Bihar Village: ग्राम प्रतिनिधियों के चुने हुए पूरा होने वाला है 1 साल, लेकिन अधर में पड़ा है विकास कार्य
Bihar Village: भारत सरकार ने वित्त आयोग की अनुशंसा पर पंचायती राज संस्थाओं के बीच अनटाइड 768.40 करोड़ रुपये फंड जारी होने के पहले सप्ताह में ही तय मानक के तौर पर वितरित किया गया था। भारत सरकार ने टाइड मद में 1 हज़ार...
Bihar Village: बिहार के विभिन्न ज़िलों में पंचायत चुनाव के 1 साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन विकास कार्य अभी भी अधर में पड़ा है। केंद्र की तरफ़ 15वें वित्त आयोग की सिफारिश पर प्रदेश के लिए 1 हज़ार 152.60 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया । इस फंड का इस्तेमाल तय मानक के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद द्वारा किया जाना था। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र सरकार की तरफ से पहली किश्त 1 हज़ार 152.60 करोड़ रुपये फंड प्रदेश को मिला।

'राशि आवंटित पर नहीं हो रहा काम'
केंद्र की तरफ से मिले फंड से प्रदेश के 8 हज़ार 67 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समिति और 38 जिला परिषद क्षेत्र में विकास कार्य होना था। केंद्र की तरफ से मंज़ूर राशि वित्तीय वर्ष 2022-23 में ही इस्तेमाल करना था। जिसका वितरण पंचायती राज संस्थाओं के बीच इंस्टॉलमेंट में किया जाना था। इसके तहत पहले 70 फीसद, फिर 15-15 फिसद का वितरण होना था। जिसमें बिहार के ग्राम पंचायतों को 806.82 करोड़, पंचायत समितियों को 172.89 करोड़ और जिला परिषदों को 172.8 रुपया आवंटित किया गया।

1 हज़ार 921 करोड़ रुपये की राशि आवंटित
भारत सरकार ने वित्त आयोग की अनुशंसा पर पंचायती राज संस्थाओं के बीच वित्तीय वर्ष 2022-23 में अनटाइड फंड 768.40 करोड़ रुपये जारी किया। जिसे राशि आवंटित करने के पहले सप्ताह में ही तय मानक के तौर पर वितरित किया गया था। भारत सरकार ने टाइड मद में 1 हज़ार 152.60 और अनटाइड मद में 768.40 करोड़ रुपये प्रेदश को दिया। कुल मिलाकर 1 हज़ार 921 करोड़ रुपये की राशि बिहार सरकार को आवंटित की गई। इसके ज़रिए ग्रामीण स्तर पर हर पंचायतों में विकास कार्य होना था, लेकिन 1 साल पूरे होने को हैं और ग्रामीण स्तर पर विकास ज़ीरो है।

‘धरातल पर काम के लिए चाहिए पारदर्शिता’
वन इंडिया हिंदी ने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से इस बाबत बात की तो उन्होंने कहा सरकार की तरफ़ से राशि तो ज़रूर आवंटित की गई है, लेकिन जिस तरह का पैमाना तय किया गया है, उसे अभी तक जनप्रतिनुधि समझ ही नहीं पाएं हैं। धरातल पर काम तब ही मुमकिन हो पाएगा जब काम में पारदर्शिता होगी। काम करवाने के बाद हाथ में पैसा आता नहीं और बंदर बांट जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। सरकार ने जो मानक तय किया है उसके मुताबिक काम करना ज्यादातर प्रतिनिधियों को समझ ही नहीं आ रहा है। सरकार द्वारा खुद संबंधित व्यक्ति के खाते में भुगतान किया जा रहा है। भुगतान किस पैमाने पर हो रहा है। यह जनप्रतिनिधियों के समझ से बाहर है। इसलिए राशि आवंटित होने के बाद भी लोग काम करने में असमर्थ हैं।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
वन इंडिया हिंदी ने इन सारे मसले पर जब ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों का पता किया तो अभी तक बिहार के पंचायतों में विकास का कोई भी काम नहीं हुआ है। कहीं पर अगर गलती से कुछ काम शुरू भी हुआ तो आधा-अधूरा काम होने के बाद मामला अधर में पड़ा हुआ है। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि मुखिया के पिछले कार्यकाल में काम हुआ भी था लेकिन इस कार्यकाल में लोग विकास की राह देख रहे हैं। कोई भी कार्य नहीं हुआ है। स्ट्रीट लाइट, नाला निर्माण, नाला सफाई जैसे कई काम अधर में पड़े हैं लेकिन काम को अंजाम देने वाला कोई नहीं है।
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