कौन हैं IAS योगेश सागर और अभिलाषा शर्मा? ठेकेदार रिशु श्री पर SVU की रेड के बीच चर्चा में क्यों आए दो ऑफिसर
IAS Yogesh Kumar Sagar-IAS Abhilasha Kumari Sharma: बिहार के चर्चित ठेकेदार रिशु श्री केस में जिन दो IAS अधिकारियों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे, उनमें 2017 बैच के IAS योगेश कुमार सागर (Yogesh Kumar Sagar) और 2014 बैच की IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा (Abhilasha Kumari Sharma) शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच के दौरान इन दोनों अधिकारियों से जुड़े कई दस्तावेज खंगाले गए।
जांच एजेंसियों ने सरकारी प्रोजेक्ट, विदेश यात्राओं, ट्रैवल बुकिंग और कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर जानकारी जुटाई। इसी बीच 27 मई 2026 को पटना में ठेकेदार रिशु श्री (Rishu Shree) के ठिकाने पर SVU की बड़ी रेड हुई, जिसने इस पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया। करीब 11 घंटे तक चली कार्रवाई में भारी मात्रा में ज्वेलरी और कैश बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे कि आखिर रिशु श्री केस में जिन IAS अधिकारियों का नाम आया, वे कौन हैं और उनका प्रशासनिक रिकॉर्ड कैसा रहा है।

कौन हैं IAS योगेश कुमार सागर (IAS Yogesh Kumar Sagar)
योगेश कुमार सागर (Yogesh Kumar Sagar) बिहार कैडर के 2017 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी प्रशासनिक पारी अररिया जिले के फोर्बसगंज में Sub-Divisional Officer यानी SDO के रूप में शुरू की थी। शुरुआती दौर में ही उन्हें तेज फैसले लेने वाले अधिकारी के तौर पर देखा गया। इसके बाद उन्हें भागलपुर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया, जहां शहरी विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ।
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बाद में वे उद्योग विभाग में Joint Secretary बने। इसके बाद बिहार स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के Managing Director की जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर उन्हें Bihar Urban Infrastructure Development Corporation यानी BUIDCo का MD बनाया गया। मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक उनका कार्यकाल BUIDCo में रहा। बाद में उनका तबादला सामाजिक कल्याण विभाग में Disabilities विभाग के Director पद पर कर दिया गया।
ED जांच में कैसे आया नाम
रिशु श्री (Rishu Shree) केस की जांच के दौरान ED ने दावा किया था कि BUIDCo में रहते हुए कुछ प्रोजेक्ट्स और ठेका प्रक्रियाओं की जांच की जरूरत है। एजेंसी ने पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) में दाखिल हलफनामे में आरोप लगाया था कि छपरा स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट (Chapra Storm Water Drainage Project) से जुड़ी फाइलों और कुछ यात्रा खर्चों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना था कि कुछ ट्रैवल बुकिंग रिश्तेदारों के नाम से कराई गई थीं और पटना के एक ट्रैवल एजेंट टिनिश कुमार (Tinish Kumar) के जरिए लाखों रुपये की बुकिंग हुई थी।
हालांकि बाद में लंबी जांच के बाद ED ने योगेश कुमार सागर (Yogesh Kumar Sagar) को क्लीन चिट दे दी। एजेंसी को उनके खिलाफ कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे सीधे तौर पर money laundering या अवैध लाभ लेने की पुष्टि हो सके। ED ने 2015 से 2025 तक BUIDCo से जुड़े कई अधिकारियों और निदेशकों के कार्यकाल की जांच की थी।
कौन हैं IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा (IAS Abhilasha Kumari Sharma)
अभिलाषा कुमारी शर्मा (Abhilasha Kumari Sharma) बिहार कैडर की 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं। उन्होंने शुरुआत में Ministry of Home Affairs में सेवा दी थी। बाद में बिहार कैडर में आने के बाद उनकी पहचान एक सक्रिय और प्रशासनिक पकड़ रखने वाली अधिकारी के रूप में बनी।
वे सीतामढ़ी की District Magistrate भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वित्त विभाग में Joint Secretary पद पर उनकी अहम भूमिका रही। इसी दौरान उन्हें Junior Administrative Grade यानी Additional Secretary रैंक में प्रमोट किया गया। वर्तमान में वे ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत चल रही Jeevika परियोजना में Additional CEO और Deputy Secretary के रूप में काम कर रही हैं।
अभिलाषा शर्मा पर क्या आरोप लगे
ED की जांच में अभिलाषा कुमारी शर्मा (Abhilasha Kumari Sharma) का नाम भी सामने आया था। एजेंसी ने अदालत में दायर दस्तावेजों में दावा किया कि रिशु श्री (Rishu Shree) की ओर से उन्हें कथित तौर पर महंगे गिफ्ट दिए गए थे। जांच में एक iPhone का भी जिक्र हुआ, जिसे लेकर एजेंसी ने सवाल उठाए थे।
इसके अलावा ED ने आरोप लगाया कि पटना के एक ट्रैवल एजेंट के जरिए उनके परिवार की यात्रा से जुड़े करीब 13 लाख रुपये के खर्च उठाए गए। एजेंसी इन वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक फैसलों के बीच संबंध तलाश रही थी। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच लंबे समय तक चलती रही।
कौन है रिशु श्री (Rishu Shree)
रिशु श्री (Rishu Shree) पटना का चर्चित ठेकेदार माना जाता है। उसकी कंपनियों ने बिहार के कई विभागों में प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इनमें Urban Development, Water Resources, Public Health Engineering, Health, Education और Rural Works Department जैसे विभाग शामिल बताए गए।
ED का आरोप रहा कि रिशु श्री (Rishu Shree) ने कई सरकारी अधिकारियों और नेटवर्क के जरिए tender प्रक्रिया में गड़बड़ी कर फायदा उठाया। जांच एजेंसी ने उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदाबाद और सूरत समेत कई शहरों में रेड के दौरान नकदी, डिजिटल डिवाइस, डायरी और दस्तावेज बरामद किए गए थे। इससे पहले उसकी 68 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति भी अटैच की जा चुकी थी।
रिशु श्री (Rishu Shree) का नाम पहली बार 1997 बैच के IAS अधिकारी संजीव हंस (Sanjeev Hans) से जुड़े मामले में भी चर्चा में आया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि सरकारी प्रोजेक्ट्स और ठेका प्रक्रिया से जुड़े कई वित्तीय रिकॉर्ड में उसका नेटवर्क सामने आया।
27 मई 2026 को पटना में बड़ी रेड
27 मई 2026 को विशेष निगरानी इकाई यानी SVU ने पटना में रिशु श्री (Rishu Shree) के ठिकाने पर बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी करीब 11 घंटे तक चली। जांच एजेंसी के मुताबिक, रेड के दौरान करीब 2 करोड़ रुपये की ज्वेलरी और लगभग ढाई लाख रुपये कैश बरामद किया गया। इस कार्रवाई की पुष्टि SVU के ADG पंकज दराद (Pankaj Darad) ने की।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात भी खंगाले। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी प्रोजेक्ट्स से जुड़े पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ। इस नई कार्रवाई के बाद रिशु श्री केस एक बार फिर बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया।
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