने अंतत: अनुमान लगाया कि वर्षा जल के रिसने के कारण यह पत्थर कमजोर पड़ गया और दो टुकड़ों में विभाजित हो गया। पत्थर को 1957 में एक स्थानीय ऐतिहासिक स्थल के रूप में पंजीकृत किया गया था। एक स्थानीय स्वयंसेवी समूह के प्रमुख मसाहरू सुगवारा ने कहा कि चट्टान क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा प्रतीक था और यह 'शर्म की बात' है कि यह विभाजित हो गया है।

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