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Flash Back 2022: दूसरे राज्यो से छत्तीसगढ़ पधारे, 2023 की चुनावी रणनीति के सूत्रधार बने यह राजनेता

राजनीतिक हलचलों के लिहाज से साल 2022 छत्तीसगढ़ के लिए बेहद ख़ास साबित हुआ है। फ्लैशबैक 2022 की इस कड़ी में चर्चा उन राजनेताओं की जिन्होंने अन्य राज्यों से आकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में कदम रखा है।

साल 2022 ने छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल काफी तेज थी। इस साल प्रदेश की राजनीति में दूसरे राज्यों के कुछ प्रभावशील नेताओं ने प्रवेश किया,जिनका धान के कटोरे में जमकर स्वागत भी किया गया। आज यही नेता छत्तीसगढ़ की सियासत की कमान थामकर बैठे हुए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2023 से पहले अपने प्रदेश प्रभारी बदल दिए,वही कुछ का दखल घट गया।

कुमारी शैलजा के हाथों छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान

कुमारी शैलजा के हाथों छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान

छत्तीसगढ़ में अगले साल विधानसभा चुनाव है। पार्टी में लम्बे समय से प्रदेश प्रभारी पद की जिम्मेदारी संभालने वाले पीएल पुनिया को छुट्टी देते हुए उनकी जगह कुमारी शैलजा को छत्तीसगढ़ इंचार्ज बनाया है,जबकि पुनिया के कार्यकाल में कांग्रेस ने विधानसभा,नगरीय निकाय चुनाव,पंचायत चुनाव समेत कई उपचुनावों में बड़ी जीत हासिल की है।

यूपीए सरकार में मंत्री रही कुमारी शैलजा को सोनिया गांधी का काफी करीबी माना जाता है। वो हरियाणा की अंबाला और सिरसा दोनों सीटों से पार्टी की लोकसभा सांसद रही हैं। वह पार्टी के नेता चौधरी दलवीर सिंह की बेटी हैं। दलवीर सिंह भी हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष और केंद्र में कई बार मंत्री रह चुके हैं। शैलजा की गिनती हरियाणा के बडे़ नेताओं में होती है।

ओम माथुर पर छत्तीसगढ़ में कमल खिलाने की जिम्मा

ओम माथुर पर छत्तीसगढ़ में कमल खिलाने की जिम्मा

डी पुरंदेश्वरी के स्थान पर राजस्थान के दिग्गज नेता भाजपा नेता ओम माथुर को छत्तीसगढ़ का प्रभार सौंपा गया है। ओम माथुर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रभारी होने का अनुभव है। ओम माथुर मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे कई प्रदेशों में भाजपा के लिए बेहतर परफॉर्मेंस कर चुके है।

जानकार बताते है कि देश के कई राज्यों में सफल चुनावी रणनीति बनाकर बेहतर टिकट वितरण में उनका अहम योगदान रहा है। छत्तीसगढ़ में नई टीम बनाने के बाद आगामी चुनाव में जीतने वाले चेहरों को टिकट देना सबसे बड़ी चुनौती होगी। जानकर बताते है कि ओम माथुर पार्टी में बूथ स्तर तक कार्यकर्तों से संवाद स्थापित करके फैसले लेने में माहिर हैं,इसलिए उनके अनुभव को लाभ छत्तीसगढ़ में भाजपा की वापसी के लिए किया जायेगा।

झाड़ू लेकर छत्तीसगढ़ पहुंचे संजीव झा

झाड़ू लेकर छत्तीसगढ़ पहुंचे संजीव झा

दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्ट खुद को देश के अन्य राज्यों में स्थापित करने में जुटी हुई है। अब तक दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय छत्तीसगढ़ में संगठन तैयार कर रहे थे,लेकिन यह जिम्मा बुराड़ी विधायक संजीव झा को दे दिया गया है।

उन्होंने 2012 में आप के गठन के बाद पार्टी ज्वॉइन की थी और 2013 में बुराड़ी से विधायक चुने गए थे। 2015 वह फिर से चुनाव जीतकर दिल्ली विधानसभा पहुंचे। राजनीति में पाक जाने के बाद उन्हें पार्टी ने बिहार और झारखंड का प्रवक्ता और प्रभारी नियुक्त किया गया था। सजीव झा अब छत्तीसगढ़ में प्रभारी बनकर आप को 2023 के लिए तैयार कर रहे हैं।

