VIDEO : सरकारी नौकरी लग चुकीं 7 बहनों ने 42 ​साल बाद फिर करवाई माता-पिता की 'शादी', जानिए वजह

सारण, 9 मई। बिहार के सारण जिले में अनूठी शादी हुई है। यहां के गांव एकमा में आटा चक्की संचालक 62 वर्षीय रामकुमार सिंह दूल्हा बनकर अपनी सफेद मूछों पर ताव देते हुए दुल्हनिया लाने निकले तो लोग देखते रह गए।

दूल्हे रामकुमार सिंह को मिली बुलेट बाइक

दूल्हे रामकुमार सिंह को मिली बुलेट बाइक

दरअसल, 42 साल बाद रामकुमार सिंह की दुबारा शादी ( ढोंगा ) हुआ है, जिसे उनकी सात बेटियों व एक बेटे ने करवाया है। पूरे बिहार में इस शादी की चर्चा हो रही है। इसमें दूल्हे को तोहफे में बुलेट बाइक मिली है।

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     बारात एकमा से आमधारी गांव गई

    बारात एकमा से आमधारी गांव गई

    वन इंडिया हिंदी से बातचीत में रामकुमार सिंह के बेटे राजीव सिंह ने बताया कि उनके पिता की बारात गांव एकमा से दस किलोमीटर दूर स्थित गांव आमधारी में गई है। यहां पर राजीव का ननिहाल है। यानी रामकुमार सिंह का ससुराल।

    दुल्हन दस दिन पहले आई मायके

    दुल्हन दस दिन पहले आई मायके

    बता दें कि 5 मई 1980 को रामकुमार सिंह की शादी आमधारी की शारदा देवी से हुई थी। अब 5 मई 2022 को फिर से दोनों की शादी हुई। शारदा दस दिन पहले ही अपने मायके आमधारी चली गई थीं। फिर 5 मई को उनकी शादी की सालगिरह वाले दिन रामकुमार सिंह बारात लेकर पहुंचे।

    बारात में 600 लोग गए

    बारात में 600 लोग गए

    रामकुमार की शादी के 42 साल बाद वाली बारात में 600 लोग शामिल हुए। हाथी, घोड़ा व ऊंट व 30 स्कार्पियो गाड़ी भी थी। दूल्हे बने रामकुमार की के साथ बिंदायक के रूप में दोहिता सूरज था, जो उनकी बड़ी बेटी रानी कुमारी का बेटा है।

    सिंदूर के अलावा शादी में सारी रस्में

    सिंदूर के अलावा शादी में सारी रस्में

    रामकुमार की बारात आमधारी में शारदा के घर पहुंची। यहां पर बारातियों की खूब आवाभगत हुई। सिंदूर के अलावा शादी में सारी रस्में हुईं। दूल्हा-दुल्हन को तोहफे भी खूब मिले। डायमंड रिंग व डायमंड नेकलेस समेत कई आभूषण व कपड़े दिए गए। इसके बाद दुल्हन शारदा की विदाई हुई।

    क्या है ढोंगा परम्परा?

    क्या है ढोंगा परम्परा?

    दरअसल, बिहार में यह परम्परा वर्षों से चली आ रही है। इसे ढोंगा कहा जाता है। इसमें होता यह है कि शादी के दो-तीन साल बाद ही व्यक्ति दूल्हा बनकर बारात लेकर ससुराल जाता है और पत्नी से दुबारा शादी करके उसे घर लाता है। इस रस्म को स्थानीय भाषा में ढोंगा कहते हैं।

    5 मई 1980 को रामकुमार व शारदा की शादी

    5 मई 1980 को रामकुमार व शारदा की शादी

    बता दें कि 5 मई 1980 को रामकुमार व शारदा की शादी हुई थी। इस दिन के बाद पारिवारिक कारणों से रामकुमार दुबारा अपने ससुराल नहीं गए। इस बीच इनके सात बेटी व एक बेटा हुआ। सात बेटियों में से चार बेटियां बिहार पुलिस में कांस्टेबल, तीन बहनें बिहार आबकारी, सीआरपीएफ व एसएसबी में है। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है।

    Bihar seven sisters news

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