परमाणु हमला हुआ तो सब तहस-नहस, लेकिन ये पांच जगहें अपने आप में हैं बेहद सुरक्षित, रिसर्च में हुआ खुलासा
परमाणु हमले के खतरे से खुद को और लोगों को बचा पाने के लिए पूरी दुनिया में सिर्फ पांच जगहें मौजूद हैं। इन जगहों के पास इतनी क्षमता है कि ये खुद को फिर से प्रोडक्टिव कर सकें। लिस्ट में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया टॉप पर हैं।

पूरी दुनिया को अगर हर वक्त कोई खतरा सताता है, तो वो है परमाणु युद्ध या फिर इस सर्वनाश का खतरा। अगर कोई भी देश परमाणु हमला करता है तो उसकी जद में न जाने कितने ही देश आएंगे। लाखों-करोड़ों लोगों की जिंदगी खत्म हो जाएगी। हिरोशिमा-नागासागी परमाणु हमले का दर्द आज तक भी भुलाया नहीं जा सका है। ऐसे में परमाणु हमले के सर्वनाश से बचने के लिए कुछ जगहों पर अध्ययन किया गया, तो ये बात सामने आई कि न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ये दो ऐसी जगह हैं जो बचने के लिए सबसे अच्छा स्थान हो सकती हैं।

परमाणु हमले से बच जाएंगी ये जगहें
'डेली स्टार' की खबर के मुताबिक, एक रिसर्च के अनुसार, पांच जगहें हैं, जो परमाणु हमले के सर्वनाश के खतरे से खुद को बचा सकते हैं। इनमें न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया तो शीर्ष पर हैं, और आइसलैंड, सोलोमन द्वीप और वानुअतु ने बाकी टॉप 5 जगहों पर जगह बनाई है। रिस्क एनालिसेस में प्रकाशित एक स्टडी बताती है कि ये देश खुद को इस रिस्क से बचा सकते हैं।

क्या कहते हैं रिसर्चर?
अगर कभी परमाणु हमले से सबकुछ तहस नहस हो जाता है तो ये पांच जगहें ऐसी हैं, जहां की धरती खुद को बंजर से उपजाऊ और रहने लायक बना सकती है। शोधकर्ताओं का तो ये भी मानना है कि इन जगहों पर लोग जीवित बचे रह सकते हैं। भले ही परमाणु से हुए विनाश के बाद स्थिति कितनी भी खतरनाक हो। लेकिन अन्य जगहों पर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाएगा।

38 आईलैंड्स को किया गया था शामिल
स्टजी के मुताबिक, 38 आईलैंड्स को कुछ कारकों के तहत शामिल किया गया था, जिसमें खाद्य उत्पादन, ऊर्जा, आत्मनिर्भरता, और जलवायु व आपदा शामिल थे। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की बात करें, तो ये दोनों ही जगहें रैंकिंग में सबसे टॉप पर हैं। स्टडी में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला काफी बड़ी है। वहीं अच्छी स्वास्थ्य सेवा, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे ने भी इसे शीर्ष में लाने पर अहम भूमिका निभाई है।

न्यूजीलैंड के बारे में जानकर हो जाएंगे हैरान
इसके अलावा न्यूजीलैंड को भी इसमें बेहतर स्थान मिला, इसका कारण इसकी न्यूक्लीयर फ्री पॉलिसी है। ओटागो यूनिवर्सिटी वेलिंगटन के प्रोफेसर निक विल्सन ने कहा कि हमारे पास एक सुपर फूड एक्सपोर्ट इकॉनॉमी है, जो केवल एक्सपोर्ट से ही न्यूजीलैंड वासियों का एक बार नहीं कई बार पेट भर सकती है। उन्होंने माना कि सबसे खराब स्थिति में भी न्यूजीलैंड के फूड प्रोडक्शन में 61 प्रतिशत की गिरावट आएगी। लेकिन तब भी ये अन्य देशों को खिला पाने के लिए पर्याप्त होगा।
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