OI Exclusive: 'जिंदगी की पूरी कमाई राम मंदिर को दे दी' EX गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने चंपत राय पर लगाए आरोप

OI Exclusive Ex- S. Lakshmi Narayanan: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट पहले से ही चंदे और दान को लेकर सवालों के घेरे में है। इसी बीच भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव (पूर्व IAS अधिकारी) एस. लक्ष्मी नारायण (S Lakshmi Narayana) ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

Oneindia से बातचीत में एस. लक्ष्मी नारायण ने दावा किया कि उन्होंने अपनी मां की याद में करीब 70 से 80 लाख रुपये की लागत से 24 कैरेट सोने से मढ़ी हुई विशेष रामचरितमानस बनवाकर राम मंदिर को समर्पित की थी।

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लेकिन आज तक उन्हें उस चढ़ावे की कोई रसीद नहीं मिली और न ही यह जानकारी दी गई कि वह रामचरितमानस अब कहां रखी गई है।

मां की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए बनवाई थी स्वर्ण रामचरितमानस

एस. लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उनकी मां जीवनभर भगवान राम का नाम लिखती रहीं। बीमारी के दौरान भी बिस्तर पर लेटे-लेटे राम-राम लिखती थीं। मां के निधन के बाद पूरे परिवार ने फैसला किया कि उनके गहनों को भगवान राम को समर्पित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि गीता प्रेस से विशेष अनुमति लेकर रामचरितमानस की मूल पांडुलिपि प्राप्त की गई। इसके बाद तांबे की प्लेटों पर पूरी रामचरितमानस लिखवाई गई और उन प्लेटों पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई। इसमें उनकी मां और पत्नी के गहनों का सोना इस्तेमाल हुआ। इस दौरान लगभग 70 से 80 लाख रुपये खर्च हुए, जिसकी रसीदें भी उनके पास मौजूद हैं।

S Lakshmi Narayana ने चंपत राय पर लगाए क्या-क्या गंभीर आरोप?

पूर्व केंद्रीय सचिव ने 'Oneindia' से बातचीत में चंपत राय के व्यवहार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सीधे और तीखे आरोप लगाए:

9-9 घंटे इंतजार कराया, मिलने तक की तमीज नहीं दिखाई

लक्ष्मी नारायण ने कहा, शुरुआत में (2021 में) मैंने अपने पूर्व बॉस नृपेंद्र मिश्रा और वरिष्ठ वकील के. परासरन के माध्यम से चंपत राय से संपर्क किया था। तब वे बहुत विनम्रता से मिले और कहा कि इसे मुख्य रामलला की मूर्ति से महज 15 इंच की दूरी पर रखवाएंगे।

लेकिन जब साल 2024 में मंदिर बनने के बाद मैं ट्रक में कारीगरों और इस सोने की रामायण को लेकर अयोध्या पहुंचा, तो चंपत राय का व्यवहार पूरी तरह बदल चुका था। उन्होंने मुझे 9 घंटे तक बाहर इंतजार कराया। मैंने 10 बार अपना विजिटिंग कार्ड अंदर भेजा, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला।

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घमंड में चूर हैं चंपत राय, खुद को भगवान राम से ऊपर समझते हैं

उन्होंने बताया कि जब वे किसी तरह चंपत राय से दोबारा मिले, तो चंपत राय ने बेहद अहंकार में कहा, "ऐसे तो बहुत लोग मेरे पास करोड़ों के जेवरात और सोने ला रहे हैं, केवल आपने ही थोड़ी दिया है! मैं सबको डिस्प्ले पर नहीं रख सकता।"

लक्ष्मी नारायण ने आरोप लगाया, "मैंने उनसे कहा कि मुझे कोई क्रेडिट या पब्लिसिटी नहीं चाहिए, लेकिन रामचरितमानस में साक्षात राम और हनुमान जी का वास होता है, लोग इसके दर्शन कर सकें। लेकिन वे नहीं माने। अयोध्या के स्थानीय पुलिस अधिकारियों (SP-IG) ने भी मुझसे दबी जुबान में कहा कि 'साहब, आजकल चंपत राय किसी की सुनते नहीं हैं, उनका घमंड बहुत बढ़ गया है और वे खुद को भगवान राम से भी ऊपर मानने लगे हैं।'"

आज तक नहीं दी कोई रसीद, गायब होने पर भी 'साइलेंट'

पूर्व गृह सचिव ने हैरान करने वाला दावा किया कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना और अनमोल ग्रंथ दान करने के बावजूद राम मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें आज तक कोई आधिकारिक रसीद (Receipt) या धन्यवाद पत्र नहीं दिया। जब रिश्तेदारों ने उन्हें बताया कि मंदिर के एंट्री पॉइंट से वह सोने की रामायण हटा दी गई है, तब उन्होंने पता किया तो मालूम चला कि उसे किसी 'गार्ड रूम' में बंद कर दिया गया है। उन्होंने चंपत राय को कई पत्र लिखे, व्हाट्सएप (WhatsApp) मैसेज किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

रिक्शा-साइकिल चलाने वालों से गिनवा रहे करोड़ों का चंदा

ट्रस्ट में चल रही वित्तीय गड़बड़ियों और सुपरविजन की कमी पर सवाल उठाते हुए पूर्व गृह सचिव ने कहा, "मैं खुद प्रशासन में सर्वोच्च पदों पर रह चुका हूं। मैंने देश के किसी मंदिर में ऐसी अव्यवस्था नहीं देखी। आप किसी बैंक या प्रोफेशनल एजेंसी को रखने के बजाय सिफारिश पर आए उन लोगों से करोड़ों रुपये के चढ़ावे और चंदे की गिनती करवा रहे हैं, जो पहले साइकिल या रिक्शा चलाते थे! यह अनसुना और बेहद आपत्तिजनक है। ऐसे लैक ऑफ सुपरविजन (निगरानी की कमी) के कारण ही आज गबन की खबरें आ रही हैं।"

"मोहन भागवत से गुहार लगाई, सीएम योगी को लिखा पत्र"

हताश होने के बाद लक्ष्मी नारायण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं के जरिए दिल्ली से हैदराबाद गए और वहां सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। मोहन भागवत ने उनकी सराहना की और अपने सेक्रेटरी से कहा कि चंपत राय को बोलकर इसे वापस वहीं रखवाया जाए। इसके बावजूद चंपत राय ने 'अभी दूसरी मंजिल बन रही है' जैसा बहाना बनाकर बात को टाल दिया।

अंत में, उन्होंने 24 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आधिकारिक पत्र लिखा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उन्हें जवाब भेजा है कि उनका आवेदन प्राप्त हो गया है और इस पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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