Operation Sindoor: बिहार में शहीदों की श्रद्धांजलि पर सियासत तेज़, पक्ष-विपक्ष के बीच ज़ुबानी जंग जारी
Operation Sindoor Politics: बिहार में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए जवानों की श्रद्धांजलि पर सियासत तेज़ हो चुकी है। सैनिकों की मौत को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है, जिसमें सत्तारूढ़ जेडी(यू) पार्टी और विपक्षी आरजेडी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
सियासी विवाद का मूल कारण सरकार और विभिन्न स्रोतों द्वारा सैनिकों की संबद्धता के बारे में प्रस्तुत अलग-अलग बयान हैं, साथ ही उनके प्रति अपर्याप्त सम्मान दिखाए जाने के आरोप भी है। सरकार ने मृतकों की पहचान बीएसएफ कर्मियों के रूप में की है, वहीं सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि सभी सेना की बटालियन के थे।

इसी क्रम में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शहीद सैनिकों को उचित सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया है। राज्य के प्रमुख राजनीतिक गुटों के बीच इस मामले में न केवल चल रही बहस को हवा दी है, बल्कि बिहार में सैनिकों को कैसे याद किया जाता है, इस मुद्दे पर चर्चा तेज़ कर दी है।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच भाजपा ने तेजस्वी यादव पर इस दुखद घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। राजद नेता अब्दुल जब्बार ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कहा कि शहीद इम्तियाज़ अली का पार्थिव शरीर जब लाया गया तो इस दौरान प्रदेश के मुखिया ग़ैर हाज़िर थे।
बिहार में दो-दो उपमुख्यमंत्री हैं लेकिन एक भी हाज़िर नहीं थे। यह मुद्दा जब मीडिया में तूल पकड़ा तो आनन-फानन में सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य नेता शहीद इम्तियाज़ अली के घर पहुंचे और मुख्यमंत्री राहत कोष से पैसे चेक दिया। सरकार को चाहिए था कि जिस दिन शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा, उसी दिन शाकोकुल परिवार से मुलाक़ात करने पहुंचते।












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