पांच घंटे में बस 40 रुपये? कम पैसा मिलने पर रोने लगा बेंगलुरु का ऑटो ड्राइवर, VIDEO देख ट्विटर पर छिड़ी बहस
Bengaluru auto driver: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में बेंगलुरू का एक ड्राइवर नजर आ रहा है। कम पैसे मिलने पर ड्राइवर रोता हुआ दिख रहा है। इंटरव्यू कन्नड़ भाषा में है लेकिन कैप्शन से साफ है कि बात क्या हो रही है।
ये वीडियो अपलोड होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इस पक्ष में है कि ये सब सही है, तो कई लोग ड्राइवर के सपोर्ट में खड़े उतरे दिख रहे हैं।
(वीडियो-नीचे)

वायरल हो रहा ये वीडियो कर्नाटक का है, जहां एक ड्राइवर उन पैसों को दिखा रहा है, जो उसने दिनभर मेहनत करने के बाद कमाया है। कैप्शन के मुताबिक, ड्राइवर सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तककाम करने के बाद सिर्फ 40 रुपये ही कमा पाता है।
बताते चलें कि कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के लिए एक सेवा शुरू की है, जिसके तहत राज्य की महिलाएं सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकती हैं। इस योजना का नाम शक्ति योजना रखा गया है।
चुनाव के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा दी गई 5 गारंटियों में से ये एक है, जो हाल ही में लागू हुई है। इस योजना के बाद राज्य के ऑटो ड्राइवर्स का कहना है कि उनकी आमदनी में बड़ी गिरावट आई है। हालिया वीडियो में भी ड्राइवर इसी योजना की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो पर लोगों के मिले-जुले रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं। एक यूजर ने कहा कि ऑटो वाले भी तो मनमर्जी से चार्ज करते हैं। कभी भी मीटर से नहीं चलते। कुछ अच्छे भी हैं, जो मीटर से चलते हैं। लेकिन ज्यादातर नहीं चलते।
एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि मैं अपने घर से 2 किलोमीटर दूर एक मेट्रो स्टेशन पर उतरता हूं। जब मैं उतरता हूं तो ये लोग घेर लेते हैं। मुझसे 150 रुपये मांगते हैं। इसके बाद मैं पैदल चलने का फैसला लेता हबं तो मुझे कन्नड़ में गाली देते हैं। ये सोचकर कि मुझे समझ में तो आती नहीं। इनके लिए मुझे सहानुभूति नहीं है। बस योजना बहुत अच्छी है।
एक ट्विटर यूजर ने कहा कि बेंगलुरू में 2 किलोमीटर की सवारी करने पर भी ये 150 रुपये मांगते हैं। ये योजना इन्हें कष्ट नहीं दे रही है, बल्कि इनका पैसा चार्ज करने का तरीका दे रहा है। सही किराया वसूलने के लिए आपको अभी भी उसने विनती ही करनी पड़ती है। ये कर्नाटक की हकीकत है।
यहां देखें वीडियो...
एक और ने कहा कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू के ऑटो ड्राइवर्स के लिए उन्हें जरा सी भी सिंपथी नहीं है। ये लोग कभी भी रेट या फिर मीटर कार्ड को फॉलो नहीं करते हैं। इन्हें लगता है कि सरकार कुछ नहीं कर सकती। एक ने कहा कि पूरे राज्य में आप एक भी ऐसा इंसान नहीं पाएंगे, जो इन ऑटो ड्राइवर्स को सपोर्ट करे। ये लोग इतने बुरे हैं।












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