Bihar Politics: क्या अनंत सिंह का हो जाएगा 'सियासी अंत', Sonu-Monu रखेंगे Mokama में राजनीति की नई नींव
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले और मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने पटना की बाढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। वे अभी बेउर जेल में हैं। सोनू-मोनू गैंग से जुड़ी एक गोलीबारी की घटना के बाद यह घटनाक्रम हुआ है। अनंत सिंह मोकामा से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जहां उनकी पत्नी नीलम देवी वर्तमान में विधायक हैं।
मुंगेर के सांसद ललन सिंह के बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। अनंत सिंह ने ललन सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाज़ी की है, इसके बाद ही सियासी गलियारों में संभावनाओं की सियासत को हवा मिल गई है। वहीं अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अनंत सिंह का सियासी अंत होने वाला है।

अनंत सिंह और सोनू-मोनू गिरोह के बीच हिंसक झड़प: आपको बता दें कि 22 जनवरी को पटना के नौरंगा जलालपुर गांव में अनंत सिंह और सोनू-मोनू गिरोह के बीच हिंसक झड़प हुई। गोलीबारी से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, जिसके बाद कई एफआईआर और गिरफ्तारियां हुईं। बताया जाता है कि यह संघर्ष वित्तीय विवाद से उपजा था।
वित्तीय विवाद से हिंसा भड़की: बताया जा रहा है कि गोलीबारी की घटना सोनू-मोनू के ईंट भट्टे पर काम करने वाले मुकेश कुमार सिंह से जुड़े 60 लाख रुपए के विवाद को लेकर शुरू हुई थी। सोनू-मोनू पर गबन का आरोप लगने के बाद मुकेश ने अनंत सिंह से मदद मांगी थी। अनंत सिंह ने मुकेश के घर जाकर हस्तक्षेप किया और बाद में सोनू-मोनू से मुलाकात की, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई।
मुकेश कुमार सिंह ने किया ये दावा: मुकेश कुमार सिंह का दावा है कि पैसे के विवाद के कारण सोनू-मोनू ने उनके घर पर ताला लगा दिया था। पुलिस से संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई मदद नहीं मिली और उन्होंने मदद के लिए अनंत सिंह का रुख किया। अनंत सिंह ने मुकेश के हेमजा गांव स्थित घर का ताला खोलने के बाद नौरंगा जाकर सोनू-मोनू से मुलाकात की, जहां विवाद हुआ।
घटना के बारे में विरोधाभासी विवरण: सोनू-मोनू के पिता प्रमोद सिंह का आरोप है कि अनंत सिंह के गुट ने गोलीबारी की शुरुआत की। उनका मानना है कि चुनाव के दौरान नीलम देवी का समर्थन न करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इस बीच, एएसपी राकेश कुमार ने बताया कि झड़प के दौरान 15-20 राउंड फायरिंग हुई, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि 60-70 राउंड फायरिंग हुई।
सुबह 5 बजे अंधाधुंध फायरिंग: मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि 24 जनवरी को सुबह 5 बजे सोनू और उसके समर्थकों ने उनके घर पर अंधाधुंध फायरिंग की। हालांकि, पटना के ग्रामीण एसपी ने इलाके में पुलिस की मौजूदगी के कारण इस दावे पर संदेह जताया।
राजनीतिक परिणाम और गिरफ्तारियां: इस घटना ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कानून प्रवर्तन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं, जबकि मुंगेर के सांसद ललन सिंह ने अनंत सिंह का राजनीतिक समर्थन करने के लिए तेजस्वी की आलोचना की है। इन बयानों ने मोकामा में राजनीतिक गतिशीलता को बदल दिया है।
गोलीबारी के मामले में चार एफआईआर दर्ज: 22 जनवरी की गोलीबारी के मामले में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक अनंत सिंह की ओर से, दूसरी मुकेश सिंह की ओर से, तीसरी पचमहला पुलिस स्टेशन की ओर से और चौथी उर्मिला सिन्हा (सोनू-मोनू की मां) की ओर से। गिरफ़्तारियों में विवाद में शामिल दोनों गुटों के लोग शामिल हैं।
सोन-मोनू रखेंगे राजनीति की नई नींव: इस घटना से बिहार की कानून व्यवस्था पर संदेह पैदा हो रहे हैं। वहीं अनंत सिंह के राजनीतिक सफर पर भी संशय पैदा होने लगा है। ललन सिंह पर अनंत सिंह द्वारा की गई तीखी टिप्पणी के बाद ये चर्चा तेज़ है कि नीतीश कुमार की पार्टी अब अनंत सिंह पर दांव खेलने से परहेज़ कर सकती है। वहीं सोनू-मोनू सियासी सफर की शुरुआत कर सकते हैं।












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