असम का वो 'महादानी', 20 गांवों का संवारता है भविष्य, ₹800 से हुई थी शुरुआत
असम में एक ऐसा स्कूल है जो नर्सरी 10वीं क्लास तक है। ये स्कूल निम्न आयवर्ग के परिवारों के लिए एक आशा की किरण है।

Parijat Academy: जीवन स्तर सुधारने में शिक्षा हर समाज के लिए महत्वपूर्ण होती है। सरकार की तमाम शिक्षा की योजनाओं के बावजूद आज भी कई ऐसे इलाके हैं जहां जागरूकता के अभाव है। स्कूल कॉलेज तो हैं लेकिन अभिभावक अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा दिलाने में रुचि नहीं रखते। ऐसे में क्षेत्र में एक रीयल हीरो उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। आइए जानते हैं ओडिशा के टेरॉन की स्टोरी, जिनके स्कूल में 400 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं, वो भी मुफ्त में।

गरीब परिवारों को मुफ्त शिक्षा
असम के उत्तम टेरोन अपने पढ़ाई के दिनों में बैकबेंचर थे। लेकिन समय के साथ अपने क्षेत्र के नौजवानों के हालात देख उन्होंने खुद को बदलने की सोची फिर क्या था, उन्होंने निम्न आयवर्ग के परिवारों को होनहार बच्चों की प्रतिभा को उकेरना शुरू कर दिया। टेरोन पारिजात अकादमी की नाम से गैर लाभकारी स्कूल चलाते हैं।

₹800 रुपए से हुई शुरुआत
टेरोन ने सबसे पहले मुफ्त होम ट्यूशन देना शुरू किया था। जिसके बाद धीरे- धीरे उन्होंने एक बड़ा गैर लाभकारी संस्थान बनाया। स्कूल में अब बच्चों की पढ़ने की सुविधाएं हैं। जो सहयोग के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। टेरोन ने जब ये कार्य शुरू किया तो उनके पास शुरुआत मे पढ़ने के लिए 4 बच्चे ही थे। उनकी एक गौशाला थी और उस वक्त महज 800 रुपए उनके पास थे।

400 बच्चे करते हैं पढ़ाई
टेरोन के स्कूल के हालात अब बदल चुके हैं। स्कूल के पास एक स्थायी भवन है। यहां 22 प्रशिक्षित शिक्षक तैनात हैं। जो लगभग 400 विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं। प्रत्येक बच्चे की शिक्षा पर प्रति माह 400 रुपये खर्च होता है। यहां एक छात्रावास भी है जो दूर के क्षेत्रों से आने वाली करीब 60 छात्रों की क्षमता वाला है।

कभी पीछे नहीं हटे टेरोन
47 वर्षीय टेरोन को रीयल हीरो माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन में जो करने का ठान लिया उससे कभी पीछे नहीं हटे। टेरोन की पारिजात अकाडमी में असम बोर्ड से संबद्ध संस्थान असमिया, अंग्रेजी, हिंदी, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षा मिलती है। स्कूल विद्यार्थियों को कौशल बढ़ाने में मदद करने के लिए सिलाई और कंप्यूटर सीखने जैसे विभिन्न कौशल भी सिखाता है। अकादमी ट्रेकिंग यात्राएं, नाटक और प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित करती है। ये स्कूल नर्सरी ग्रेड से कक्षा 10 तक है।

सहयोग के आधार पर चलता है स्कूल
देश भर के स्वयंसेवक विभिन्न गतिविधियों में बच्चों की मदद करते हैं। टेरोन कहते हैं, "मैं वित्तीय सहायता की तलाश में रहता हूं क्योंकि मुझे स्कूल के खर्चों का प्रबंधन करने और शिक्षकों को मानदेय भी प्रदान करने की आवश्यकता है। पारिजात अकादमी में वे छात्रावास की आवास सुविधाओं को बढ़ाना चाहते हैं।












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