निजी क्षेत्र में आरक्षण पर दो कद्दावर जेडीयू नेताओं ने नीतीश के खिलाफ खोला मोर्चा
पटना। बिहार की राजनीति में सत्ताधारी पार्टी जेडीयू के खिलाफ उनके अपने ही नेताओं ने बगावत की शुरुआत कर दी है। यह शुरुआत तब हुई जब नीतीश कुमार ने आउटसोर्सिंग वाले जॉब में आरक्षण की घोषणा की जिसके बाद पार्टी के दो वरिष्ठ नेता बगावत पर उतर गए और इसको लेकर बयानबाजी करने लगे। वहीं इस बयानबाजी को देखते हुए बिहार के राजनीतिक समीकरण को लेकर कई पार्टियों के क्षुब्ध और नाराज नेता एकजुट होने लगे हैं। दरअसल जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने अपनी अध्यक्षता में वंचित वर्गों की आर्थिक सामाजिक और रोजगार की वर्तमान स्थिति पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया है जिसमें पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के साथ-साथ शरद गुट के अलावा जदयू के श्याम रजक और बाकी नेता भी शामिल हो सकते हैं।

दोनों नेताओं ने बुलाई गोष्ठी
आपको बताते चलें कि इस गोष्ठी में नेताओं के द्वारा रोजगार के साथ-साथ छात्रों की छात्रवृत्ति की स्थिति और अपने संवैधानिक भविष्य के साथ आरक्षण और रोजगार समाप्ति के कारगर विषय पर बातचीत की जाएगी। वहीं इस गोष्ठी को लेकर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विभिन्न पार्टियों के बागियों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए इस प्रकार के विचार गोष्ठी का आयोजन किया है। एक तरफ जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के द्वारा किए जा रहे बयानबाजी पर जेडीयू लगातार चेतावनी दे रहा है तो दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के कहने पर भी इसमें सुधार नहीं हो रहा है। यह दोनों नेता लगातार बयानबाजी कर अपनी ही पार्टी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। दूसरी तरफ इस गोष्ठी के जरिए दलित हित को लेकर उदय नारायण चौधरी श्याम रजक के साथ-साथ अन्य बागी नेता नीतीश सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाएंगे। इससे पहले भी उदय नारायण चौधरी अपने संगठन वंचित वर्ग मोर्चा के जरिये बड़ी बातें कह चुके हैं।

नीतीश सरकार की कार्यशैली पर सवाल
इस गोष्ठी के जरिए एक बार फिर बिहार सरकार और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया जा सकता है। उदय नारायण चौधरी ने बिहार सरकार की सबसे महत्वकांक्षी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर भी कई तरह के सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जब दलित छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त स्कॉलरशिप का प्रावधान था तो उसे बंद कर ऋण की योजना क्यों आरंभ की गई। गोष्ठी में उदय नारायण चौधरी ने कुछ ऐसा ही विषय रखा है, जिस पर यशवंत सिन्हा के बोलने से भाजपा असहज हो सकती है। हलांकि इसमें कोई भी वर्तमान सरकार के मंत्री या नेता नहीं शामिल हो रहे हैं।

बिहार में निजी क्षेत्र है ही कहां?
आपको बताते चलें कि इससे पहले नीतीश कुमार के निजी क्षेत्र में आरक्षण की वकालत पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा था कि यह कोई नई मांग नहीं है। मायावती और रामविलास पासवान भी इस बारे में बोल चुके हैं अब हम लोग भी निजी क्षेत्र में आरक्षण के पक्ष में है लेकिन नीतीश कुमार और भाजपा बताये कि बिहार में निजी क्षेत्र कहां हैं, जहां आरक्षण लागू होगा। यहां कोई निवेश हुआ है या कोई कंपनी या उसका कारखाना है।












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