Bihar Politics: सर्वे में खुलासा, अति पिछड़ों की पहली पसंद BJP, नीतीश-लालू बहुत पीछे
Bihar Politics: लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां विभिन्न मुद्दों पर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं पीएम मोदी के बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के दांव से प्रदेश के सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। सियासी दांव पेंच के बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की पहली पसंद कौन सी पार्टी है?
आपको बता दें कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने देश में पहली बार ओबीसी रिज़र्वेशन लागू किया था। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न से नवाज़ने के बाद बिहार की राजनीति पर इसका प्रभाव आगामी लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।

बिहार की सियासत में पीएम मोदी के इस दांव का क्या असर पड़ सकता है। इस तस्वीर को साफ़ करने के लिए सी वोटर ने एक सर्वे किया, जिसमें अति पिछड़े समुदाय का झुकाव किस पार्टी की तरफ़ है त्वरित सर्वे से जानने की कोशिश की।
सी वोटर की टीम ने पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से नवाज़ने के बाद बिहार में अति पिछड़े वोटर्स की पसंद को लेकर उनकी राय जानी। सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये। सी वोटर सर्वे के मुताबिक जो आंकड़े आए उसमें अति पिछड़े समुदाय को 40 फिसदी लोगों की पहली पसंद भाजपा थी।
राजद को 27 फीसदी लोगों ने पसंद किया, वहीं जदयू को 16 फिसदी लोगों ने पसंद किया। इसके अलावा कांग्रेस को 6 फिसदी लोगों ने पसंद किया। वहीं 11 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें इस मामले में पता नहीं। आपको बता दें कि यह आंकड़े 1250 लोगों से बातचीत के आधार पर निकाले गए हैं।
बिहार में जातीय समीकरण की बात करें तो सबसे ज्यादा आबादी अति पिछड़े समुदाय की है। बिहार की कुल आबादी में 36 प्रतिशत आबादी पर अति पिछड़े समुदाय का क़ब्ज़ा है। इसके बाद ओबीसी समुदाय के लोक करीब 27 फीसदी है। इसका अलावा एससी समुदाय का क़ब्ज़ा 20 फीसदी है।
सर्वण समुदाय के लोग 15 फीसदी हैं, वहीं दो फीसदी एसटी समुदाय के लोग हैं। आंकड़ों से यह साफ है कि अति पिछड़े और पिछड़े समुदाय की आबादी बिहार सियासी फ़िज़ा बदलने में अहम किरदार निभाते आए हैं। इस समीकरण को कोई भी राजनीतिक पार्टी नजरअंदाज़ नहीं कर सकती है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़े और अति पिछड़े समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। इसमें कोई दो राय नहीं है। यही वजह है कि उन्हें 'जननायक' की संज्ञा दी जाती है। उन्हें भारत रत्न से नवाज़ने का फ़ैसला भाजपा के लिए कितना फायदेमंद हुआ यह तो चुनाव के परिणाम से ही पता चल पाएगा।












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