Success Story: फ्रीलांस काम करने से आया Idea, हज़ारों लोगों को रोज़गार दे रहा 23 साल का युवक
Success Story: नवोदय से 12वी तक तालीम हासिल करने के बाद अंकित ने नोएडा (दिल्ली, एनसीआर) का रूख किया। आईएमएस नोएडा से उन्होंने स्नातक की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने की ख्वाहिश हुई। उन्होंने फ़ैसला
Success Story: आज के ज़माने में बरोज़गारी चरम पर है, हर युवा की बस यही चाहत है कि रोज़गार मिले। वहीं छात्रों की ख्वाहिश होती है कि अच्छे से पढ़ाई करें और हैंडसम सैलरी पर जॉब करें। इन दो तरह के युवाओं के बीच में कुछ ऐसे भी होनहार लाल होते हैं जो भीड़ से अलग हटकर अपनी एक अलग पहचान तो बनाते ही हैं। इसके साथ बेरोज़गारी के इस दौर में युवाओं को मनपंसद रोज़गार भी देते हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको बिहार के लाल अंकित देव अर्पण की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं। जिन्होंने ना सिर्फ रिस्क लिया बल्कि अब हज़ारों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

अंकित देव अर्पण बने युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
बिहार के चंपारण ज़िले के रहने वाले 23 वर्षीय अंकित देव अर्पण अब युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। अंकित का जन्म 13 सितंबर 1999 को हुआ था। बेटे के बचपन के बाद से ही उसकी अच्छी शिक्षा के लिए पिता संजीव दुबे और माता विमल देवी ने व्यवस्था बनानी शुरू कर दी थी। अंकित की कक्षा पांच तक की पढ़ाई लोकल स्कूलों में हुई। इसके बाद अंकित का सेलेक्शन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ। अंकित ने वहां से 10वीं जवाहर नवोदय विद्यालय ( वृंदावन) से पढ़ाई की । इसके बाद वह जवाहर नवोदय विद्यालय ( समस्तीपुर) पहुंचे और वहां से 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई के दौरान ही लिया आत्मनिर्भर बनने का फैसला
नवोदय से 12वी तक तालीम हासिल करने के बाद अंकित ने नोएडा (दिल्ली, एनसीआर) का रूख किया। आईएमएस नोएडा से उन्होंने स्नातक की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने की ख्वाहिश हुई। उन्होंने फ़ैसला लिया कि वह अपना खर्च खुदा उठाएंगे। वह पढ़ने लिखने में तेज़ तर्रार थे,इसलिए उन्होंने फ्रीलांस लेखनी करने का ज़ेहन बनाया। फ्रीलांसर के तौर पर उन्होंने काम भी किया। लेकिन मेहनत के मुताबिक उनका तजुर्बा अच्छा नहीं रहा। उन्होंने काम तो किया लेकिन उसके अच्छे पैसे नहीं मिले तो कहीं धोखाधड़ी भी हुई।

फ्रीलांसर्स की परेशानियों का निकाला हल
फ्रीलांसर के तौर पर काम करते हुए हुई परेशानी के पीछे की अंकित ने वजह तलाशनी शुरू की। उन्होंने पाया कि कई और लोग हैं जो इस तरह से फ्रीलांस के नाम पर धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। इन परेशानियों को देखते हुए अंकित ने फ़ैसला लिया की वह देश भर में उनकी तरह फ्रीलांस वर्क करने वाले युवाओं के मसले का हल निकालेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी फ्रेंड सानिया से रायशुमारी की। दोस्त का साथ मिलने के बाद उन्होंने 21 साल की उम्र में 'दि राइटर्स कम्युनिटी' नाम की अपनी कंपनी ही खोल दी।

युवाओं के लिए मुफ्त में प्रशिक्षण
देश में कोरोना महामारी के दौरान जब लोग बेरोज़गार हो रहे थे। इस दौरान अंकित और उनकी दोस्त शान्या कंपनी से फ्रीलांसर लोगों जोड़ने का काम कर रहे थे। मुश्किलें तो काफी आई लेकिन दोनों की मेहनत रंग लाई और फ्रीलांसर उनके साथ जुड़ने लगे। अंकित की मानें तो आज 'द राइटर्स कम्युनिटी' फ्रीलांसरों के लिए फ्री ट्रेनिंग और लेखन से जुड़ी व्यवस्था मुहैय्या करा रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े कई संस्थान और कपंनियां 'द राइटर्स कम्युनिटी' के ज़रिए फ्रीलांसर्स को सेवाएं देते हुए रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं।

'सिल्वर ग्लोबी अवार्ड' से भी नवाज़े जा चुके हैं अंकित
'द राइटर्स कम्युनिटी' के ज़रिए अभी तक हज़ारों फ्रीलांसर्स को काम मिला है और उनके काम करने का तजुर्बा भी अच्छा रहा है। इस कम्युनिटी के ज़रिए स्क्रिप्ट राइटिंग और एडिटिंग, वीडियो एडिटिंग जैसा काम करने वाले फ्रीलांसर्स को कई काम मिल रहे हैं। इसके साथ ही छात्रों को ट्रेनिंग भी दी जाती है। वहीं कई कॉलेज के छात्र यहां से इंटर्नशिप भी कर रहे हैं। आपको बता दें कि अंकित को 'ग्लोबी अवार्ड्स' के तहत घर बैठे काम करने की व्यवस्था शानदार प्लैटफॉर्म के लिए 'सिल्वर ग्लोबी अवार्ड' से नवाज़ा जा चुका है।
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