कौन हैं संजय यादव? जिसकी वजह से लालू परिवार में हो रहे खुलेआम झगड़े, तेज प्रताप के बाद, रोहिणी-मीसा भी गुस्सा
Sanjay Yadav Lalu Yadav Family Conflict: बिहार की राजनीति में लालू यादव का परिवार हमेशा सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। घर के अंदरूनी झगड़े अब खुले मंच पर आने लगे हैं। तेज प्रताप यादव के बाद बहन रोहिणी आचार्य और मिसा भारती भी बगावत के मूड में हैं। दिलचस्प ये है कि इस पूरे झगड़े के पीछे जिस शख्स का नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वो लालू परिवार का सदस्य नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव का खासमखास-राज्यसभा सांसद संजय यादव हैं।
कहा जा रहा है कि संजय यादव न सिर्फ तेजस्वी की पॉलिटिक्स को दिशा दे रहे हैं, बल्कि धीरे-धीरे परिवार में दरार डालने वाले किरदार की तरह सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर इमोशनल पोस्ट लिखकर अपना गुस्सा जाहिर किया और साफ कहा कि उन्हें न तो पद की लालसा है और न राजनीति की भूख-उनके लिए सिर्फ आत्मसम्मान ही सबसे ऊपर है। वहीं मीसा भारती ने भी पार्टी के अंदर इसको लेकर विरोध किया है।

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर ये संजय यादव कौन हैं, जो लालू परिवार की एकजुटता को हिला रहे हैं और आरजेडी में हलचल मचा रहे हैं? ऐसे में आइए संजय याजव की पूरी कुंडली जानते हैं, साथ में ये भी जानेंगे कि तेजस्वी यादव के साथ इनकी दोस्ती इतनी गहरी कैसे हुई।
🔵 Who is Sanjay Yadav: कौन हैं संजय यादव
🔹 हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल सिरोही गांव के रहने वाले संजय यादव वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ सांसद तक सीमित नहीं है। RJD पार्टी के भीतर फैसलों और रणनीतियों में उनका बड़ा दखल माना जाता है। संजय का ज्यादातर समय डेटा एनालिसिस और बिहार की राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करने में जाता है।
🔹 संजय यादव का जन्म 24 फरवरी 1984 को हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के नांगल सिरोही गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रभाती लाल और माता का नाम बसंती देवी है। संजय यादव ने 20 जून 2014 को सुनीष्ता से शादी की है और उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं -मिराया और तान्या राव।
🔹 संजय यादव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद, मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में तीन मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम किया। लेकिन 2010 के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रियता बढ़ाई।
🔹 2024 में संजय यादव को आरजेडी ने राज्यसभा के लिए नामित किया। इससे पहले, उन्होंने पार्टी के लिए कई चुनावी रणनीतियों में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, उन्होंने राजनीति में आने से पहले संकोच किया था, लेकिन लालू प्रसाद यादव और अन्य नेताओं के दबाव में उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की।

🔵 संजय यादव राजनीतिक सफर और पार्टी में प्रभाव (Sanjay Yadav Political Background)
संजय यादव ने 2012 में आरजेडी जॉइन की। 2015 और 2020 के बिहार चुनावों में उन्होंने पार्टी को मजबूती देने में सक्रिय भूमिका निभाई। तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी के तौर पर उनकी छवि पार्टी में मजबूत है।
हालांकि विवाद भी संजय के राजनीतिक करियर का हिस्सा रहे। 2021 में तेज प्रताप यादव ने उन्हें NRI कहकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके अलावा संजय यादव को बिहार जमीन घोटाले से जुड़े मामले में CBI ने पूछताछ के लिए बुलाया। 2024 में संजय यादव को आरजेडी ने राज्यसभा के लिए नामित किया और वे राज्यसभा सांसद बने।
आरजेडी के भीतर संजय यादव पर लगातार हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि झंडे और प्रचार सामग्री भी उनकी ही कंपनी से खरीदनी पड़ती है। 2021 में जब जगदानंद सिंह के खिलाफ आकाश यादव को सस्पेंड किया गया था, तब भी पर्दे के पीछे संजय यादव की भूमिका बताई गई थी। इस पूरे मामले पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी निशाना साधा और इसे "सामाजिक न्याय का पाखंड" करार दिया।

