Green Rice Farming: बिहार में भी हो रही हरे चावल की खेती, 500 रुपए किलो बिकता है 'औषधीय चावल'
Green Rice Farming News: बिहार में अब हरे चावल की खेती भी की जा री है। पूर्वी चंपारण ज़िले के सागर चुरामन गांव के रहने वाले किसान प्रयाग देव सिंह पिछले तीन सालों से विभिन्न प्रदेशों में उपजाए जाने वाले चावल की किस्मों को अपने जिला उगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने 'हरे चावल' (Green Rice) की खेती का नया प्रयोग किया है।
प्रयाग देव सिंह (किसान) ने बताया कि हरा चावल भी बासमती की तरह ही खुशबूदार और खाने में लज़ीज़ होता है। उन्होंने कहा कि ग्रीन राइस का छत्तीसगढ़ का इजाद है, 3 साल पहले यूट्यूब के ज़रिए हरे चावल की जानकारी मिली थी। इसके बाद रायपुर (छत्तीसगढ़) में रह रहे एक रिश्तेदार से हरे चावल का 100 ग्राम धान (बीज) मंगाया था।

100 ग्राम धान से कुछ बीज तो पानी में ही बह गए, बचे हुए धान को 5 कट्ठा के खेत में लगा के किसानी में नया प्रयोग किया। हरे चावल की खेती के प्रयोग में कामयाबी हासिल हुई। चावल की एक अद्भुत वैरायटी ग्रीन राइस की खेती पानी लगने वाली निचली खेत में ज़्यादा अच्छे से होती है। करीब 6 महीने हरे चावल की फसल तैयार हो जाती है।
किसान प्रयाग देव सिंह ने कहा कि ग्रीन चावल के कई औषधीय गुण हैं, दिल और चीनी के मरीज़ों के लिए यह रामबाण का काम करता है। ग्रीन राइस सिर्फ चावल ही नहीं है, बल्कि एक औषधि है, यही वजह है कि बाज़ारों में इस चावल की कीमत ज्यादा है। पांच सौ रुपये प्रति किलो के हिसाब हरा चावल बाज़ारों में बिक रहा है। उन्होंने कहा कि इस चावल का स्वाद लेने के बाद आप बिना तारीफ़ किए नहीं रह सकते हैं।












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