100 साल पुरानी, 3800 टन वजन की विशाल इमारत कैसे चलकर दूसरी जगह पहुंची ? देखिए Video
शंघाई (चीन), 10 जुलाई: कभी आपने किसी बिल्डिंग को सड़क पर सरपट भागते देखा है। अगर नहीं देखा है तो ऐसे नजारे देखने के लिए तैयार रहिए। क्योंकि, इंजीनियरों ने ऐसा करने में महारथ हासिल कर ली है। चीन में दो दिन पहले एक ऐसा ही वाक्या देखने को मिला है, जिसमें हजारों टन वजनी एक बड़ी बिल्डिंग विशाल जहाज की शक्ल में चलती हुई नजर आई। हम यहां आपको इस करिश्मे का वीडियो तो दिखा ही रहे हैं, साथ में इंजनीयरिंग का करीब 100 साल पुराना कमाल में भी दिखाने जा रहे हैं।

शंघाई में एक सदी पुरानी इमारत को शिफ्ट किया
आपने कभी छोटी-मोटी किसी इमारत को भी अपने स्थान से दूसरी जगह की ओर बढ़ते देखा है! लेकिन, चीन की सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर शंधाई में यह घटना कैमरे में कैद हो चुकी है। चौंकिए मत! यह किसी दूसरी दुनिया की अदृश्य शक्तियों का करिश्मा नहीं है। यह मॉडर्न इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की महिमा है कि एक सदी पुरानी एक विशाल इमारत चहलकदमी करती हुई नजर आ रही है। 3,800 टन वजन की इस विशाल इमारत को हाल ही में खिसका कर उसके मूल जगह पर पहुंचाया गया है।

'वॉकिंग मशीन' तकनीक का कमाल
इस भव्य इमारत का स्थान परिवर्तन करने के लिए उसके नीचे स्लाइडिंग रेल का इस्तेमाल किया गया, जिसके सहारे उसे खींचकर निर्धारित जगह पर ले जाया गया है। इमारत को पहले पूरी तरह से जमीन से उठा लिया गया और फिर 'वॉकिंग मशीन' नाम की नई तकनीक का इस्तेमाल करके स्थानांतरित किया गया है। हालांकि, चीन पहले भी इस तरह की कोशिशों में लगा रहा है। लेकिन, शंघाई में इतने विशाल कंक्रीट स्ट्रक्चर को अपने स्थान से घसीटकर दूसरी जगह पर स्थापित करने की यह नई घटना बताई जा रही है। सबसे बड़ी बात है कि यह पूरी प्रक्रिया कैमरे में इस तरह से कैद है कि बिल्डिंग को चलते हुए देखना हैरत में डाल रहा है।

क्यों लाभदायक है 'वॉकिंग मशीन' तकनीक ?
हालांकि, किसी इमारत या कंक्रीट ढांचे को इस तरह से शिफ्ट किए जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी इंजीनियरों ने यह कमाल दिखाया है। अतीत में भी स्मारकों को संरक्षित करने या फिर किसी विशाल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इंजनीयरिंग का ऐसा कमाल देखने को मिल चुका है। यह तकनीक आज ऐतिहासिक इमारतों को सुरक्षित और संरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित हो रही है। क्योंकि, विकास परियोजनाओं के लिए ऐसी इमारतों को तोड़ने की जगह यह ज्यादा सही है कि उसे विशेष स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाए।
बाढ़ से इमारतों की सुरक्षा में भी कारगर
यह वीडियो सीजीटीएन का है, जिसे बेलाफास्ट में काउंसल जनरल ऑफ चाइना झैंग मेइफैंग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। चीन में इमारतों को शिफ्ट करने में यह तकनीक इसलिए भी लोकप्रिय होती जा रही है,क्योंकि पुरानी बिल्डिंगों को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने में भी यह सफल हो रही है। इसके जरिए इमारतों को ऊंची जगहों पर शिफ्ट किया जा सकता है। (ऊपर की तस्वीरें सौजन्य-सीजीटीएन वीडियो)

