Women Empowerment: जिस्मफरोशी के कलंक को धोकर हुनरमंद बन रही महिलाएं, जगा रहीं रोज़गार की अलख

Women Empowerment: साधारण महिलाओं के समाज में पुरुष के बराबर में व्यवसाय या फिर कोई और रोज़गार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं जिस्मफरोशी के धंधे से बाहर निकल कर रोजगार करना तो औऱ भी ज्यादा...

Women Empowerment: साधारण महिलाओं के समाज में पुरुष के बराबर में व्यवसाय या फिर कोई और रोज़गार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं जिस्मफरोशी के धंधे से बाहर निकल कर रोजगार करना तो औऱ भी ज्यादा मुश्किल है। लेकिन इन मानसिकता को बदलते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रेड लाइट एरिया की महिलाओं ने नई ज़िंदगी जीने की ठानी है। वह देह व्यापार के कलंक को धोकर अब आत्मनिर्भर बने हुए स्वरोज़गार की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही रोजगार की अलख भी जगा रही हैं। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है पूरा मामला ?

johra sanwardhan sahayta samooh

मुजफ्फरपुर जोहरा गली ( तवायफ मंडी, चतुर्भुज स्थान) में सालों से देह व्यापार का गोरखधंधा होता रहा है। इस गली की कुछ महिलाओं ने जिस्मफरोशी के धंधे का कलंक धोखर खुद को सभ्य समाज में ढालने की कोशिश कर रही है। जोहरा संवर्धन स्वयं सहायता समूह ने पहल करते हुए उन महिलाओं को नई ज़िदगी देने का बीड़ा उठाया है। इन महिलाओं का न सिर्फ हुनरमंद बनाया जा रहा है, बल्कि उनके लिए रोजगार मुहैय्या भी करवाई जा रही है।

जिस्मफरोशी के दल दल से निकल कर अब ये महिलाएं कटपीस से कपड़ा बनाने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही गारमेंट्स की बिक्री भी कर रही हैं। जोहरा संवर्धन स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की मानें तो जोहरा गली की मंहिलाओं को सभ्य समाज में ज़िंदगी बसर करना आसन नही है। समाज के लोग जल्दी इस बात को कबूल नहीं करेंगे। इसलिए चतुर्भुज स्थान की प्रथम नृत्यांगना जोहरा बाई के नाम पर बनाया गया समूह उन महिलाओं की मदद करता है जो खुद की ज़िंदगी संवारना चाहती है।

जोहरा संवर्धन स्वयं सहायता समूह के ज़रिए जोहरा गली की कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। वह दुकानों में बचे कपड़ों के कतरन से ब्लाउज़, फ्रॉक और कुर्ती बना रहीं हैं। वह लोग दुकानों से कटपीस इकट्ठा कर लाती हैं। उसके बाद डिजाइन तैयार कर कपड़ों की कटिंग कर सिलाई की जाती है। यह काम कर के महिलाएं खुश तो हैं लेकिन मेहनत की सही कीमत नहीं मिलने से मायूस भी हैं। आपको बता दें कि साल 2015 में जोहरा संवर्धन स्वयं सहायता समूह की शुरुआत हुई थी। इतने साल बीत जाने के बाद भी इन्हें कपड़े बेचने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

सहायता समूह की परेशानियों को देखते हुए धर्मेंद्र कुमार सिंह (जीएम, जिला उद्योग विभाग) ने बताया कि इन महिलाओं की मदद के लिए सरकार की तरफ से मदद के लिए क़दम उठाए जा रहे हैं। उद्योग मेला में जोहरा संवर्धन स्वयं सहायता समूह का स्टॉल भी लगवाया गया था। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को जल्द ही इस काम को जारी रखने के लिए जगह भी मुहैय्या कराई जाएगी। वहीं बिहार के उद्योग मंत्री समीर महासेठ ने हाल ही में महिलाओं के काम की सराहना की थी और हर मुमकिन मदद करने का आश्वासन भी दिया था। सरकार के नुमाइंदों ने भरोसा तो दिया है, लेकिन यह सिर्फ आश्वासन रह जाएगा या इन महिलाओं को सरकार का तोहफा मिलेगा, यह तो बाद में पता चलेगा। फिलहाल सहायता समूह द्वारा उठाए गये इस कदम की लोग जमकर सराहन कर रहे हैं।

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