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बिहार में लोगों ने कोरोना की नहीं की परवाह ! शादी के भोज में ठेलमठेल

बिहार में लोगों ने कोरोना की नहीं की परवाह ! शादी के भोज में ठेलमठेल

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    Coronavirus Bihar : Corona Positive दूल्हे की मौत,शादी में शामिल 111 लोग संक्रमित | वनइंडिया हिंदी

    कोरोना को हल्के में लेना बिहार के लोगों को भारी पड़ रहा है। यह महामारी अब शादी को मातम में बदलने लगी है। बिहार में शादी-विवाह का मुहुर्त 30 जून तक ही था। जैसे-जैसे लगन बीतने को हुआ शादियां भी खूब हुईं। लॉकडाउन के चलते कई शादियां टल गयीं थीं। लेकिन जैसे ही लॉकडाउन में ढील मिली लंबित शादियां सम्पन्न होने लगीं। किसी को स्थिति की गंभीरता की परवाह नहीं। बस अपनी पड़ी है। जश्न मन रहा है। मंडप सज रहे हैं। गीत-गवनई भी पुरजोर है। भोज-भात का तगड़ा इंतजाम है। लोगों की ठेलमठेल है। सोशल डिस्टेंसिंग गया तेल लेने। पूड़ी, जलेबी और रसगुल्ला के लिए बेताबी ऐसी कि पांत में बैठने के लिए धक्कामुक्की से भी गुरेज नहीं। सबको जल्दी है। कहीं बारिश ने खलल डाल दी भोज का सत्यानाश पक्का। सो, पहले खाओ के फेर में कोई किसी की नहीं सुन रहा। जानबूझ कर की गयी यह गलती जानलेवा साबित हो गयी। पटना के पास पालीगंज में शादी के दो दिन बाद दूल्हे की कोरोना से मौत हो गयी। पूड़ी-जलेबी बनाने वाले हलवाई समेत करीब सौ लोग कोरोना संक्रमित हो गये हैं।

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    नियमों को फेंका रद्दी की टोकरी में

    नियमों को फेंका रद्दी की टोकरी में

    बिहार के ग्रामीण इलाकों में कोरोना से बचाव के गाइडलाइंस रद्दी की टोकरी में फेंक दिये गये हैं। शर्तों के साथ ल़ॉकडाउन में ढील दी गयी थी। दो गज सोशल डिस्टेंसिंग का हर हाल में पालन होना था। शादी समारोह में अधिकतम 50 लोगों को ही शामिल होने था। मास्क लगा कर घर से बाहर निकलना था। बहुत जरूरी हो तभी घर से निकलना था। लेकिन गांवों में इन दिशा निर्देशों का कभी पालन नहीं हुआ। गांव के लोग यही कहते रहे कि कोरोना शहर की बीमारी है। गांव के खेत-खलिहान में यह बीमारी आ नहीं सकती। लोगों की यह बचकाना सोच ही उनके लिए जानलेवा बन गयी। कोरोना वायरस है और यह इंसान से इंसान में फैलता है। जब सरकार शहरों में कोरोना गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन नहीं करा सकी तो आठ हजार से अधिक पंचायतों में यह कैसे लागू होता। चूंकि गावों में कोई मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं था इसलिए लोग मनमानी करते रहे। शादी में जम कर जश्न होता रहा।

    कहां हो रही चूक ?

    कहां हो रही चूक ?

    पटना जिले के डिहपाली गांव की घटना इस बात को प्रमाणित करती है कि कोरोना से निबटने में कैसे बड़ी चूक हो रही है। पालीगंज के डिपहाली गांव का एक युवक गुरुग्राम (गुड़गांव) में एक निजी कंपनी में इंजीनियर था। वह हाल में अपनी कार से दिल्ली से गांव आया था। जब वह बिहार लौटा तो यहां क्वारेंटाइन सेंटर बंद हो चुके थे। बिहार सरकार ने 15 जून के बाद क्वारेंटाइन सेंटर की जरूरत नहीं समझी, इसलिए इसे बंद कर दिया गया था। युवक होम क्वारेंटाइन में रहा। 15 जून को उसकी शादी नौबतपुर में हुई । 17 जून को पेट में दर्द होने के बाद युवक को पटना एम्स लाया गया। इलाज पहले उसकी मौत हो गयी। बाद में जांच हुई तो उसे कोरोना संक्रमित पाया गया। इसके बाद इस शादी से संबंधित करीब साढ़े तीन सौ लोगों का सैंपल जांच के लिए लिया गया। जांच में हलवाई समेत करीब सौ लोग कोरोना पोजिटिव पाये गये हैं। यहां तक कि मृत युवक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए उसके एक संबंधी भी कोरोना संक्रिमत पाये गये हैं। इस घटना के बाद पूरे बिहार में हड़कंप की स्थिति है।

    लॉकडाउन में छूट क्या बड़ी गलती नहीं ?

    लॉकडाउन में छूट क्या बड़ी गलती नहीं ?

    जब अधिकतम 50 लोगों को ही शादी में शामिल होना था तब डिहपाली गांव में इतने लाम-काफ से क्यों शादी की गयी ? सादगी से शादी क्यों नहीं हुई? फोटोग्राफर, हलवाई और भोजभात का इंतजाम क्यों किया गया ? क्या ल़ॉकडाउन में ढील देना बहुत बड़ी गलती नहीं है ? यह सवाल इस लिए क्यों कि लॉकडाउन -1 के समय भोज आयोजित करने पर आयोजक को गिरफ्तार कर लिया जाता था। बिहार में एक मंत्री के निजी सहायक ने गृह प्रवेश पर मछली-भात का भोज किया था। इस भोज में डीएसपी, बीडीओ और अन्य लोग शामिल हुए थे। खूब भीड़ जुटी थी। लॉकडाउन के नियमों को तोड़ने पर मंत्री के निजी सहायक को गिरफ्तार कर लिया गया था। डीएसपी और बीडीओ को निलंबित कर दिया गया था। लोग लॉकडाउन हटाये जाने के लिए व्याकुल थे। अब जब लॉकडाउन में छूट है तो मनमानी से बाज नहीं आ रहे। डिहपाली गांव का युवक जब गांव लौटा तो उसकी जांच क्यों नहीं करायी गयी ? उसके गुरुग्राम से गांव आने तक और अंत्येष्टि होने तक ये बात क्यों छिपी रही कि वह कोरोना संक्रिमित है ? अगर शादी में भव्य भोज नहीं हुआ होता तो किराना दुकानदार, सब्जी दुकानदार, हलवाई और उसका हेल्पर कोरोना के शिकार नहीं होते। अगर भोज खाने की आपाधापी न होती तो सौ से अधिक लोग संक्रमित नहीं हुए होते। लेकिन यहां जान की किसको पड़ी है, हर हाल में मौज-मेला चाहिए। इस घटना के बाद यह पूछा जाने लगा है कि लॉकडाउन में छूट क्या जानलेवा नहीं है ?

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