Shashi Tharoor Bihar Visit: बिहार की तारीफ करना शशि थरूर को पड़ा भारी, अब क्यों दे रहे हैं सफाई?
Shashi Tharoor Bihar Visit: बिहार के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा के बाद कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर की तारीफों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल और पटना के 'बापू टावर' व 'बिहार संग्रहालय' के भ्रमण के बाद थरूर ने वहां की सुविधाओं और सड़कों की जमकर सराहना की।
हालांकि, भाजपा नेतृत्व वाली NDA सरकार के कार्यकाल में हुए विकास की इस 'अपरोक्ष' प्रशंसा को विपक्षी खेमे में असहजता से देखा जाने लगा। जैसे ही मीडिया और सोशल मीडिया पर इसे राजनीतिक रंग दिया गया, थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां केवल कला, संस्कृति और बुनियादी ढांचे तक सीमित थीं, न कि राजनीति तक।

विकास की तारीफ और छिड़ा सियासी संग्राम
विवाद की जड़ थरूर का वह बयान बना जिसमें उन्होंने कहा कि, 'पहले सुना था अच्छा नहीं था, पर अब रास्ते और सुविधाएं बहुत बेहतर हैं।' चूंकि बिहार में इस समय NDA की सरकार है, इसलिए इस बयान को नीतीश कुमार और भाजपा के सुशासन की तारीफ के रूप में देखा गया। कांग्रेस के भीतर भी इस पर सुगबुगाहट शुरू हो गई कि एक वरिष्ठ नेता विपक्षी खेमे के काम की सराहना कैसे कर सकते हैं, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
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मीडिया ट्रायल के बीच थरूर ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख थरूर ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने न तो किसी राजनेता का नाम लिया और न ही भाजपा का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि मीडिया हर सामान्य टिप्पणी को राजनीतिक रंग क्यों देता है? थरूर के अनुसार, बुनियादी ढांचे और संग्रहालयों की प्रशंसा करना एक लेखक और पर्यटक का अनुभव था, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने इसे केवल सुविधाओं के प्रति एक ईमानदार प्रतिक्रिया बताया।
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बिहार की कला और संस्कृति के मुरीद हुए थरूर
डॉ. शशि थरूर ने बिहार संग्रहालय (Shashi Tharoor Bihar Museum) और बापू टावर (Shashi Tharoor Bapu Tower Patna) को विश्व स्तरीय बताते हुए इसे देश के बेहतरीन संग्रहालयों में से एक करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि ढाई घंटे का समय इन ऐतिहासिक धरोहरों को समझने के लिए नाकाफी है। उनकी आई विल बी बैक अगेन वाली टिप्पणी बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक उत्थान के प्रति उनके आकर्षण को दर्शाती है। थरूर ने न केवल धरोहरों की भव्यता की प्रशंसा की, बल्कि इसे हर भारतीय के लिए 'मस्ट विजिट' गंतव्य बताया।
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अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं थरूर
शशि थरूर अक्सर अपनी बेबाक और निष्पक्ष राय के लिए जाने जाते हैं, जो कभी-कभी उनकी अपनी पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर देती है। इस मामले में भी, बिहार की प्रगति को स्वीकार करना उनके बौद्धिक दृष्टिकोण का हिस्सा था, लेकिन चुनावी राजनीति के दौर में इसे सरकार की जीत के रूप में पेश किया जाने लगा। अब उनकी सफाई का उद्देश्य अपनी छवि को पार्टी की विचारधारा के साथ फिर से संरेखित करना और बेवजह की बयानबाजी को रोकना है।












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