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Bihar Chunav: कौन हैं अफ़ज़ल अली? बिहार चुनाव 2025 में गौरा बौराम विधानसभा सीट से गेम चेंजर उम्मीदवार

Bihar Gaudabauram Assembly Seat? बिहार के दरभंगा जिले की गौरा बौराम विधानसभा सीट पर मुकाबला इस बार बड़ा ही दिलचस्‍प हो गया है। वोटिंग के पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के बीच चल रही फ्रेंडली फाइट खत्‍म हो गई क्‍योंकि मंगलवार को आरजेडी के बागी उम्मीदवार अफजल अली खान को वीआईपी ने अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी ने प्रेस कान्‍फ्रेंस कर ऐलान किया कि वीआईपी उम्‍मीदवार संतोष अपनी इस सीट से उम्‍मीदवारी वापस ले रहे हैं। जिसके बाद आरजेडी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे अफजल अली खान इस सीट के महागठबंधन की ओर से उम्‍मीदवार बन गए हैं। जानिए कौन हैं अफजल अली खान और कैसे इस सीट के लिए गेमचेंचर उम्‍मीदवार बन गए हैं?

Bihar Gaudabauram Assembly Seat

कौन हैं अफजल अली खान?

अफजल अली खान बिहार के दरभंगा जिले के गौरा बौराम विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और आरजेडी के पुराने नेता हैं। वह साल 2000 से आरजेडी से जुड़े हैं और उन्हें एक ईमानदार तथा वफादार "लालू के सिपाही" के रूप में जाना जाता है। अफजल अली खान ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई है और बिहार की पिछड़ी तथा अल्पसंख्यक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अफजल का जीवन सामाजिक न्याय, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विकास और मुस्लिम-यादव समीकरण पर केंद्रित रहा है।

RJD ने अफजल अली को पार्टी से किया निष्‍कासित

बता दें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में अफ़ज़ल अली खान को 6 साल के लिए निलंबित कर दिया है। खान दरभंगा जिले की गौरा बौराम विधानसभा सीट से आरजेडी के संभावित प्रत्याशी थे। आरजेडी का आरोप था कि महागठबंधन में ये सीट विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को दी गई थी फिर भी अफजल इस सीट से अपने लिए प्रचार कर रहे थे।

अफजल खान के आगे हारे तेजस्‍वी और लालू

दिलचस्प बात यह है कि मुकेस सहनी के अपनी पार्टी के उम्‍मीदवार वापस लिए जाने और मतदान से ठीक 38 घंटे पहले तक तेजस्वी यादव वीआईपी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे। आरजेडी मुखिया लालू यादव ने भी अफजल अंसारी पर नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया था, और पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था, लेकिन अफजल अपने रुख पर अड़े रहे।

पार्टी से निष्‍काषित करने के बाद कैसे लड़ रहे चुनाव?

बाद में, आरजेडी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अफजल अंसारी से लालटेन चुनाव चिह्न वापस लेने की मांग की, लेकिन उन्हें इसमें भी निराशा हाथ लगी।

अफजल क्‍या चुनाव में वोटरों का दिल जीत पाएंगे?

बता दें वीआईपी द्वारा अपना उम्मीदवार उतारे जाने और आरजेडी आलाकमान द्वारा संतोष सहनी को समर्थन देने के बाद, अफजल के समर्थक, विशेषकर गौड़ाबौराम के मुस्लिम वोटर, खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे। वे सालों से इस क्षेत्र में कड़ी मेहनत कर रहे हैं और पार्टी के विरोध के बावजूद अकेले ही लोगों के बीच जा रहे थे। जनता ने भी तेजस्वी द्वारा अफजल को निष्‍कासित किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया। पहले संतोष और अफजल के आमने-सामने होने से भाजपा उम्मीदवार सुजीत कुमार सिंह की जीत निश्चित मानी जा रही थी, लेकिन अब यह मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।

जानकारी के अनुसार, जनता से मिल रहे भारी समर्थन और आरजेडी के आंतरिक विरोध को देखते हुए, वीआईपी ने अंतिम समय में अपने उम्मीदवार को वापस लेने का निर्णय लिया। इस वजह से अफजल इस सीट पर बाजी पलट सकते हैं।

2020 में गौरा बौराम सीट से कौन जीता था चुनाव?

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में गौराबौराम सीट पर वीआईपी की स्वर्ण सिंह ने 59,538 वोट (41.26%) हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार अफ़ज़ल अली खान को हराया था, जिन्हें 52,258 वोट (36.21%) मिले थे। जीत का अंतर 7,280 वोटों का था। पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राजीव कुमार ठाकुर को 9,123 वोट (6.32%) मिले थे, जबकि अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा था।

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