नोटेरी के शपथ-पत्र पर हुईं शादियां कानूनी तौर पर वैध नहीं, फिर भी विवाह के नाम पर धोखा खा रही युवतियां
Love Marriage Notary Affidavit: बिहार के विभिन्न ज़िलों में कोर्ट मैरिज के नाम पर प्रेमी जोड़े नोटेरी शपथ पत्र बनवाकर विवाह के कई मामले सामने आ चुके हैं। आज हम आपको बिहार की राजधानी पटना में के आंकड़ों से रूबरू करवाएंगे, जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे की प्रेम विवाह की जाल में फंस कर युवतियों की ज़िंदगी किस तरह तबाह हो रही है।
इश्क में मां-बाप के प्यार को भुलाकर प्रेमी से शादी रचाने वाली युवतियों की ज़िंदगी किस तरह गुज़र रही है, किन हालातों में शादी हुई है, शादी के दस्तावेज़ क्या हैं, ये सब खुलासे चौंकाने वाले हैं। पटना में 80 फीसद ऐसे मामले सामने आये हैं, जिसमें माता-पिता के खिलाफ जाकर युवतियों ने शादी रचाई है।

प्रेम विवाह के ज़्यादातर मामले नोटेरी शपथ-पत्र के सामने आए हैं। ग़ौरतलब है कि नोटेरी शपथ पत्र पर हुई शादी कानूनी तौर पर वैध नहीं है। युवती के प्रेमी (कथित पति) ने उन्हें छोड़ दिया और वह इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। अपने ही बच्चे की पहचान छिपाकर ज़िंदगी बसर करने पर मजबूर हैं।
अब आप सोच रहे होंगे की लड़की ने विवाह की तो वह कानूनी तौर पर लड़ाई करने में असमर्थ कैसे हैं? इसेक पीछे सबसे बड़ी वजह नोटेरी शपथ पर हुई शादिया हैं, जो कि पीड़ित लड़कियां कानूनी तौर पर अपनी शादी को वैध करार नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि अब शादी में धोखा खाई युवतियां अपने कथित पति पर रेप का मुकदमा कर इंसाफ की आस लगाए बैठी हैं।
प्रेम विवाह करने के बाद पति से धोखा मिला, मां-बा का साथ छूट गया। नतीजा भूखे मरने की नौबत आ गई, अब वैसी युवतिया किसी तरह कुछ काम कर ज़िंदगी बसर कर रही हैं। इंसाफ पाने के लिए कई लड़किया पटना में दर-दर की ठोकरें खा रही हैं, कोई पटना, तो कोई भागलपुर, मुजफ्फरपुर, जमुई और रोहतास से ताल्लुक रखती है।
पटना में रेप के दर्ज मामलों में 80 फीसद मामले शादी के नाम पर धोखा मिलने पर दर्ज हुए हैं। पटना कलेक्ट्रेट दफ्तर के पास 100 से ज्यादा ऐसे एजेंट हैं जो, प्रेमी जोड़े की कोर्ट मैरिद कराने के जाल में फांसते हैं। ज्यादातर प्रेमी जोड़े कोर्ट मैरिज के नाम पर नोटेरी शपथ पत्र पर विवाह करार को ही शादी मान कर चले जाते हैं।
प्रेमी जोड़े को वहां मौजूद एजेंट साफ तौर पर कह देते हैं कि यह सिर्फ शपथ पत्र है, यह कानूनी तौर पर वैध नहीं है। निबंधन कार्यालय में जाकर शादी करवाना ज़रूरी है। इसके बावजूद प्रेमी जोड़े शपथ पत्र को ही कोर्ट की शादी समझ कर चले जाते हैंष रोज़ाना करीब 40 मामले उस प्रकार के शादी के आते हैं। बिना गवाह औऱ वकील के पाच हज़ार रुपये देकर नोटरी के शपथ-पत्र पर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में गैरकानूनी शादियां धड़ल्ले से हो रही हैं।
शपथ-पत्र पर शादी को युवतिया कानूनी शादी मान लेती हैं, बाद में जब प्रेमी (कथित पति) उसे छोड़ देता है, तो वह कानूनी तौर पर अपनी शादी को बैध करार नहीं कर पाती हैं, इसका नतीजा है कि बाद में वह युवतियां अपने प्रेमी पर रेप का मुकदमा दर्ज करवाती हैं। शादी के लिए इंसाफ के नाम दर-दर भटकती हैं।












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