कौन हैं JDU विधायक संजीव कुमार, जो RJD में हुए शामिल, अथाह संपत्ति के हैं मालिक, फैमिली बैकग्राउंड भी तगड़ा!
Bihar Election 2025 (Dr.Sanjeev Kumar): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीति में तेज हलचल शुरू हो गई है। खगड़िया जिले की परबत्ता सीट से जदयू के विधायक डॉ. संजीव कुमार ने 3 अक्टूबर को अपने हजारों समर्थकों के साथ आरजेडी में शामिल हो गए हैं। इस कदम को लेकर पूरे इलाके में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि संजीव कुमार का यह कदम न सिर्फ जदयू के लिए बड़ा झटका है बल्कि आरजेडी के लिए खगड़िया और आसपास की सीटों पर नई उम्मीदें भी जगा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं डॉ. संजीव कुमार के बारे में।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "संजीव कुमार पार्टी में शामिल हो गए हैं, हम उनका स्वागत करते हैं, कई लोग हैं जो शामिल होने के इच्छुक हैं। सीट बंटवारे की घोषणा जल्द ही की जाएगी।''

🔹 Who is Dr.Sanjeev Kumar: कौन हैं डॉ. संजीव कुमार?
परबत्ता से विधायक डॉ. संजीव कुमार राजनीति में नए चेहरों में गिने जाते हैं, लेकिन उनका परिवार लंबे समय से इस इलाके की राजनीति में बड़ा नाम रहा है।
डॉ. संजीव कुमार, पूर्व मंत्री और पांच बार के विधायक रहे डॉ. रामानंद प्रसाद सिंह (आरएन सिंह) के बेटे हैं। उनके पिता जदयू के मजबूत स्तंभ माने जाते थे और नीतीश सरकार में परिवहन मंत्री भी रहे। इसीलिए जब संजीव कुमार 2020 में परबत्ता सीट से पहली बार विधायक बने, तो लोगों को इसमें परिवार की मजबूत पकड़ का बड़ा योगदान दिखाई दिया।
🔹 डॉ. संजीव कुमार शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि
डॉ. संजीव कुमार का जन्म 8 नवंबर 1979 को पटना में हुआ। वे पढ़ाई में शुरू से ही तेज रहे। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल और सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज से की। राजनीति में आने से पहले वे डॉक्टर के रूप में काम करते रहे और आज भी पटना में उनका एक डायग्नोस्टिक सेंटर चलता है। इस मेडिकल बैकग्राउंड के कारण उन्हें हेल्थ सेक्टर से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ है और विधानसभा में भी उन्होंने कई बार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग की।

🔹 Dr.Sanjeev Kumar Career: विधायक के तौर पर कामकाज
2020 में पहली बार विधायक बनने के बाद डॉ. संजीव कुमार ने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्य करवाए। उन्होंने गोगरी-जमालपुर में नई परियोजनाओं का उद्घाटन किया और अधूरी योजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया।
वे खास तौर पर अगवानी घाट-सुल्तानगंज पुल की टूटी संरचना को लेकर लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने सीएम को ज्ञापन सौंपकर पुल का पुनर्निर्माण कराने की मांग की और इसकी अहमियत लोगों के सामने रखी। इसके अलावा उन्होंने बेतिया मेडिकल कॉलेज का नाम महारानी जानकी कुंवर के नाम पर रखने की भी मांग की थी।
🔹 Dr.Sanjeev Kumar Net Worth: डॉ. संजीव कुमार की संपत्ति
- डॉ. संजीव कुमार की कुल चल और अचल संपत्ति 19 करोड़ 87 लाख रुपये की है। उनके ऊपर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियां हैं।
- डॉ. संजीव कुमार ने अलग-अलग बैंक अकाउंट में 84 लाख रुपये जमा किए हैं। कंपनियों में बांड, डिबेंचर और शेयर में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश है।
- डॉ. संजीव कुमार ने एलआईसी या अन्य बीमा पॉलिसियों में 49 लाख रुपये निवेश किए हैं। उनके पास दो-तीन कार हैं, उनकी कुल कीमत एक करोड़ रुपये के आसपास है। डॉ. संजीव कुमार के पास 45 लाख रुपये के सोने, चांदी और हीरे के गहने हैं।

🔹 NDA से नाराजगी और बदलते समीकरण
बीते कुछ महीनों से डॉ. संजीव कुमार की एनडीए से नाराज़गी खुलकर सामने आ रही थी। वे लगातार पार्टी और सरकार के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे थे। 25 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खगड़िया दौरे में उनकी गैरहाज़िरी और 27 सितंबर को परबत्ता में जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन से गायब रहना इस बदलाव का साफ संकेत माना जा रहा था।
डॉ. संजीव कुमार अपने बेबाक अंदाज और मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। किसानों की समस्याएं हों, जमीन विवाद हो या सरकारी प्रोजेक्ट्स में गड़बड़ी, उन्होंने सत्ता पक्ष में रहते हुए भी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने से परहेज़ नहीं किया। यही वजह है कि उन्हें आम लोगों के बीच एक अलग पहचान मिली।
🔹 क्यों है RJD में शामिल होना बड़ा फैसला?
डॉ. संजीव कुमार का राजद में शामिल होना इसलिए अहम है क्योंकि परबत्ता क्षेत्र जदयू के लिए परंपरागत गढ़ माना जाता है। यहां से उनके पिता कई बार विधायक रह चुके हैं। ऐसे में संजीव कुमार का आरजेडी में जाना जदयू की पकड़ को कमजोर कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव की आरजेडी को खगड़िया और आसपास की सीटों पर मजबूत आधार की जरूरत है। डॉ. संजीव का साथ मिलने से पार्टी को न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती मिलेगी बल्कि इलाके की सवर्ण राजनीति में भी एक नया कार्ड खुलेगा।
डॉ. संजीव कुमार की एंट्री से खगड़िया और परबत्ता का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके हजारों समर्थक किस हद तक आरजेडी को फायदा पहुंचाते हैं और क्या वाकई वे 2025 के चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभा पाएंगे। एक तरफ जदयू अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी तरफ आरजेडी इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।












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