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Bihar News: अब गांव के मुखिया नहीं कर पाएंगे अपनी मर्ज़ी से काम आवंटित, जानिए पूरा मामला

Bihar News, Nitish Government Policy: बिहार में ग्रामीण स्तर पर हो रहे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार नहीं हो इसलिए नीतीश सरकार ने एक और फ़ैसला लिया है। अब त्रि-स्तरीय ग्राम पंचायतों का विकास कार्य गांव के मुखिया ख़ुदी की मर्ज़ी से आवंटित नहीं कर पाएंगे। अब विकास कार्यों के लिए बाज़ाबते टेंडर निकाला जाएगा।

विकास कार्यों के लिए निकाले गए टेंडर में जो सबसे कम ख़र्च में कार्य कराने की बोली लगाएगा, उसे ही काम करवाने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी। आपको बतां दे कि पहली बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है। इस बाबत पंचायती राज विभाग ने काम के लिए कोड भी बनाया है। वित्त विभाग की तरफ़ कार्य कोड की सहमति भी मिल गई है।

Nitish Government new policy Mukhiya will not be able to allocate work as per their wish

नीतीश कैबिनेट में मंज़ूरी मिलने के बाद प्रदेश में इसे लागू कर दिया जाएगा। पंचायती राज कार्य कोड लागू होने के बाद ग्राम प्रतिनिधि (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) बिना टेंडर के काम नहीं करवा पाएगे। वहीं मुखिया समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी बिना टेंडर काम नहीं करवा पाएंगे।

अभी की बात की जाए तो पंचायती राज विभाग के आदेश से सारे काम हो जाते हैं, जिसमें सरकारी मुलाज़िम, एजेंसी के तौर पर नामित होते हैं। मुखिया और संबंधित कर्मी या पदाधिकारी संयुक्त रूप से काम को ख़ुद की मर्ज़ी से बिना टेंडर के ही तय करते हैं। इसमें टेंडर की ज़रूरत नहीं है।

आपको बता दें कि 15 लाख से ऊपर की राशि के काम के लिए, टेंडर जारी होने का प्रावधान है। लेकिन इस पर ज़ोर नहीं दिया जाता है। मौजूदा नियम के तहत एक ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए साल में 50 लाख दिए जाते हैं।

पंचायत समिति और जिला परिषद को 50 लाख रुपये से कुछ ज़्यादा ही राशि दी जाती है। ग्रामीण स्तर पर हो रहे विकास कार्यों में मनमाने तरीक़े से काम होने पर, भ्रष्टाचार की शिकायत मिल रही थी। इसलिए नीतीश सरकार ने नियम में बदलाव करने का फ़ैसला लिया है। टेंडर व्यवस्था पर कैबिनेट की मंज़ूरी मिल जाने के बाद मनमाने रवैय्ये पर लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

नए नियम में के तहत कोई ख़ास परिस्थिति में 25 लाख रुपये तक का 3 काम पंचायत और जिला परिषद बिना टेंडर के करवा सकते हैं। इनमें भी पंचायत के स्तर के काम हुए तो प्रखंड पदाधिकारी से की इजाज़त लेनी ज़रूरी है। वहीं प्रखंड स्तर के काम के लिए को जिला स्तर से इजाज़त लेनी होगी। किसी ख़ास परिस्थिति में प्राकृतिक आपदा आदि के मामले भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

पंचायती राज के तहत ग्राम प्रतिनिधियों द्वारा सड़क और नाली निर्माण, सोलर स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, चारदीवारी, तालाबों का जीर्णोद्धार, कचरा प्रबंधन और मिट्टी भराई आदि विकास कार्य होते रहे हैं। लेकिन अब ये सारे काम पंचायती राज विभाग और पंचायत प्रतिनिधि की देखरेख में टेंडर के ज़रिए कराए जाएंगे।

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