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बिहार: सुर्खियों में छाये अररिया के युवक सरफराज आलम, इस वजह से ग्रामीण कर रहे तारीफ

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार में शिक्षा स्तर लगातार गिर रहा है। वहीं कुछ लोग अपने स्तर से शिक्षा बेहतर करने के लिए योगदान दे रहे हैं।

पूर्णिया, 8 अगस्त 20222: सात समुंदर पार रह रहे सरफराज आलम अपने क्षेत्र के युवाओं में सुर्ख़ियों में हैं। मूलरूप से बिहार के अररिया ज़िले के रहने वाले सरफराज पूर्णिया में अकसर सामाजिक कार्य करते रहते हैं। हाल ही में सरफराज आलम ने बच्चों की बेहतर तालीम के लिए स्कूल में ब्लैक बोर्ड दिया। वहीं विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था भी करवा रहे हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। सरफराज आलम ने जो पहल की है वह काफ़ी सराहनीय है। बिहार में शिक्षा व्यवस्था बद से बदतर हो चुकी है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से लेकर मिड डे मील तक की गुणवत्ता पर आए दिन सवाल खड़े होते रहे हैं।

'टीन से बने स्कूल को एसी क्लास में बदलने की कोशिश'

'टीन से बने स्कूल को एसी क्लास में बदलने की कोशिश'

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार में शिक्षा स्तर लगातार गिर रहा है। वहीं कुछ लोग अपने स्तर से शिक्षा बेहतर करने के लिए योगदान दे रहे हैं। इसी क्रम में युवा समाजसेवी सरफराज आलम विदेश में रह कर अपने क्षेत्र के लिए आए दिन कुछ न कुछ योगदान देते हैं। गरीब बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए उन्होंने स्कूल में ब्लैक बोर्ड दिया है। इसके साथ ही बच्चों के बैठने के लिए बेंच भी बनने दिया है। जल्द ही स्कूल में बेंच भी मुहैया होने की उम्मीद है। वन इंडिया से बात करते हुए सरफराज आलम ने कहा कि अगर शिक्षा पदाधिकारी पूर्णिया के ने उन्हें इजाज़त दी तो टीन से बने स्कूल को एसी क्लास में बदल देंगे।

थैलीसीमिया मरीजों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन

थैलीसीमिया मरीजों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन

सरफराज आलम ने पिछले दिनों भी पुर्णिया में रक्तदान शिविर का आयोजन कर सुर्खियां बटोरी थी। गौरतलब है कि उन्होंने अपने जन्मदिवस पर विदेश में रहते हुए पूर्णिया में रक्तदान शिविर का आयोजन करवाया था। आपको बता दें कि रक्तदान शिविर का आयोजन थैलीसीमिया मरीजों की मदद के लिए पूर्णिया के लाइन बाजार में किया गया था। अररिया के कुर्साकांटा निवासी मोहम्मद सरफराज आलम सामाजिक कार्यों के साथ-साथ विदेशों की कंपनियों में अपने क्षेत्र के बेरोजगार युवी को रोज़गार भी मुहैया करवाते हैं। अभी तक वह कई युवाओं को विदेशों में रोज़गार दिलवा चुके हैं।

अपने क्षेत्र के लिए काम करना अच्छा लगता है- सरफराज

अपने क्षेत्र के लिए काम करना अच्छा लगता है- सरफराज

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में सरफराज आलम ने बताया कि वह बिहार के अररिया ज़िले के कुर्साकांटा डहुआबाड़ी में रहते हैं। अपने देश से बाहर रह कर भी अपने क्षेत्र के लिए काम करना बहुत ही अच्छा लगता है। वह बचपन से ही चाहते थे कि इस काबिल बने की जरूरतमंदों की मदद कर सकें। इसलिए जब भी मौक़ा मिलता है, वो अपने क्षेत्र के लिए नेक काम करते हैं। इसके साथ ही बेरोजगार युवक को विदेशों में रोज़गार भी दिलवाते हैं। वह कैंसर मरीज़ों की भी आर्थिक मदद करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने पूर्णिया में एक कैंसर मरीज़ की इलाज के लिए 10 हज़ार रुपये की आर्थिक मदद की थी। सरफराज आलम के जॉब की बात की जाए तो वह विदेश में साफा इंटरनेशनल कंपनी में बतौर अकाउंटेंट मैनेजर काम कर रहे हैं।

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