🔵 तेजस्वी यादव और संजय यादव की दोस्ती: क्रिकेट से राजनीति तक
Tejashwi Yadav with Sanjay Yadav: संजय और तेजस्वी की दोस्ती क्रिकेट के मैदान से शुरू हुई। तेजस्वी के आईपीएल दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के समय संजय उनसे जुड़े। जब लालू यादव जेल गए, तो परिवार ने तेजस्वी को पटना में सक्रिय राजनीति में लाने की जिम्मेदारी दी। उसी समय संजय यादव को बुलाया गया और तभी से उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई।
संजय यादव की एंट्री 2012 में तब हुई जब लालू जेल में थे और तेजस्वी क्रिकेट छोड़ राजनीति में उतर रहे थे। दिल्ली से पटना लौटते तेजस्वी को एक भरोसेमंद साथी चाहिए था, तभी अखिलेश यादव ने उनकी मुलाकात संजय से कराई। संजय पहले सपा में रणनीति बना चुके थे, लेकिन सब छोड़ पटना आ गए। देखते ही देखते वे तेजस्वी के "आंख-कान" बन गए। खास बात ये कि लालू के जेल से बाहर आने पर भी उनका प्रभाव घटा नहीं, बल्कि और बढ़ा। आज हाल ये है कि आरजेडी में अगर किसी को लालू या तेजस्वी तक पहुंचना है, तो दरवाजा पहले संजय से ही खुलता है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आज तेजस्वी यादव को "युवा और आधुनिक नेता" के रूप में पेश करने में संजय यादव की रणनीतिक भूमिका अहम रही है। संजय यादव की पहचान तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार के रूप में बन चुकी है। उनकी रणनीतियों ने पार्टी को 2015 और 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता दिलाई।

🔵 Sanjay Yadav Net Worth: संजय यादव संपत्ति
संजय यादव के पास कुल 2 करोड़ रुपये की संपत्ति है। संजय यादव के पास एक लाख कैस और 44 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा है। एनएसएस, डाक बचत में 7 लाख रुपये और एलआईसी और अन्य बीमा में 9 लाख रुपये निवेश है। बतौर राज्यसभा सांसद संजय यादव को लगभग हर महीने 2 लाख रुपये सैलरी मिलती है।
🔵 परिवार और पार्टी में बढ़ती खींचतान
संजय यादव की बढ़ती भूमिका और तेजस्वी के लिए रणनीतिक फैसलों में उनकी भागीदारी ने परिवार के भीतर नाराजगी पैदा की है। तेज प्रताप यादव के बाद अब रोहिणी आचार्य ने भी अपनी पोस्ट के जरिए अपने असंतोष का इशारा किया है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह खींचतान भविष्य में आरजेडी के भीतर और लालू परिवार में पद, प्रभाव और सत्ता को लेकर और बढ़ सकती है। हाल ही में, 'बिहार अधिकार यात्रा' के दौरान एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें संजय यादव तेजस्वी यादव की फ्रंट सीट पर बैठे थे। इस पर रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और इसे पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक संघर्ष का संकेत माना।
संजय यादव सिर्फ एक सांसद नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार और परिवार के भीतर छुपी खींचतान का कारण भी बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई बस की तस्वीर और रोहिणी के इमोशनल पोस्ट ने साफ कर दिया है कि लालू परिवार में अब खुलकर विवाद सामने आने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय यादव की बढ़ती शक्ति और तेजस्वी पर उनका प्रभाव आरजेडी के लिए अवसर साबित होगा या परिवार में और तनाव बढ़ाएगा।












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