Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Raghopur Election 2025: तेजस्वी यादव को उनके ही गढ़ में कौन दे रहा चुनौती! राघोपुर का समीकरण इस बार चौंकाएगा

Raghopur Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण 6 नवंबर को राघोपुर सीट पर वोटिंग है। यह वही सीट है, जिसने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव जैसे तीन 'मुख्यमंत्रियों' को जन्म दिया। लेकिन इस बार हालात पहले जैसे नहीं हैं। तेजस्वी यादव को अपने ही गढ़ में जबरदस्त चुनौती मिल रही है और मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है।

तेजस्वी बनाम सतीश - गढ़ में पहली बार दिख रही टक्कर

राघोपुर सीट से इस बार भी राजद नेता तेजस्वी यादव मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी के सतीश कुमार यादव हैं, जिन्होंने 2010 में राबड़ी देवी को हराकर इस सीट पर इतिहास रचा था। तेजस्वी 2020 में सतीश को 38,000 से अधिक वोटों से हरा चुके हैं, लेकिन इस बार चुनावी हवा पहले जैसी नहीं दिख रही।

Raghopur Election 2025

सतीश कुमार यादव ने "विकास बनाम जंगलराज" का नारा देते हुए प्रचार शुरू कर दिया है। वहीं एनडीए के नेता नित्यानंद राय यादव मतदाताओं में सेंधमारी के लिए खुद मैदान में उतर चुके हैं।

तेजप्रताप की एंट्री से बिगड़ा समीकरण

तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप यादव की एंट्री ने राघोपुर का माहौल और गर्मा दिया है। हाल ही में तेजप्रताप ने राघोपुर में अपनी रैली में भीड़ जुटाकर सबको चौंका दिया। इससे पहले तेजस्वी ने महुआ में उनके खिलाफ प्रचार किया था। अब दोनों भाइयों के रिश्तों की खटास राजद कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा कर रही है।

राबड़ी देवी ने भी कुछ दिन पहले क्षेत्र का दौरा किया था, लेकिन ग्रामीणों ने बाढ़, कटाव और सड़कों की खराब स्थिति पर उनसे सवाल पूछ लिए। इससे स्पष्ट है कि जनता अब विकास के मुद्दे पर खुलकर बोल रही है।

जन सुराज का कौन है उम्मीदवार?

इस बार जन सुराज पार्टी से चंचल कुमार भी मैदान में हैं, जो स्थानीय मतदाताओं के असंतोष को भुनाने की कोशिश में हैं। युवाओं का एक वर्ग बेरोजगारी और शिक्षा की कमी को लेकर नाराज है। यहां अब भी कोई बड़ा सरकारी कॉलेज नहीं है और बाढ़ की समस्या हर साल तबाही मचाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा पर पुल बनने के बाद जरूर इलाके की पहुंच आसान हुई, लेकिन बाकी विकास कार्य ठप हैं।

Raghopur Assembly Election 2025: 63 वर्षों से यदुवंशियों का दबदबा

राघोपुर की राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां बीते 63 सालों से यादव समाज का दबदबा कायम है। 1995 में लालू प्रसाद यादव ने यहां से चुनाव जीतकर इसे राष्ट्रीय सुर्खियों में लाया। बाद में राबड़ी देवी और फिर तेजस्वी यादव ने इसी सीट को अपने राजनीतिक सफर की पहचान बनाया। लेकिन इस परंपरा के बावजूद राघोपुर आज भी बिहार के पिछड़े इलाकों में गिना जाता है। साक्षरता दर कम है, रोजगार के अवसर नहीं हैं और बाढ़ से हर साल हजारों परिवार प्रभावित होते हैं।

क्यों कहा जा रहा है तेजस्वी यादव की "अमेठी जैसी हार" संभव

राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर ने पहले ही दावा किया है कि तेजस्वी यादव को राघोपुर में "अमेठी जैसी हार" मिल सकती है। यादव मतदाताओं की संख्या यहां सबसे ज्यादा है, लेकिन भाजपा इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। अनुसूचित जाति और सवर्ण मतदाता भी इस बार निर्णायक भूमिका में हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और जदयू के कई नेता लगातार प्रचार कर रहे हैं। वहीं तेजस्वी के पक्ष में अब तक वैसी लहर नहीं दिखी जैसी 2020 में थी।

राघोपुर -जहां विकास का वादा अब भी अधूरा

पटना से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद राघोपुर अब भी विकास की मुख्यधारा से कटा है। पुल बनने के बाद सफर आसान जरूर हुआ, लेकिन रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट जस का तस है। मतदाताओं के बीच अब सवाल यह नहीं है कि "कौन मुख्यमंत्री बनेगा", बल्कि यह है कि "कब विकास पहुंचेगा"।

राघोपुर में इस बार का मुकाबला सिर्फ तेजस्वी बनाम सतीश नहीं, बल्कि परिवारवाद बनाम विकास का है। लालू-राबड़ी की परंपरा पर टिके इस गढ़ में क्या तेजस्वी तीसरी बार जीत दर्ज कर पाएंगे, या 2010 की तरह इतिहास दोहराया जाएगा-यह 6 नवंबर की वोटिंग तय करेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+