Bihar Election 2025: आरजेडी को बड़ा झटका, नेता प्रतिपक्ष का पद भी खतरे में? कौन जीत रहा बिहार इलेक्शन?

Bihar Election: बिहार की राजनीति में इस बार एक ऐसा मोड़ आया है जिसकी कल्पना शायद खुद आरजेडी ने भी नहीं की होगी। लंबे समय से सत्ता में लौटने का सपना देख रही राष्ट्रीय जनता दल 2025 के चुनावों में भारी चुनौती के दौर से गुजर रही है। जिन सीटों पर आरजेडी कभी मजबूत मानी जाती थी, वहां भी पार्टी लड़खड़ाती हुई दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा झटका खुद तेजस्वी यादव के राघोपुर से पीछे होने का है, जिससे पार्टी के भीतर बेचैनी और बढ़ गई है।

तेजस्वी न सिर्फ मुख्यमंत्री पद की दौड़ से दूर होते दिख रहे हैं, बल्कि अब नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तक पहुंचना भी मुश्किल होता जा रहा है। रुझान संकेत दे रहे हैं कि आरजेडी के लिए 2025 का चुनाव एक दर्दनाक अध्याय बन सकता है, जो पार्टी के भविष्य को नए सवालों के घेरे में ला रहा है। दलते राजनीतिक माहौल में आरजेडी के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। दूसरी ओर NDA एग्जिट पोल के अनुमान से आगे निकलती नजर आ रही है।

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तेजस्वी यादव की सीट पर बढ़ी चिंता

महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे तेजस्वी यादव के लिए राघोपुर सीट इस बार बेहद कठिन साबित हो रही है। 16वें राउंड तक उपलब्ध रुझानों में वह 9 हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं। यहां बीजेपी उम्मीदवार सतीश कुमार आगे बने हुए हैं। तेजस्वी यादव के पिछड़ने से उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी की अंदरूनी स्थिति दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

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नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी दूर

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए किसी दल के पास कम से कम 25 विधायक होना जरूरी है। वर्तमान रुझानों में आरजेडी मात्र 24-25 सीटों पर आगे दिख रही है। अगर आरजेडी 25 से कम सीटों पर सिमट जाती है, तो पार्टी को अपने दम पर नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं मिल पाएगा। यह स्थिति तेजस्वी और उनकी पार्टी दोनों के लिए सबसे बड़ा झटका होगी।

2020 की तुलना में बड़ी गिरावट

पिछले चुनाव यानी 2020 में आरजेडी ने 75 सीटें जीती थीं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इस बार की स्थिति देखें तो पार्टी का ग्राफ आधी से भी कम सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट संगठन की कमजोर तैयारी, अंदरूनी मतभेद और एनडीए की मजबूत चुनावी रणनीति का नतीजा हो सकती है।

2010 का इतिहास दोहराने के संकेत

2010 के चुनाव में भी आरजेडी के हाथ बड़ी हार लगी थी। उस समय पार्टी ने 168 सीटों पर चुनाव लड़ा था और मात्र 22 सीटें जीत पाई थी। अब 2025 के रुझान 2010 जैसे नतीजों की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे पार्टी की चिंता और बढ़ गई है।

महागठबंधन की स्थिति

महागठबंधन कुल मिलाकर 28 सीटों पर आगे दिख रहा है। इनमें कांग्रेस की 1 सीट और CPI(ML) की 1 सीट शामिल है। हालांकि यह आंकड़ा 2020 के मुकाबले बेहद कम है और विपक्ष के लिए एक कमजोर तस्वीर पेश करता है।

आरजेडी के दिग्गज नेताओं की स्थिति

खेसारी यादव

अभिनेता और आरजेडी नेता खेसारी यादव अपनी सीट से लगातार पिछड़ते दिख रहे हैं। 9वें राउंड तक वह लगभग 1752 वोटों से पीछे चल रहे हैं।

ओसामा शहाब

दूसरी ओर, आरजेडी नेता ओसामा शहाब अपनी सीट पर मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। 14वें राउंड के बाद वह 18,725 वोटों से आगे चल रहे हैं। पार्टी के कुछ गिने-चुने दिग्गज ही बेहतर स्थिति में नजर आ रहे हैं।

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