Bihar News: बिहार के सूफी संतों के इतिहास पर अमजद लिख रहे किताब, लेखक ने बताया क्यों आया ये ख़याल ?
Bihar Author News: बिहार के यूवा लेखक अमजद इन दिनों सूफी संतों के इतिहास को ज़िंदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वह इस मुद्दे पर एक किताब भी लिख रहे हैं। वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में लेखक अमजद ने अपनी बात रखी और बताया कि उनकी किताब में क्या ख़ास है।
बिहार के सूफी संतों के इतिहास को एकत्रित करना शेखपुरा ज़िला से ताल्लुक रखने वाले सय्यद अमजद हुसैन ने शुरू कर दिया है। लेखक अमजद ने कहा कि सूफी संतों को आपसी सौहार्द और भाईचारे का मिसाल माना जाता है। दरगाहों पर हिंदू-मुस्लिम की हाज़री होती रहती है।

बिहार में सूफीवाद की शुरुआत 1180 ईसवी मानी जाती है, जब इमाम ताज फ़क़ीह मनेर शरीफ आए थे। गया के खानखाही चाय से ले कर हिंदू अनुयायियों के बीच दफन सूफी संत सैयद अहमद जाजनेरी, सभी आपसी सौहार्द का मिसाल है।
लेखक अमजद की किताब 'बिहार और सूफीवाद' का प्रकाशन जल्द ही होगा। पश्चिम बंगाल स्थित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद विश्वविद्यालय में शोधकर्ता के रूप में कार्य कर रहे अमजद की किताब हिंदी भाषा में 200 पेज की होगी। इसमें बिहार के सूफी आदेश, सूफी संत और उनकी शिक्षा पर खास शोध किया गया है।
अमजद ने कहा कि मैं चाहता हूं सूफी संतों के बारे में सभी पढ़े जिससे राज्य और देश में अमन शांति का पैगाम जाये। सूफी संतों पर किताब क्यों? सवाल पर उन्होंने कहा कि महान सूफी संतों के बारे में हर किसी को पता होना चाहिए, जिन्होंने आपसी भाईचारे और आपसी सौहार्द पर ज़ोर दिया है।
बिहार में सैयद मीर मंझन जैसे सूफी संत थे जिन्होंने अपनी किताब मधुमालती में आपसी सौहार्द पर ज़ोर दिया था और हिंदावी भाषा (हिंदी-उर्दू) में कई ग़ज़ल भी लिखते थे। सूफ़ी संतों पर थोड़ा कार्य फ़ारसी और उर्दू भाषा में पुराने लेखकों ने किया था। लेकिन, 20वीं शताब्दी में इनपर कोई कार्य नहीं हुआ है।
मैंने पुराने लेख को पढ़ने के बाद उसपर गहरी शोध करने के बाद ही जानकारी किताब में डाली है। मुझे लगता है पूरे दुनिया को ख़ास कर बिहारी को सूफीवाद का ज्ञान लेना चाहिए। क्योंकि यह वह ज्ञान है जो लोगो के आपसी सौहार्द और सद्भाव को बढ़ावा देता है। सूफीवाद का ज्ञान लेने से बिना धर्म की बाधा को देखते हुए लोग एक दूसरे के करीब आयेंगे।












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