फंगस के जरिये आपस में बातचीत करते हैं पेड़! जानें क्या कहता है विज्ञान
सदियों पहले, लोगों का मानना था कि पेड़ों में जीवन होता है। इसे वैज्ञानिक रूप से साबित करने में बहुत समय लगा। ऐसी ही कई मान्यताएं अभी भी अप्रमाणित हैं, लेकिन लोकप्रिय हैं। ऐसी ही एक मान्यता यह है कि पेड़ आपस में बातचीत करते हैं। इसे लेकर कई सारी स्टडी भी की गईं, जिनमें कुछ हद तक ये बात साबित करने की कोशिश भी हुई।
पेड़ों में जीवन होता है और ये बात तो सभी को मालूम है मगर क्या वे बातचीत करते हैं? ये बात कई बार चर्चा का विषय बनी। मीडिया और एप्पल टीवी के टेड लास्सो जैसे शो में इसपर बात भी की गई। इस शो ने खूब सुर्खियां बटोरीं। हालांकि विज्ञान इसे लेकर अभी भी कुछ पुख्ता सबूत नहीं दे सका है।

13 फरवरी को नेचुरल इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन नामक पत्रिका में एक लेख पब्लिश हुआ था। अल्बर्टा यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ जस्टिन कार्स्ट ने चेतावनी दी है कि इन दावों के पीछे का विज्ञान अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है। कार्स्ट और उनके सहयोगियों ने कॉमन माइकोरिज़ल नेटवर्क (CMNs) के रूप में जाने जाने वाले भूमिगत कवक नेटवर्क (Underground fungal network) के बारे में लोकप्रिय दावों की समीक्षा की। कहा जाता है कि ये नेटवर्क पेड़ों की जड़ों को जोड़ते हैं।
सामान्य माइकोराइजल नेटवर्क: तथ्य या सिर्फ कल्पना?
अल्बर्टा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर कार्स्ट ने माना कि CMN पर शोध ने वन कवक में रुचि जगाई है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि CMN के बारे में कई लोकप्रिय विचार वैज्ञानिक प्रमाणों से आगे हैं। कवक जंगल की सतह और भूमिगत क्षेत्रों में आम हैं, लेकिन उनके नेटवर्क का व्यापक अध्ययन नहीं किया गया है।
CMNs का अस्तित्व वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है, मगर रिसर्चर्स को इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला कि वे पेड़ों या पौधों को लाभ पहुंचाते हैं। कार्स्ट और उनके सहयोगियों ने इन दावों का परीक्षण करने के लिए रिसर्च भी की गई। उन्होंने अध्ययनों की समीक्षा की और पाया कि जंगलों में CMNs की व्यापक उपस्थिति या उनकी संरचना और कार्य के लिए अपर्याप्त समर्थन है।
क्या पेड़ वास्तव में कवक के जरिये बातचीत करते हैं?
एक और दावा ये है कि वयस्क पेड़ सी.एम.एन. के माध्यम से पौधों को पोषक तत्व और संसाधन प्रदान करते हैं, जिससे उनके जीवित रहने और विकास में मदद मिलती है। रिसचर्स को इस दावे का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। 26 अध्ययनों की समीक्षा में, जिसमें कार्स्ट द्वारा सह-लेखक एक अध्ययन भी शामिल है, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सी.एम.एन. भूमिगत से पेड़ों तक संसाधन ट्रांसफर की सुविधा प्रदान नहीं करते हैं।
शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि पेड़ों और पौधों को सी.एम.एन. की पहुंच से कोई फायदा नहीं होता। इसके अलावा, इस बात का कोई सबूत नहीं था कि पेड़ सी.एम.एन. के ज़रिए कीटों के आगमन जैसे खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं।
ओकानागन में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेलानी जोन्स और मिसिसिपी विश्वविद्यालय से जेसन होक्सेमा ने कार्स्ट के साथ मिलकर अध्ययन का सह-लेखन किया। उन्होंने क्षेत्र अध्ययनों की समीक्षा की, लेकिन व्यापक रूप से CMN की उपस्थिति या पेड़ों के बीच संचार में उनकी भूमिका का समर्थन करने वाले बहुत कम सबूत मिले।
शोधकर्ताओं के निष्कर्ष बताते हैं कि पेड़ों के बीच कवक नेटवर्क के जरिये बातचीत के बारे में प्रचलित मान्यताओं की व्याख्या करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इन दिलचस्प मगर अप्रमाणित विचारों का समर्थन करने के लिए और ज्यादा वैज्ञानिक प्रमाण की जरूरत है।
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