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Success Story: Cricket Bat बनाने वाला मज़दूर अबुलेस बना फैक्ट्री का मालिक, इस तरह आया था Idea

कोरोना काल ने कई लोगों के रोजगार छीन लिए तो वही कई लोगों के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा कर दिए। कुछ इसी तरह की कहानी है बिहार के मज़दूर अबुलेस की जो कभी बैट के कारीगर थे, अब फ़ैक्ट्री के मालिक हैं।

Success Story Of Labour Abules Cricket Bat Factory In West Champaran Bihar


Success Story: कोरोना काल में कई लोगों की नौकरी चली गई, काफी नुकसान भी हुआ। वहीं कोरोना काल में हुए लॉकडॉउन के दौरान घर पर बैठे लोगों के लिए अवसर भी दे गया। लॉकडॉउन में किसी ने यूट्यूब को कमाई का ज़रिया बनाया तो किसी ने अनोखा प्रयोग कर रोज़गार के अवसर पैदा किये। आज हम आपको बिहार के एक ऐसे मज़दूर की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जो कभी क्रिकेट बैट बनाने वाले कारीगर थे। कश्मीर में वह पिछले पांच साल से क्रिकेट बैट बनाने का काम करते थे। कोरोना काल के दौरान बिहार वापस आए और लॉकडॉउन लगने की वजह से यही फंस गये। लॉकडॉउन में फंसने के बाद टाइम पास करने के लिए उन्होंनो दोस्तों के लिए क्रिकेट बैट बनाया। बैट उन लोगों को काफी पसंद आये। इसके बाद और लोग भी उनके पास बैट खरीदने पहुंचने लगे।

कश्मीर में कर रहे थे 5 सालों से काम

कश्मीर में कर रहे थे 5 सालों से काम

कोरोना काल के दौरान अबुलेस अंसारी (बैट कारीगर) और उनके दौस्तों द्वारा बैट बनाने की खबर सुर्खियों में छाई हुई थी। वहीं अब पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने भी इन लोगों की मदद के लिए कदम बढाया है। अबुलेस अंसारी ने फैक्ट्री संचालित करने के लिए GST नंबर भी ले लिया है। इनके संघर्ष भरी कहानी की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में बैट बनाने की फैक्ट्री से होती है। वह पिछले पांच सालों से वहां की फैक्ट्री में बैट बनाने का काम करते हैं। कोरोना के समय वह कश्मीर से फरवरी महीने में घर लौटे थे, मार्च में वापस जाना था, लेकिन लॉकडाउन लगने की वजह से वह पश्चिमी चंपारण में अपने घर पर ही फंस गए।

लोगों को खूब पसंद आ रहा क्रिकेट बैट

लोगों को खूब पसंद आ रहा क्रिकेट बैट

लॉकडाउन के दौरान गांव में दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते थे, इसी क्रम में साथियो के कहने पर उन्होंने बैट बनाया। अबुलेस ने गांव में ही एक सूखे पेड की लकड़ी से दोस्तों को मुफ्त में बैट बनाकर दिए। जो कि उन लोगो को काफी पंसद आया। अबुलेस द्वारा बनाये गए क्रिकेट बैट की खूब तारीफ हुई। वहीं क्रिकेट प्रेमियो तक बात पहुंची तो अबुलेस के पास खरीदार भी पहुंचने लगे। इस तरह से अबुलेस के पास बैट बनाने के ऑर्डर आने लगे, अपने साथियों की मदद ,से अबुलेस ने बैट बनाकर देना शुरू किया। वहीं जिलाधिकारी कुंदन कुमार की तरफ से मिले मदद की आश्वासन के बाद इन लोगों ने अपनी फैक्ट्री बनाने की तैयारी शुरू कर दी।

10 दोस्तों ने मिलकर खोली फैक्ट्री

10 दोस्तों ने मिलकर खोली फैक्ट्री

अबुलेस ने बैट बनाना शुरू किया तो लोकल मार्केट के लोग उनके पास पहुंचे और कहा कि जो भी बैट का प्रोडक्शन कर रहे हैं, वह उन लोगों को बेचें। अबुलेस द्वारा डायरेक्ट बैट बेचने की वजह से लोकल दुकानदारों को नुकसान होगा। इसलिए लोकल मार्केट के दुकानदार ने अबुलेस के बनाए बैट को खरीद कर रिटेल करने की बात कही। अबुलेस ने बताया कि मीडिया में खबर छपने के बाद मदद के लिए काफी लोग आगे आए। जिला के डीएम कुंदन कुमार भी उन लोगों की हर मुमकिन मदद कर रहे हैं, सभी दस साथियों ने पार्टनरशिप एग्रीमेंट बना लिया है। कंपनी का नाम तय करने के साथ ही बैनर, स्टैम्प बनवा लिया गया है और कंपनी को जीएसटी नंबर आ चुका है।

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