कौन है वो बाहुबली आनंद मोहन? जिसके लिए फांसी की सजा उम्रकैद में बदली थी; अब बिहार सरकार बनी वरदान!
29 साल पहले यानी 5 दिसंबर 1994 को दलित वर्ग से आने वाले गोपालगंज डीएम जी कृष्णैया की हत्या में आनंद मोहन को पटना हाई कोर्ट ने दोषी ठहराया था। एक ही साल में आनंद कुमार की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल गई।

Anand Mohan Singh: बिहार की सियासी जमीन पर एक बार फिर गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह के आजीवन कारावास से बाहर आने की चर्चाएं सुर्खियों में छाई हुई हैं। तोमर राजघराने में पैदा हुए आनंद मोहन 29 साल पहले गोपालगंज के तत्कालीन जी कृष्णैया की हुई हत्या में दोषी ठहराए गए थे। हालांकि, फांसी की सजा एक साल में ही उम्रकैद में बदल गई थी।
अब आनंद मोहन सिंह का जेल से बाहर आने का रास्ता नीतीश कुमार सरकार ने साफ कर दिया है। बिहार सरकार के इस फैसले पर लगातार कुछ विपक्षी दल हमलावर नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में बीजेपी के राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी अपनी आपत्ति व्यक्त की है।
हालांकि, बेटे चेतन आनंद की सगाई के लिए पिता आनंद मोहन सिंह 15 दिन पहले ही पैरोल पर बाहर आ चुका है, लेकिन आज यानी मंगलवार को उसे फिर से जेल में जाना होगा। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 27 अप्रैल तक आनंद मोहन जेल से पूरी तरह से बाहर आ जाएंगे।
आइए जानते हैं गैंगस्टर से नेता बने आनंद की पूरी अपडेट कहानी 8 पाइंट में...
- 29 साल पहले यानी 5 दिसंबर 1994 को को दलित वर्ग से आने वाले जी कृष्णैया (IAS-1985) की तैनाती राज्य के गोपालगंज जिले में डीएम के पद पर हुई थी। दोपहर के वक्त एक बैठक से जी कृष्णैया लौट रहे थे, तभी हाईवे पर मुजफ्फरपुर वासी प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन की वजह थी, गैंगस्टर छोटन शुक्ला की एक दिन पहले यानी 4 दिसंबर हुई हत्या।
- गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने जैसे ही डीएम जी कृष्णैया की सरकारी लाल बत्ती लगी कार देखी तो हमला कर दिया। जिसके चलते गुस्साए ग्रामीणों ने बिना यह जाने की जी कृष्णैया गोपालगंज के डीएम हैं, न की मुजफ्फरपुर के। कार से घसीटकर हमला कर दिया। जिसमें जी कृष्णैया की जान चली गई।
- जी कृष्णैया की हत्या के पीछे गैंगस्टर आनंद मोहन सिंह का नाम आया। आरोप लगा कि आनंद मोहन सिंह ने ग्रामीणों को उकसाया था, जिसके बाद उग्र हुई भीड़ ने जी कृष्णैया को पीट-पीटकर मार डाला।
- इस हत्याकांड से बिहार दहल उठा। आनंद मोहन की पत्नी समेत 6 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया। साल 2007 को पटना हाईकोर्ट ने आनंद को फांसी की सजा सुनाई, लेकिन साल 2018 में उम्रकैद की सजा में तब्दील हो गई।
- साल 2012 में आनंद ने सजा में नरमी की सुप्रीम कोर्ट से मांग की, लेकिन कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।
- बिहार में नीतीश कुमार की वर्तमान सरकार आनंद मोहन के लिए वरदान साबित होती नजर आ रही है। नीतीश कुमार सरकार ने फैसला लिया कि जेल में अच्छा व्यवहार होने के बाद भी हत्यारों की रिहाई पर रोक वाले कानून को बदल दिया। जिसके मुताबिक, बिहार जेल नियमावली, 2012 के नियम 481 (1) ए में संशोधन हुआ। अब आनंद के जेल से बाहर होने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
- हालांकि, आनंद मोहन अपने बेटे चेतन आनंद की सगाई के लिए 15 दिनों के पैरोल पर बाहर आया है, लेकिन 25 अप्रैल को उसे फिर से जेल में भेज दिया जाएगा। अटकलें हैं कि नीतीश कुमार सरकार के नियमों में संशोधन का फायदा उठाकर आनंद मोहन 27 अप्रैल तक बाहर आ सकता है। बेटे चेतन आनंद की शादी 3 मई को देहरादून में होने वाली है।
- बिहार के सहरसा जिले के पंचगछिया गांव निवासी आनंद मोहन सिंह तोमर बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपी) के संस्थापक रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी राम बहादुर सिंह तोमर के पोते हैं।












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