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बीकानेर की छतरगढ़ पुलिस डेढ़ साल से पाकिस्तानी कबूतर की कर रही मेहमाननवाजी, जानिए वजह?

बीकानेर, 8 अक्टूबर। राजस्थान के बीकानेर जिले के छत्तरगढ़ थाने का एक अनूठा मामला सामने आया है। यहां छतरगढ़ पुलिस करीब डेढ़ साल से एक संदिग्ध पाकिस्तानी कबूतर की मेहमान नवाजी में जुटी हुई है। थानाधिकारी से लेकर कॉन्टेबल तक संदिग्ध कबूतर को दिनभर दाना चुगाने से लेकर उसकी सुरक्षा व स्वास्थ्य का भी ख्याल रख रहे हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे ये कबूतर पुलिसकर्मियों के सिरदर्द बनने लगा है।

 Pakistani pigeons

दरअसल, छतरगढ़ तहसील के मोतीगढ़ गांव में पुलिस ने करीब डेढ़ साल पहले एक संदिग्ध कबूतर बरामद किया था। जिसके पंखों पर संदेश व पैर में बंधे छल्ले थे। छत्तरगढ़ पुलिस संदिग्ध कबूतर को बरामद कर थाने ले आई थी।इसकी सुचना सुरक्षा एजेंसी को दे दी थी लेकिन करीब डेढ़ साल बीतने के बाद भी सुरक्षा एजेंसी कबूतर की जाच करने थाने नही आई है जिससे ये कबूतर छत्तरगढ़ पुलिस के लिए सिरदर्दी बन हुआ है। कबूतर की अभी तक जांच नहीं होने के कारण छतरगढ़ थाने के जवान जगदीश गोदारा, दिलीप, अशोक सहित पूरा स्टाफ इस कबूतर की मेहमान नवाजी में बारी-बारी से जुटा है।

जानकारी के अनुसार भारत पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र में 14 मार्च 2020 को मोतीगढ़ निवासी हाजी जमाल खान के घर एक संदिग्ध कबूतर पुलिस ने बरामद किया था। उसके पैरों में छल्ला डाला हुआ था। कबूतर के पंखों पर मोहर लगी हुई थी। जिस पर चारणपुर टू लाहौर 225 किलोमीटर अंकित किया गया था।
पुलिस ने उच्च अधिकारियों व आईबी, बीएसएफ को इसके बारे में सूचना दी थी लेकिन दो बार लॉकडाउन के कारण सुरक्षा एजेंसिया अभी तक जांच के लिए नहीं पहुंची है। इसके चलते छत्तरगढ़ पुलिस को थाने से इसकी सेवाएं के लिए अतिरिक्त पुलिस जवान को इस कबूतर की मेहमान नवाजी तैनात करना पड़ रहा है।

कबूतर की सेवा में तैनात जवान जगदीश व अशोक कुमार ने बताया कि कबूतर के लिए दाने पानी की पूरी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व स्वास्थ्य से लेकर इसका पूरा ख्याल रखते हैं। वही पुलिस निगरानी में पिछले डेढ़ साल से मेहमाननवाजी करवा रहे कबूतर लोहे के पिंजरे में कैद रहने से उड़ना भूल चुका है इसके साथ साथ पिंजरे में कैद रहने से कबूतर का वजन भी बढ़ गया है जिससे कबूतर अपने आप का दुःखी महसूस कर रहा है।

अतरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार का कहना है कि इस संदिग्ध कबूतर की देखरेख व दाना-पानी के लिए पुलिस को इसकी स्वास्थ्य के देखभाल करने के लिए समय-समय पर जवानों की ड्यूटी लगानी पड़ी रही है। इससे कई विभिन्न अपराधिक गतिविधियों कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वहीं, सुरक्षा एजेंसियों के नहीं पहुंचने तक थाना स्तर पर कबूतर को रखने की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा एजेंसियों को जांच के लिए लिखा गया है। सुरक्षा एजेंसी व जांच रिपोर्ट आने के बाद कबूतर को आजाद किया जाएगा।

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