बिहार विधानसभा में तेजप्रताप की गैरहाजिरी ने बढ़ाई हलचल: RJD से निकालने के बाद तेजस्वी से होना था आमना-सामना
Tej Pratap Yadav (Bihar Chunav 2025): बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सबकी निगाहें एक चेहरे को ढूंढ रही थीं -हसनपुर से विधायक तेजप्रताप यादव। नेता हों या पत्रकार, सभी इसी इंतजार में थे कि तेजप्रताप आएंगे या नहीं? अगर आएंगे तो कहां बैठेंगे? क्या वो तेजस्वी यादव के पास बैठेंगे? पर सारी अटकलों को विराम देते हुए तेजप्रताप सोमवार 21 जुलाई को सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए।
तेजप्रताप की अनुपस्थिति ने सिर्फ मीडिया को ही नहीं, बल्कि राजद (RJD) के विधायकों को भी असहज कर दिया। जब पत्रकारों ने बार-बार फोन करके यही सवाल किया कि क्या तेजप्रताप सदन में आएंगे, तो अधिकतर विधायकों ने एक ही जवाब दिया -"वो पार्टी से निष्कासित हैं, आना तो नहीं चाहिए, अब देखते हैं क्या होता है।"

लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक विधानसभा अध्यक्ष को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। पार्टी से निकाले जाने के बाद कहा जा रहा था कि पहली बार तेजस्वी और तेजप्रताप सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने हो सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर सवाल
तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच की दूरी अब संसदीय व्यवस्था में भी नजर आने लगी है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर तेजप्रताप सदन में आते हैं तो क्या वे तेजस्वी के साथ बैठेंगे? चूंकि उनका निष्कासन औपचारिक रूप से विधानसभा अध्यक्ष को नहीं बताया गया है, सीटिंग अरेंजमेंट में कोई बदलाव संभव नहीं है। यानी वे चाहें तो तेजस्वी यादव के बगल में बैठ सकते हैं। तेजस्वी यादव का 283 नंबर सीट है। ठीक उनके बगल वाली 284 नंबर सीट तेजप्रताप यादव की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 25 जुलाई तक चलने वाले इस मानसून सत्र के दौरान दोनों भाई एक ही फ्रेम में दिखेंगे या नहीं।
अनुष्का विवाद बना वजह
तेजप्रताप यादव की राजनीतिक राह तब कठिन हुई जब अनुष्का यादव वाला मामला मीडिया में छाया। फोटो और पोस्ट वायरल होने के बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया। तभी से तेजस्वी और तेजप्रताप की दूरी खुलकर सामने आई है।
शुरुआत में तेजप्रताप ने दावा किया था कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था, लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि फोटो उन्होंने खुद ही पोस्ट की थी। सूत्रों के अनुसार, तेजप्रताप हाल ही में अनुष्का के घर भी कई घंटे तक रहे, जहां उनकी और उनके परिवार के साथ लंबी बातचीत हुई। ऐसी भी चर्चा है कि अनुष्का उनके नए राजनीतिक संगठन में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं, खासतौर पर युवाओं और ग्रामीण वोटर्स से जुड़ने के लिए।
हालांकि तेजप्रताप अब भी खुद को तेजस्वी के "कृष्ण" के रूप में पेश करते हैं और बार-बार कहते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाना उनका लक्ष्य है। लेकिन व्यवहारिक राजनीति में यह "कृष्ण-अर्जुन" की जोड़ी अभी तक सदन में साथ दिखाई नहीं दी है।
अब देखना यह है कि तेजप्रताप मानसून सत्र के शेष दिनों में विधानसभा में आते हैं या नहीं, और अगर आते हैं तो क्या तेजस्वी के पास बैठते हैं -या राजनीतिक दूरियां वैसी ही बनी रहती हैं जैसी इन दिनों देखी जा रही हैं।
तेजप्रताप यादव ने लॉन्च किया नया फेसबुक पेज, RJD का नाम और चुनाव चिन्ह गायब
इसी बीच बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ उस समय आया जब तेजप्रताप यादव ने 'टीम तेजप्रताप' नाम से नया फेसबुक पेज लॉन्च किया, जिसमें ना तो राजद (RJD) का नाम है और ना ही पार्टी का चुनाव चिन्ह। इस कदम को उनके नई राजनीतिक रणनीति या नए रास्ते की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
तेजप्रताप के नए फेसबुक पेज पर एक नया नारा भी दिख रहा है, "जिसका कायम है प्रताप, वही है आपका अपना तेजप्रताप।" तेजप्रताप ने ऐलान किया है कि अब उनकी सभी गतिविधियों की जानकारी इसी पेज से दी जाएगी।
क्या RJD से पूरी तरह अलग होंगे तेजप्रताप?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजप्रताप अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने महुआ विधानसभा क्षेत्र का दौरा भी किया, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि वे अगला चुनाव महुआ या हसनपुर में से किसी एक सीट से लड़ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
परिवार और पार्टी से दूरी
तेजप्रताप पहले भी कई बार अपने बयानों और बर्ताव के कारण चर्चा में रहे हैं। 2018 में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती ऐश्वर्या राय से शादी की थी, लेकिन कुछ महीनों के अंदर ही तलाक की अर्जी देकर मामला विवादों में आ गया।
अनुष्का से जुड़ी हालिया गतिविधियों के बाद, यह माना जा रहा है कि लालू यादव ने भी उनसे पूरी तरह दूरी बना ली है। तेजप्रताप खुद कह चुके हैं कि कुछ लोग उन्हें और तेजस्वी यादव के बीच दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले तेजप्रताप का ये कदम राजनीति में नया रंग भर रहा है। क्या तेजप्रताप नई पार्टी बनाएंगे? क्या अनुष्का उनके साथ राजनीतिक मंच पर दिखेंगी? और सबसे अहम -क्या यह सब RJD को नुकसान पहुंचाएगा?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि तेजप्रताप यादव की हर हलचल अब चुनावी नजरों में है -और बिहार की सियासत को और ज्यादा दिलचस्प बना रही है।












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