तेज प्रताप की नई पार्टी 'जनशक्ति जनता दल': पोस्टर में लालू-राबड़ी गायब! क्या भाई तेजस्वी का बढ़ाएंगे सिरदर्द
Bihar Election 2025 (Tej Pratap Yadav New Party) बिहार की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आ गया है। चुनाव की तारीखें अभी कुछ ही दिनों में घोषित होने वाली हैं और उससे पहले ही लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी का ऐलान करके सबको चौंका दिया है। पार्टी का नाम रखा गया है-जनशक्ति जनता दल (Janshakti Janata Dal)। लेकिन इस ऐलान से ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वो है पार्टी के पोस्टर में लालू-राबड़ी की गैरमौजूदगी।
पोस्टर में जहां महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे दिग्गजों की तस्वीरें लगी हैं, वहीं पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी का चेहरा कहीं नजर नहीं आता। तो क्या तेज प्रताप अब वाकई अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने में जुट गए हैं? और क्या उनका ये कदम सीधे-सीधे छोटे भाई तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ाने वाला है? आइए, पूरी कहानी समझते हैं।

लालू-राबड़ी का पोस्टर से गायब होना, संदेश बड़ा है
तेज प्रताप यादव जब भी चर्चा में आते हैं, तो अक्सर अपने बयान और बगावती तेवरों की वजह से। लेकिन इस बार उन्होंने जो किया है, वह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। नई पार्टी के पोस्टर में लालू-राबड़ी की तस्वीर न रखना साफ दिखाता है कि अब तेजप्रताप खुद को परिवार और खासकर तेजस्वी यादव से अलग कर चुके हैं।
दरअसल, कुछ समय पहले ही लालू प्रसाद यादव ने तेजप्रताप को RJD से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। यही नहीं, परिवार के अंदर भी तेजप्रताप को लगभग बेदखल कर दिया गया। ऐसे में, नई पार्टी का जन्म कहीं न कहीं उसी नाराजगी और अलगाव का नतीजा माना जा रहा है।
'ब्लैकबोर्ड' पर लिखेंगे नया राजनीतिक समीकरण
तेजप्रताप की पार्टी का चुनाव चिन्ह ब्लैकबोर्ड रखा गया है। इसके जरिए वो यह संदेश देना चाहते हैं कि बिहार की राजनीति को अब नए सिरे से पढ़ाने और समझाने का वक्त आ गया है।
पार्टी ने नारा दिया है- "सामाजिक न्याय, सामाजिक हक और संपूर्ण बदलाव"। यह वही मुद्दे हैं, जिन पर कभी RJD ने अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि अब ये बातें तेज प्रताप अपने अंदाज में कह रहे हैं। और उनका यही अंदाज RJD के लिए सिरदर्द बन सकता है।
तेजस्वी यादव की मुश्किलें कैसे बढ़ाएंगे तेजप्रताप?
बिहार चुनाव में सबसे बड़ा फायदा विपक्षी दलों को तब मिलता है, जब वोटों का बिखराव हो। तेज प्रताप यादव भले ही संगठन और चुनावी नेटवर्क के मामले में अभी कमजोर हों, लेकिन उनका नाम और यादव समाज पर उनकी पकड़ इतनी जरूर है कि वो RJD के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
खासतौर पर, जिन इलाकों में यादव और अल्पसंख्यक वोट मिलकर RJD की ताकत बनते हैं, वहां तेज प्रताप अगर अलग उम्मीदवार खड़े करेंगे तो सीधा नुकसान तेजस्वी यादव को होगा। यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि तेजप्रताप का चुनाव लड़ना, विपक्षी NDA के लिए फायदेमंद और RJD के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
पिता लालू का हमला और NDA पर निशाना
तेज प्रताप के नई पार्टी बनाने के ऐलान के बीच ही लालू यादव ने भी बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा- "पिछले 20 सालों की निर्दयी NDA सरकार ने किसानों को रुला दिया है। अब इस सरकार को बदलने का वक्त आ गया है।" लालू की यह अपील विपक्षी एकजुटता की ओर इशारा करती है, लेकिन सवाल यह है कि जब घर के अंदर ही बगावत हो रही है, तो क्या बाहर NDA को हराना और भी मुश्किल नहीं हो जाएगा?
परिवार और राजनीति, दोनों से दूरी
तेज प्रताप यादव की कहानी सिर्फ राजनीति की बगावत नहीं बल्कि परिवारिक दूरी की भी दास्तान है। लालू यादव ने खुद अपने बड़े बेटे को सिर्फ पार्टी से ही नहीं बल्कि घर से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह कदम साफ करता है कि अब तेजस्वी ही लालू की राजनीतिक विरासत के असली वारिस माने जा रहे हैं। लेकिन तेज प्रताप को यह स्वीकार नहीं, और शायद इसी वजह से उन्होंने अब अपने दम पर मैदान में उतरने का फैसला किया है।
आगे क्या?
बिहार चुनाव में तेज प्रताप की पार्टी कितना करिश्मा दिखा पाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि उनकी मौजूदगी से RJD के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अगर तेज प्रताप ने यादव वोटों का थोड़ा भी हिस्सा अपनी ओर खींच लिया, तो यह सीधे-सीधे NDA को फायदा पहुंचाएगा। और यही बात छोटे भाई तेजस्वी यादव के लिए सबसे बड़ी चिंता की वजह बनेगी।
तेज प्रताप यादव का यह कदम ना सिर्फ पारिवारिक रिश्तों की खटास को दिखाता है बल्कि बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण भी खड़ा करता है। आगे का चुनावी नतीजा चाहे जो हो, लेकिन एक बात तय है-इस बार मुकाबला सिर्फ NDA बनाम RJD का नहीं होगा, बल्कि भाई बनाम भाई की जंग भी सुर्खियों में रहेगी।












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