राज्यसभा में छत्तीसगढ़ का चेहरा बने राजीव शुक्ला

राज्यसभा में छत्तीसगढ़ का चेहरा बने राजीव शुक्ला

2022 में कांग्रेस वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने भी छत्तीसगढ़ की राजनीती में एंट्री ली है। 1978 में अपने शहर कानपुर में पत्रकार के रूप में काम शुरू करने वाले राजीव शुक्ला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी थे। राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की बहन हैं। मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे राजीव शुक्ला इस बार छत्तीसगढ़ कोटे से राजयसभा भेजा गया है। सोनिया गांधी के बेहद करीबी होने के कारण उनकी 10 जनपथ में बिना किसी रोक टोक के सीधे एंट्री हैं। माना जा रहा है,वह छत्तीसगढ़ के लिए 2023 के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।

रंजीत रंजन भी हैं सक्रिय

रंजीत रंजन भी हैं सक्रिय

राजीव शुक्ला के साथ रंजीत रंजन को भी 2022 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा गया है।सांसद बनने के बाद से वह लगातार छत्तीसगढ़ के दौरे कर रही हैं।माना जा रहा है कि वह छत्तीसगढ़ में महिलाओं को मजबूत करने की दिशा में अपनी भागीदारी निभाएंगी। रंजीत रंजन ने मधेपुरा से सांसद और जन अधिकार पार्टी के मुखिया पप्पू यादव ने साल 1994 में पप्पू यादव और रंजीता रंजन से शादी की थी।

शादी के एक साल बाद 1995 में रंजीता ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा ,लेकिन वह चुनाव में वह हार गई थी। उन्होंने इसके बाद साल 1999 में पप्पू यादव के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभाली। उसके बाद 2004 में कांग्रेस की टिकट से सुपौल लोकसभा सीट से चुनाव हार गई। रंजीता रंजन ने एक बार फिरइसी सीट से 2014 के कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव लड़ा ,इस बार जीतकर सांसद बनी।

संदीप पाठक की छत्तीसगढ़ में वापसी

संदीप पाठक की छत्तीसगढ़ में वापसी

आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब और दिल्ली चुनाव में रणनीति तैयार करने वाले संदीप कुमार पाठक भले ही दिल्ली में रहते हों,लेकिन उनका नाता छत्तीसगढ़ से है। बिलासपुर संभाग के मुंगेली में उनका घर हैं। आप संयोजक और दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रमुख रणनीतिकार हैं।

माना जाता है कि उनकी बनाई चुनावी रणनीति पर चलकर ही आप ने दिल्ली और पंजाब में बड़ी जीत हासिल की थी। उन्हें हाल ही में पंजाब कोटे से राज्यसभा संसद बनाया गया है। सांसद बनने के बाद वह छत्तीसगढ़ भी आ चुके हैं। यह लगभग तय है कि 2023 में आप के लिए छत्तीसगढ़ में जमीन तैयार करने में संदीप पाठक का अहम योगदान होगा।

इनकी हुई विदाई ,लेकिन रहेगा दखल

इनकी हुई विदाई ,लेकिन रहेगा दखल

भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी बदले,तो पुराने प्रभारियों को तो जाना ही था। 2018 के चुनाव से लेकर सरकार बनने के बाद तक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रभारी रहे पीएल पुनिया छत्तीसगढ़ से रुखसत कर दिया गया है। पुनिया के जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि प्रदेश में छोटेसे छोटे कार्यकर्ता तक से सीधा सम्पर्क रखने वाले पुनिया की स्थान कुमारी शैलजा कैसे ले सकेंगी।

इसके अलावा भाजपा का भी यही हाल है। भारतीय जनता पार्टी को आक्रामक मुद्रा में लेन का श्रेय डी पुरंदेश्वरी को जाता है। पुरंदेश्वरी ने भले ही छत्तीसगढ़ में कम समय के लिए प्रदेश प्रभारी का पद संभाला,लेकिन उन्होंने हर संभाग का दौरा करके कार्यकर्ताओं से बातचीत करके भाजपा संगठन को हकीकत से रूबरू करवाया और पार्टी में नई जान फूंकने की कोशिश की है। माना जा रहा है दोनों ही दल अपने इन दोनों नेताओं को छत्तीसगढ़ चुनाव के वक़्त रणनीतिकारों में जरूर शामिल करेंगे।

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