Success Story: भारतीय फुटबॉलर सुब्रत पॉल का बिहार से है ख़ास ताल्लुक,'स्पाइडर मैन' के बारे में जानिए कुछ ख़ास
Success Story Of Subrata Paul: सुब्रत पॉल किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और गोलकीपर सुब्रत पॉल ने बिहार में खेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि अब बिहार के खेलों में बहुत बदलाव हुआ है, प्रदेश के खिलाड़ी भी अब खेल जगत में अपना भविष्य तलाश सकते हैं।
सुब्रत पॉल ने कहा कि बिहार के युवा खेल में अगर अपना भविष्य तलाथ रहे हैं तो, वह जिस भी खेल को खेलना चाहते हैं, उसमें डेडिकेशन का साथ लगें। वहीं उन्होंन कहा कि बच्चों के पैरेंट्स को चाहिए कि वह अपने बच्चों के कैरियर को लेकर लिए फैसले में समर्थन करें।
सुब्रत पॉल को लोग भले ही बंगाल का रहने वाला समझते हैं, लेकिन उनकी परवरिश और पढ़ाई बिहार से हुई है। उनका जन्म जमशेदपुर में हुआ था, उस वक्त बिहार-झारखंड अलग नहीं थे। इसलिए सुब्रत पॉल खुद को प्राउड बिहारी बताते हैं। सुब्रत पॉल ने बताया कि उन्होंने बिहार के जमशेदपुर से ही खेल की शुरुआत की है। इसलिए वह बिहार को अपना पहला घर मानते हैं।
बिहार से ताल्लुक रखने वाले सुब्रत पॉल को इंडियन फुटबॉल टीम में स्पाइडर मैन की संज्ञा दी जाती है। उनका नाम स्पाइडर मैन कैसे पड़ा यह बहुत ही कम लोग जानते हैं। दरअसल साल 2011 में एशिया कप में सुब्रत पॉल ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया था।

सुब्रत पॉल का परफॉर्मेंस देखने के बाद कोरियन और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने ही उन्हें स्पाइडर-मैन का खिताब दिया था। इसके बाद से वह स्पाइडर मैन के नाम से मशहूर हुए। आपको बता दें कि टाटा फुटबॉल अकादमी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने बाद, सुब्रत पॉल ने मोहन बागान में 2004 से अपने खेल के करियर की शुरुआत की। साल 2007 में उन्हें आई-लीग के सबसे बेहतरीन गोलकीपर के तौर पर गया था।
ईस्ट बंगाल के फेडरेशन कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे सुब्रत पॉल को साल 2014 में एफसी वेस्टलैंड में शामिल किया गया। वह पहल भारतीय थे, जिन्हे हाइलेवल यूरोपीय फुटबॉल क्लब के लिए खेलने का मौका मिला था। 2016 में उन्हें अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा गया था।












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