नेवार्क एयरपोर्ट का पहला टर्मिनल भी शिफ्ट हुआ था
इमारत खिसकाने की ऐतिहासिक घटनाओं में अमेरिका के नेवार्क एयरपोर्ट टर्मिनल का नाम भी शामिल है। वहां की बिल्डिंग 51 को 60 लाख डॉलर खर्च करके उसकी जगह बदली गई थी। यह अमेरिका के पहले यात्री टर्मिनलों में से एक था। एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण में बिल्डिंग 51 से बाधाएं खड़ी हो रही थीं। रनवे बढ़ाने के लिए इस पुरानी इमारत को गिराने की नौबत आ गई थी। लेकिन, पोर्ट अथॉरिटी और न्यू जर्सी राज्य के हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन ऑफिस ने उस इमारत को संरक्षित रखने का फैसला किया। इस इमारत को खिसकाने के लिए उसे तीन टुकड़ों में विभाजित करना पड़ा और दूसरी जगह शिफ्ट करने की पूरी प्रक्रिया में 5 महीने लग गए। आज की तारीख में बिल्डिंग 51 एयरपोर्ट के एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस में जाने वाले यात्रियों के लिए एंट्रेंस का काम कर रहा है।

फेयरमाउंट होटल को भी इसी तकनीक से किया संरक्षित
अमेरिका में ही सैन अंटोनिओ में 1906 में बना फेयरमाउंट होटल एक जमाने में रेल यात्रियों के ठहरने के लिए आलीशान जगह थी। लेकिन, 1980 के दशक तक आते-आते तीन-मंजिला विक्टोरिया-शैली का यह होटल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका था। शहर के डेवलपर्स चाहते थे कि होटल की इमारत को गिरा दिया जाए, क्योंकि इससे एक नए शॉपिंग मॉल का रास्ता बाधित होता था। लेकिन, 1985 में सैन अंटोनिओ कंजर्वेशन सोसाइटी ने इसे तोड़ने की जगह मूल स्थान से थोड़ी दूर खिसकाने का फैसला किया। पांच दिन लगे, इस बिल्डिंग को धीरे-धीरे खिसकाकर तय जगह पर शिफ्ट कर दिया गया।
2020 में एक स्कूल भी शिफ्ट किया गया था
जहां तक चीन के शंघाई शहर की बात है तो वहां पहले भी कुछ बड़ी इमारतें अपने स्थान से शिफ्ट की जा चुकी हैं। 2020 में शंघाई में ऐसा नजारा पहली बार तब देखने को मिला जब 7,600 टन वजनी एक स्कूल को करीब 21 डिग्री और 203 फीट खिसका दिया गया। इस काम में कुल 18 दिन लगे और इसके लिए इंजीनियरों ने पांच-मंजिला इमारत के नीचे करीब 200 मोबाइल सपोर्ट को जोड़ा था। इस स्कूल को एक नए कमर्शियल और ऑफिस कॉम्पलेक्स के लिए जगह निकालने के लिए खिसकाना जरूरी थी। स्कूल का निर्माण 1935 में हुआ था।
करीब 100 वर्ष से हो रहा है इस प्रक्रिया का इस्तेमाल
आप को यकीन नहीं होगा, लेकिन इमारतों को दूर ले जाने की यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है। अमेरिका के इंडियाना में 1930 में इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया था। वहां नवंबर 1930 में आर्किटेक्ट और इंजीनियरों की एक टीम ने 11,000 वजन वाले एक टेलीफोन एक्सचेंज को 90 डिग्री घुमा दिया था। बड़ी बात ये है कि इस काम के लिए इमारत के अंदर होने वाले काम पर कोई असर नहीं पड़ा और करीब 600 कर्मचारी बिल्डिंग के अंदर लगातार अपनी ड्यूटी करते रहे। इस पूरी प्रक्रिया में 4 हफ्ते से ज्यादा लगे थे। इमारत को घुमाने के बाद इतनी जगह निकल आई, जहां 1932 में कंपनी ने लाइमस्टोन का नया सात मंजिला हेडक्वार्टर तैयार कर लिया।
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