'बड़े भाई को निजी फैसले लेने का अधिकार', तेज प्रताप को पार्टी से बेदखल किए जाने पर बोले तेजस्वी
Lalu Yadav Expels Tej Pratap: बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उस समय बड़ा भूचाल आया जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। यही नहीं, उन्होंने तेज प्रताप से पारिवारिक संबंध भी समाप्त करने की घोषणा कर दी।
यह फैसला उस वक्त सामने आया जब तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर अनुष्का यादव के साथ अपने प्रेम संबंधों को सार्वजनिक किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी।

तेज प्रताप की पोस्ट से लालू परिवार में मची खलबली
बता दें कि तेज प्रताप यादव ने शुक्रवार, 24 मई को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अनुष्का यादव के साथ अपने रिश्ते को स्वीकारते हुए भावुक पोस्ट साझा की थी। उन्होंने खुलकर अपने प्यार का इजहार किया और कहा कि वह आत्मविश्वास से अपने फैसले ले रहे हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व और परिवार को इस बात की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के ज़रिए ही मिली, जिससे लालू प्रसाद यादव काफी नाराज़ हुए।
Tej Pratap के निष्कासन पर तेजस्वी यादव की पहली प्रतिक्रिया
तेज प्रताप यादव के भाई और आरजेडी के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं कर सकते। हम जनता के लिए समर्पित हैं और लगातार काम कर रहे हैं। अगर बात मेरे बड़े भाई की है तो मैं स्पष्ट करना चाहूँगा कि राजनीति और निजी जीवन अलग-अलग होते हैं। उन्हें उनके निजी फैसले लेने का अधिकार है। वे व्यस्क हैं और स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकते हैं।"
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि, "हमारे पार्टी प्रमुख ने जो कहा, वही अंतिम बात है। उन्होंने जो भावना जताई है, वही हमारी दिशा है। कोई भी अपने निजी जीवन में क्या करता है, इसके लिए किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं होती। मुझे भी मीडिया के जरिए ही इस फैसले की जानकारी मिली।"
Lalu Yadav Expels Tej Pratap: लालू यादव का कड़ा कदम
बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने तेज प्रताप यादव की उस पोस्ट को अनुशासनहीनता और पार्टी, परिवार मर्यादा के खिलाफ माना। उन्होंने तेज प्रताप को न केवल पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया, बल्कि सार्वजनिक रूप से यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब तेज प्रताप यादव उनके परिवार का हिस्सा नहीं हैं।
लालू ने यह भी कहा कि पार्टी और परिवार, दोनों स्थानों पर अब तेज प्रताप की कोई भूमिका नहीं रहेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस फैसले की जानकारी दे दी गई है और निर्देश दिया गया है कि वे अब तेज प्रताप से कोई राजनीतिक संबंध न रखें।
Tej Pratap Expels पर तेज प्रताप यादव की चुप्पी
तेज प्रताप यादव की तरफ से अब तक इस फैसले को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई को "अत्यधिक" और "भावनात्मक रूप से कठोर" बताया है। तेज प्रताप के नजदीकी लोगों का कहना है कि वे जल्द ही इस पर प्रतिक्रिया देंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
लालू यादव का यह फैसला बिहार चुनाव के ठीक पहले आया है जो न सामाजिक मर्यादा को दिखाता है, बल्कि यह पार्टी में अनुशासन और नीतियों के प्रति उनकी गंभीरता का संकेत भी देता है। वहीं, तेजस्वी यादव के संतुलित बयान ने यह स्पष्ट किया है कि पार्टी भावनाओं से ज्यादा संगठनात्मक अनुशासन को महत्व देती है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप यादव की आगे की रणनीति क्या होगी।












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