भारत-नेपाल सीमा पर तस्करों का आतंक, सशस्त्र बलों पर हमला, 4 जवान घायल, क्या है मामला?
Smuggling conflict India-Nepal border: भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी अब सिर्फ व्यापारिक समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। मोतिहारी के अगरवा और रेगानिया गांव के सीमावर्ती इलाके में शुक्रवार देर रात ऐसा ही एक तनावपूर्ण दृश्य सामने आया, जब यूरिया खाद की तस्करी रोकने गई SSB टीम पर सैकड़ों तस्करों ने अचानक ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया।
हालात इतने बिगड़े कि जवानों को आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इस झड़प में चार SSB जवान घायल हो गए और 16 बोरी यूरिया खाद जब्त की गई। साथ ही SSB ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

क्या है मामला?
बिहार के मोतिहारी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अगरवा और रेगानिया गांव के बीच शुक्रवार देर रात एक हिंसक झड़प हुई। यह झड़प खाद तस्करों और SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों के बीच हुई, जब जवानों ने यूरिया की तस्करी रोकने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि लगभग 300 तस्करों ने मिलकर 10-15 SSB जवानों पर अचानक ईंट और पत्थरों से हमला कर दिया। हालात बेकाबू होते देख जवानों ने आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की। इस हमले में चार SSB जवान घायल हो गए हैं, जिनका इलाज स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया।घटना के दौरान SSB ने 16 बोरी यूरिया और चार साइकिलें जब्त कीं। हालांकि, तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर नेपाल सीमा की ओर फरार हो गए। SSB कमांडेंट प्रफुल कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया खाद की तस्करी हर दिन खुलेआम हो रही है, और इसमें स्थानीय खाद दुकानदारों की मिलीभगत भी हो सकती है। ग्रामीणों के अनुसार, रेगानिया गांव में 9 लाइसेंसी खाद दुकानों के जरिए अक्सर बड़ी मात्रा में यूरिया नेपाल भेजी जाती है। ये दुकानें सिर्फ कागज़ पर किसानों को खाद बेचती हैं, जबकि असल में तस्करी के लिए आपूर्ति करती हैं।
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स्थानीयों लोगों ने सरकार से की मांग
लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की नाक के नीचे यह काला धंधा वर्षों से चल रहा है, लेकिन कभी सख्त कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों का ये भी कहना है कि जब SSB जैसी केंद्रीय बल कार्रवाई करती है, तो उन्हें भी तस्करों के हमलों का सामना करना पड़ता है, जबकि स्थानीय पुलिस अक्सर मूकदर्शक बनी रहती है। स्थानीयों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि खाद की दुकानों की जांच हो, लाइसेंस रद्द किए जाएं, और सीमा पर तस्करी के खिलाफ स्थायी समाधान निकाला जाए।
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