Voter List 2003 ही आधार, फर्जी सर्टिफिकेट पर जुड़ रहा नाम, मतदाता सूची में धांधली की हैरतअंगेज़ रिपोर्ट
Voter List Update Bihar News: देश की लोकतांत्रिक नींव, मतदाता सूची ही जब सवालों के घेरे में आ जाए, तब जांच की सुई सिर्फ सिस्टम पर नहीं, समाज की सच्चाई पर भी घूमती है। बिहार के कई जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट में कई बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
इन कबूलनामों ने यह साबित कर दिया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, और फर्जी दस्तावेजों के सहारे कोई भी आसानी से वोटर बन सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं पूरा मामला, कैसे इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं?

1. बगहा से छपरा तक, एक जैसी स्वीकारोक्ति
पश्चिम चंपारण के बगहा के BLO ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि जिनका जन्म 1987 से पहले हुआ है और 2003 की लिस्ट में नाम नहीं है, उन्हें 11 दस्तावेजों में से कोई एक देना होता है। लेकिन इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच की कोई सुविधा BLO के पास नहीं है।
2. "फर्जी सर्टिफिकेट पकड़ना हमारे बस में नहीं"
छपरा के BLO ने कहा, हम सिर्फ दस्तावेज अपलोड करते हैं, जांच हमारे पास संभव नहीं। फर्जी रिश्तेदारी और एडिट किए गए मैट्रिक सर्टिफिकेट को पकड़ने का कोई तरीका हमारे पास नहीं। जो दस्तावेज़ हमें मिल रहे हैं, उसे जमा कर ले रहे हैं। दस्तावेज़ फ़र्ज़ी है या सही है, यह जांचने का कोई विकल्प नहीं है।
3. नेपाल से बांग्लादेश तक, सबके लिए खुला दरवाज़ा?
मधुबनी के BLO का कहना था कि यदि कोई नेपाल का नागरिक 7 साल भारत में रहे, तो आठवें साल वोटर बन सकता है। इस प्रक्रिया में अगर कोई फर्जी निवास प्रमाण पत्र देता है, तो बीएलओ उसे पकड़ नहीं सकता।
4. सिस्टम में ऊपर से नीचे तक 'खुला रास्ता'
किशनगंज के वरिष्ठ पदाधिकारी से जब फर्जी दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर सवाल किया गया तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने गोल मटोल जवाब देते हुए कहा कि "बाद में जांच होगी", यानी पहले नाम जुड़ेंगे, फिर देखेंगे कि सही है या किसका नाम फ़र्ज़ी आधार (दस्तावेज़) पर जुड़ा है।
5. आयोग की मंशा बनाम ज़मीनी हकीकत
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग दावा करता है कि 1 अगस्त 2025 को प्रारूप सूची आएगी, और एक महीने में आपत्तियां ली जाएंगी। लेकिन जब खुद BLO कह रहे हैं कि उनके पास जांच की कोई व्यवस्था नहीं है, तब सवाल उठता है, क्या सिर्फ कागजी आपत्तियों से गड़बड़ी रोकी जा सकती है?
यह रिपोर्ट सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर ही रही है, साथ ही बांग्लादेशी, रोहिंग्या या नेपाल से आए नागरिक जाली दस्तावेजों के दम पर भारतीय मतदाता बनने का रास्ता भी दे रही है। चुनाव आयोग और राज्य सरकार को इस रिपोर्ट को चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए और वोटर लिस्ट को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।












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