बिहार के मज़दूर की अनोखी कारीगरी, बिना ईंटों के ही बना दिया पक्का का घर, ख़ूब हो रही सराहना

सिमेंट के बने मकान में बिना ईंट के निर्माण मुमकिन नहीं हो सकता। यह बात सभी लोग कहते हैं लेकिन ईंट के बिना पक्का मकान बनाना अब मुमकिन है।

भागलपुर, 6 जून 2022। सिमेंट के बने मकान में बिना ईंट के निर्माण मुमकिन नहीं हो सकता। यह बात सभी लोग कहते हैं लेकिन ईंट के बिना पक्का मकान बनाना अब मुमकिन है। आपको भी इस बात पर यक़ीन नहीं होगा लेकिन यह सच है। भागलपुर के रहने वाले एक मज़दूर ने अपनी अनोखी कारीगरी से इस नामुमकिन काम को मुमकिन करके दिखाया है।

मकान के चौखट बनाने में भी हुआ रेत का इस्तेमाल

मकान के चौखट बनाने में भी हुआ रेत का इस्तेमाल

भागलपुर के दिलदारपुर (घोघा) में रहने वाले गणपत शर्मा ने बिना ईंटों के इस्तेमाल से पक्का मकान बना दिया है। बिहार में शायद यह पहला मकान होगा जिसकी तामीर में ईंटों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। मकान को 18 महीने हो चुके हैं अभी मकान पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। इस मकान में ग्राउंड फ्लोर पर तीन कमरे और बरामदा बनाया गया है। मकान की दीवारें क़रीब 5 इंच मोटी है।साथ ही छत भी बन कर तैयार हो चुका है। ग़ौरतलब है कि मकान बनाने के लिए गणपत ने राजमिस्त्री और मज़दूर को की मदद नहीं ली। उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों की मदद से मकान का निर्माण किया है। इस मकान के चौखट बनाने में सीमेंट की जगह पर रेत का इस्तेमाल किया गय है।

ब्रिकलेस मकान बनाने में 35 फ़ीसदी कम लागत

ब्रिकलेस मकान बनाने में 35 फ़ीसदी कम लागत

गणपत शर्मा ने बताया कि बढ़ती महंगाई की वजह से उन्होंने बिना ईंट के ही मकान बनाने की ठानी। मकान की निर्माण प्रक्रिया अभी भी जारी है। मकान के निर्माण में ख़र्चे की बात की जाए तो मकान बनाने में जो लागत आती है उससे क़रबी 35 फ़ीसदी कम ही ख़र्चा आया है। उन्होंने कहा कि ब्रिकलेस घर बनाने की एक वजह यह भी है कि दिलदारपुर में ईंटों आसानी से नहीं मिल पाती है। इसलिए ही बिना ईंटों के ही मकान निर्माण करने का उन्होंने प्रयोग किया। गणपत शर्मा कहते हैं कि ब्रिकलेस मकान के निर्माण का तरीक़ा जो भी व्यक्ति सीखना चाहते हैं उन्हें भी जानकारी देने के लिए तैयार हैं।

ब्रिकलेस मकान को दूसरे प्रदेश से देखने आ रहे हैं लोग

ब्रिकलेस मकान को दूसरे प्रदेश से देखने आ रहे हैं लोग

दिलदारपुर दियारा में स्थित गणपत का पुराना घर 10 साल पहले नदी में डूब गया था। उन्होंने बांस के इस्तेमाल से कच्चा मकान बनाते हुए देखा था। जिसमें बिना ईंट के ही निर्माण किया गया था। इसी बात से प्रभावित होकर गणपत ने थोड़ा बदलाव करते हुए बिना ईंट के ही मकान बना डाला। गणपत का यह प्रयोग कामयाब हुआ। अब भागलपुर ही नहीं दूर-दूर से लोग उनके ब्रिकलेस मकान को देखने आ रहे हैं। दूसरे प्रदेश से आए कुछ लोगों ने गणपत के ब्रिकलेस मकान को देखा और बनाने की विधि भी जानी। बहरहाल गणपत का ब्रिकलेस मकान सुर्खियों में बना हुआ है।

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