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Video: ‘जान मेरे बच्चे की...’ बरौनी Refinery की लापरवाही ने ली मासूम जान!, रिफाइनरी प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोप

Begusarai Barauni Refinery Hadsa: बिहार के बेगूसराय जिला के बरौनी रिफाइनरी में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां रिफाइनरी की दीवार गिरने से एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। हादसा ने ग्रामीणों में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि रिफाइनरी के प्रबंधन की बड़ी लापरवाही की वजह से मासूम की मौत हुई है। उनका तर्क है कि अगर उचित एहतियाती उपाय किए गए होते तो आज उनका बेटा ज़िंदा होता। स्थानीय लोगों ने जवाबदेही और बदलाव की मांग बुलंद करते हुए धरना प्रदर्शन किया। नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं ग्रामीणों ने क्या कुछ कहा?

IOCL Begusarai Refinery Accident

ग्रामीणों का आरोप है कि आए दिन ज़हरीली गैस का रिसाव होता है। कारखाना अंदर हादसे में मज़दूर की मौत होती है। अंदर ही अंदर लाश को ठिकाना लगाते हुए मामले को दबा दिया जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि यह जनप्रतिनिधियों की मिली भगत से होता आ रहा है। रिफाइनरी का दावा है कि ग्रामीणों को कई सुविधाएं दी जा रही हैं।

बरौनी रिफाइनरी प्रबंधन की तरफ़ से अगर कोई भी काम किया जाता है तो वह ज़मीन पर दिखता क्यों नहीं है। काग़ज़ों पर सारे वेलफेयर के काम करवा दिये जाते हैं और वेलफ़ेयर फंड का बंदर बांट कर लिया जाता है। शोकाकुल समुदाय का आरोप है कि रिफाइनरी द्वारा बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

बरौनी रिफाइनरी के साये में रहने वाले ग्रामीणों के स्वास्थ्या और सुरक्षा प्रबंधन पूरी तरह से विफल है। प्रदूषण का बड़े पैमाने पर है,ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी काफी शिकायते हैं, उनकी भलाई के लिए बुनियादी ढांचे भी नहीं हैं। दुर्घटनाओं और पर्यावरण प्रदूषण का ख़तरा भी बहुत ज़्यादा है।

रिफाइनरी का स्वास्थ्य पर प्रभाव ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है, उनका दावा है कि रिफाइनरी की स्थापना के बाद से किडनी फेलियर और कैंसर जैसी बीमारियाँ अधिक प्रचलित हो गई हैं। उनका तर्क है कि उनकी जीवन प्रत्याशा कम हो गई है, जो उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रिफाइनरी के हानिकारक प्रभावों का स्पष्ट प्रमाण है।

ग्रामीणों ने बताया कि हादसा शाम 6.30 बजे के करीब हुआ, विरोध प्रदर्शन के बावजूद, स्थानीय अधिकारियों और रिफाइनरी प्रबंधन की तरफ़ कोई से 4 घंटे तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। न तो स्थानीय सांसद (एमपी) और न ही विधान सभा सदस्य (एमएलए) घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस पर भी निष्क्रियता का आरोप लगा।

कार्रवाई की मांग के बीच, ग्रामीणों ने रिफाइनरी तक पहुंच को अवरुद्ध करके अपने विरोध को और तेज किया। मामला उग्र होता देख रिफाइनरी प्रबंधन, बेगूसराय सांसद (एमपी) प्रतिनिधि अमरेंद्र अमर और विधायक प्रतिनिधि कुमार बिरेश मौक़े पर पहुंचे। इसके बाद 1 लाख मुआवज़ा देने की बात होने लगी।

आक्रोशित लोगों ने बात मानने से इनकार करते हुए शव को रिफ़ाइनरी गेट के सामने रख कर अपनी मांग पर अड़े रहे। वन इंडिया हिंदी में ख़बर को दिखाने के बाद अधिकारियों में हलचल बढ़ी। इसके बाद 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख 50 हज़ार रुपये पर सहमति और मामले को शांत करवाया गया।

इस घटना ने औद्योगिक जिम्मेदारी और विकास तथा मानव जीवन की सुरक्षा के बीच संतुलन के बारे में एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। न्याय, जवाबदेही और बेहतर सुरक्षा उपायों के लिए ग्रामीणों की मांग, उद्योगों के लिए जिम्मेदारी से काम करने और अपने आस-पास रहने वाले लोगों की भलाई सुनिश्चित करने के व्यापक आह्वान को दर्शाती है।

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