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मां के दूध और युवाओं की जवानी में 'जहर' घोल रहा ये केमिकल, बिहार में समय से पहले क्यों बूढ़े हो रहे लोग?

नई दिल्ली, 06 जून। कहते हैं जल ही जीवन है। मतलब पानी के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं। लेकिन जब ये पानी जहर बन जाए तो क्या करेंगे? मौजूदा समय में देश की कई शहर ऐसे है जहां का पानी पीने तो क्या बिना फिल्टर किए किसी काम में यूज नहीं कर सकते। पानी में केमिकल की मात्रा इस कदर घुल गई है कि पानी को लेकर जरा सी असावधानी हमारे जान का खतरा बन सकती है। भारत में कई जगहों पर पानी में खतरनाक केमिकल मिल गए हैं जो अब जीवन विकृतियों को जन्म दे रहे हैं।

प्रदूषण का भयानक रूप

प्रदूषण का भयानक रूप

बिहार के लोगों के प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है। लेकिन प्रकृति उनसे जो उनसे छीन रही है उसका कोई मोल नहीं है। इस बात को लेकर चिंता है लेकिन इसके जिम्मेदार भी हम खुद हैं। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के कारण हम बहुत कुछ खोते जा रहे हैं। दरअसल, प्रदूषण ने अब वो रूप ले लिया जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। इसने धरती या फिर आकाश नहीं रसातल यानी धरती के नीचे भी अपनी पैठ बना ली है। परिणाम ये हो रहा है कि आज कई ऐसी बीमारियां जन्म ले रही हैं जिसका इलाज दुनिया में कहीं उपलब्ध नहीं है।

CGWB ने जताई चिंता

CGWB ने जताई चिंता

बिहार के कई जिलों में प्रदूषण के तांडव को लेकर वैज्ञानिक भी चिंतित हैं। पानी का पानी इतना दूषित है कि यहां जन्म लेने वाला हर बच्चा जो 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पीता वो भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं है। सीजीडब्ल्यूबी (मध्य-पूर्व क्षेत्र) के क्षेत्रीय निदेशक ठाकुर ब्रह्मानंद सिंह ने खुद इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि ये स्थिति बिहार के लिए काफी खतरनाक है।

बिहार में पानी के 100 नमूने गवाह

बिहार में पानी के 100 नमूने गवाह

बिहार के कई जिले एक खतरनाक जल प्रदूषण की चपेट में हैं। यहां का पानी लोगों के लिए जहर बन चुका है। राज्य के दस जिलों से लिए गए पानी के 100 नमूने इस बात के गवाह हैं। यहां लोग दूषित पानी पीने से धीरे- धीरे एक गंभीर बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। इन क्षेत्रों की जांच रिपोर्ट में आए नतीजों से खुद साइंटिस्ट परेशान हैं। सभी नमूनों को वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए लखनऊ केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) केंद्र भेजा गया है।

क्यों इतना प्रदूषित है पानी?

क्यों इतना प्रदूषित है पानी?

दरअसल बिहार के 10 जिलों से लिए गए पानी के 100 नमूनों में यूरेनियम की उच्च मात्रा मिली है। जल में यूरेनियम की बड़ी मात्रा में उपस्थिति स्वास्थ के लिए गंभीर चिंता विषय है। सीजीडब्ल्यूबी (मध्य-पूर्व क्षेत्र) की ओर से भी इसको लेकर चिंता व्यक्त की गई और कहा गया कि पानी के नमूनों में मिले आइसोटोपिक यूरेनियम विश्लेषण के लिए इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) विधि का प्रयोग का किया जा रहा है। ये आइसोटोपिक अनुपातों की सटीक माप करता है। फिलहाल अभी रिपोर्ट इंतजार है।

बिहार के इन जिलों में है जल प्रदूषण

बिहार के इन जिलों में है जल प्रदूषण

सीजीडब्ल्यूबी बिहार सरकार का सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संयुक्त रूप से राज्य में भूजल में यूरेनियम की अधिक मात्रा की स्थिति से निपटने का प्रयास कर रहा है। बिहार के नालंदा, नवादा, कटिहार, मधेपुरा, वैशाली, सुपौल, औरंगाबाद, गया, सारण और जहानाबाद जिले में हाल ही में भूजल के नमूने एकत्र किए गए हैं। यहां जल प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इंतजार है लखनऊ केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) केंद्र से दस जिलों के पानी के नमूनों की रिपोर्ट आने का। वहीं इससे पहले 2019-20 में सीजीडब्ल्यूबी ने पानी में यूरेनियम की मात्रा देश भर के कुल 14377 भूजल नमूने एकत्र किए थे। जिसमें बिहार से 634 नमूने शामिल थे। जिनमें से 11 नमूनों में यूरेनियम की मात्रा होने का पता चला था। उस वक्त बिहार के सारण, भभुआ, खगड़िया, मधेपुरा, नवादा, शेखपुरा, पूर्णिया, किशनगंज और बेगूसराय जिलों के नमूनों में यूरेनियम मिला था।

पानी में यूरेनियम की उपस्थिति के गंभीर परिणाम

पानी में यूरेनियम की उपस्थिति के गंभीर परिणाम

साइंटिस्ट्स ने पानी में यूरेनियम की मात्रा को बेहद गंभीर स्थिति माना है। ये स्वस्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इससे शरीर की हड्डियां, किडनी के रोग के अलावा कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकता है। खासकर यूरेनियम गुर्दे और हड्डियों को प्रभावित करता है। कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा कि गर्भवती महिला अगर इस तरह के दूषित पानी का प्रयोग करती है तो शिशु में यूरेनियम का दुष्प्रभाव देखा जा सकता है। यहां तक कहा गया कि बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिला को भी दूषित पानी से बचना चाहिए। यूरेनियम गुर्दे और हड्डियों को बुरी तरह प्रभावित कर देता है जिससे लोगों में कम आयु में ही बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं।

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