Tej Pratap Yadav बनाएंगे नई पार्टी तो RJD को होगा नुकसान, भाइयों की लड़ाई में NDA की होगी बल्ले-बल्ले?

Tej Pratap Yadav New Party: बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू यादव का परिवार चर्चा के केंद्र में है। महुआ दौरे से पहले तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी का झंडा उतार दिया था। इसके बाद उन्होंने संकेत दिया कि वह अपनी नई पार्टी भी बना सकते हैं। पटना से लेकर दिल्ली तक अटकलों का दौर जारी है। खबर है कि तेज प्रताप यादव अपनी नई पार्टी बनाने जा रहे हैं। इसमें उनके साथ संबंधों की वजह से चर्चा में आईं अनुष्का यादव भी बड़ी भूमिका निभाएंगी।

तेज प्रताप यादव अगर नई पार्टी बनाते हैं, तो इसका असर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर पड़ सकता है। लालू यादव के बड़े बेटे ही उनकी पार्टी और तेजस्वी की महत्वाकांक्षाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं? समझें सभी समीकरण...

Tej Pratap Yadav

Tej Pratap Yadav की वजह से होगा आरजेडी को नुकसान?

तेज प्रताप यादव पार्टी से निकाले जाने के बाद से अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके लिए तल्खी नजर आ रही है। तेजस्वी के करीबी लोगों पर भी वह हमला बोलते रहते हैं। अगर वह अपनी पार्टी बनाते हैं, तो यह देखना होगा कि कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं। सवाल संगठन और उम्मीदवारों के चुनाव पर भी है। हालांकि, इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि वह आरजेडी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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पिछले चुनाव में 40 सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर 3,000 वोट से भी कम रहा था। ऐसे में पार्टी की टूट के बाद अगर तेज प्रताप अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे, तो सीधे तौर पर वह तेजस्वी और आरजेडी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।

तेज प्रताप यादव को मिलेगी जनता की सहानुभूति?

तेज प्रताप यादव का अपना प्रभाव अब तक बिहार की राजनीति में स्पष्ट नहीं है। उन्हें स्वाभाविक तौर पर MY समीकरण का लाभ मिला था, लेकिन वह उनके पिता की वजह से ही था। पार्टी से निकाले जाने के बाद इसकी भी संभावना है कि उन्हें जनता की थोड़ी-बहुत सहानुभूति मिल सकती है। सहानुभूति में मिले इन वोट्स का असर चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इंडिया गठबंधन के वोट कटेंगे, तो सीधा फायदा एनडीए को ही हो सकता है।

तेज प्रताप यादव की बगावत और नई पार्टी खड़ी करना कांग्रेस और महागठबंधन के दूसरे छोटे दलों के लिए भी बड़ी समस्या बना सकता है। बिहार में कई सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबला बहुत बराबरी का रहेगा और यहां वोटकटुआ पार्टी खुद भले न जीतें, लेकिन दूसरे का गेम बिगाड़ सकती हैं। ऐसे में कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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