नसीब वालों को मिलती है 'दो जून की रोटी', धड़ल्ले से वायरल हो रहे मीम्स, जानिये क्या है इस कहावत का मतलब?
2 June ki roti: आपने हमेशा से 'दो जून की रोटी' वाली कहावत तो सुनी ही होगी। ये कहावत सिर्फ कहावत नहीं बल्कि इसके पीछे एक ऐसी कहानी है, जिसे सुनने के बाद आप भी भावुक हो जाएंगे।

2 जून की रोटी... कहते हैं ये नसीब वालों को ही मिलती है। आपने भी ये कहावत हमेशा बड़े-बुजुर्गों या फिर परिवार के किसी न किसी सदस्य से तो सुनी ही होगी। ऐसे में 2 जून की ये तारीख आते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ सी आ जाती है।
'जरूर खाएं दो जून की रोटी'
कोई कहता है कि आज की रोटी जरूर खाएं, कोई कहता है ये रोटी तो बस किस्मत वालों को ही मिलती है। वहीं किसी का कहना है कि आज की रोटी तो जरूर खाएं, ये बहुत मुश्किल से मिलती है।
क्या है जून का मतलब?
अवधि भाषा में जून का मतलब वक्त से होता है। ऐसे में कहावत इस मामले में सटीक बैठती है कि दो वक्त की रोटी बहुत मुश्किल से नसीब होती है। कई लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाना बहुत कठिन होता है। वहीं कईयों को तो ये नसीब भी नहीं होती। पेट की ये भूख ही तो है, जिसे शांत रखने के लिए इंसान रात-दिन मेहनत करता है।
देश का बड़ा हिस्सा गरीबी में
हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में जी रहा है। लोगों के पास यहां दो वक्त की रोटी तक नहीं है। ऐसे में इस कहावत के मुताबिक जिसे दो जून की रोटी नसीब हो जाए, तो बहुत बड़ी बात है। दिन रात अपने और अपने परिवार का पेट पालने की जद्दोजहद कर रहे लोगों के लिए ये दो जून की रोटी जुटा पाना भी बहुत मुश्किल होता है।
क्या कहती है 2017 की रिपोर्ट?
सरकार गरीबी हटाने के लिए कई योजनाएं लेकर आती रही है, लेकिन आज भी देश में कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो जून की रोटी नसीब नहीं हो रही है। साल 2017 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की बात करें, तो इसके मुताबिक, देश में 19 करोड़ लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पाता। ऐसे में सरकार फ्री राशन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराती है, ताकि लोगों को 'दो जून की रोटी' नसीब हो सके।












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