Garahra Inter College: वन इंडिया की ‘खबर का असर’, फिर से संचालित होगा 60 वर्ष पुराना रेलवे कॉलेज
Garahra Inter College गढ़हरा (बरौनी) के लिए समाज सेवा संघर्ष समिति ने ‘स्कूल बचाओ अभियानट चलाया था, इस बाबत उन्होंने बेगूसराय जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था।
Garahra Inter College: शिक्षा के ऐतबार से बिहार का गढ़हरा (बरौनी) इलाका काफ़ी पिछड़ा हुआ है, क़रीब 2 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में एक भी हाई स्कूल नहीं है। वहीं इंटर कॉलेज बंद होने के बाद स्थानीय लोगों में काफी मायूसी थी। वन अंडिया हिंदी ने प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया था। समाज सेवा संघर्ष समिति ने इस बात के लिए वन इंडिया हिंदी का धन्यवाद दिया। समिति के सदस्यों ने कहा कि शुरुआत से वन इंडिया हिंदी ने हम लोगों की समस्याओं को उठाया, जिसपर स्थानीय प्रतिनिधियों से लेकर केंद्र सरकार तक ने संज्ञान लिया और रेलवे इंटर कॉलेज गढ़हरा फिर से संचालित हुआ।

वन इंडिया हिंदी ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
रेलवे इंटर कॉलेज गढ़हरा (बरौनी) के लिए समाज सेवा संघर्ष समिति ने ‘स्कूल बचाओ अभियानट चलाया था, इस बाबत उन्होंने बेगूसराय जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। इसके साथ ही सांसद गिरिराज सिंह समेत कई दिग्गज नेताओं को ज्ञापन सौंपते हुए रेलवे इंटर कांलेज गढ़हरा को बचाने की गुहार लगाई भी लगाई थी। वन इंडिया हिंदी ने समाज सेवा संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष दानिश महबूब ने खास बातचाती की। स्कूल बचाने की मुहिम को प्रमुखता से उठाने पर आभार भी व्यक्त किया।
Recommended Video

'स्कूल बंद होने से खतरे में था बच्चों का भविष्य'
दानिश महबूब ने बताया कि बेगूसराय ज़िला के आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद तेघड़ा विधायक राम रतन सिंह और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद से मिलकर भी इस मामले में ज्ञापन सौंपा था। समाज सेवा संघर्ष समिति गढ़हरा के अध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा, उपाध्यक्ष दानिश महबूब समेत समिति के सभी सदस्यों ने स्कूल को बचाने के लिए मुहिम छेड़ रखी थी। समाज सेवा संघर्ष समिति के उपाध्याक्ष दानिश महबूब ने बताया कि करीब दो लाख आबादी वाले गढ़हरा क्षेत्र में 80 हजार छात्र छात्राओं की आबादी वाले क्षेत्र में स्कूल के बंद हो जाने से शिक्षा पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा था।

'5 KM दूर जाकर बच्चे करते थे पढ़ाई'
दानिश महबूब ने कहा कि रेलवे इंटर कॉलेज गढ़हरा बन्द होने की वजह से गढ़हरा के छात्र छात्राओं को चार से पांच किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करना पढ़ रहा था। स्थानीय लोगों को बालिकाओं के शिक्षा की चिंता सता रही थी। दानिश महबूब ने बताया कि रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के साथ-साथ गैर रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे 94 स्कूलों को चुपचाप चलाता है। वास्तव में 2019 तक इन स्कूलों में केवल 15399 रेलवे वार्ड नामांकित हैं, जो गैर रेलवे की कुल संख्या के आधे से भी कम हैं। नामांकित वार्ड (34277)। भारतीय रेलवे 87 केंद्रीय विद्यालय का भी समर्थन करता है जहां 33212 रेलवे वार्ड और 55386 गैर रेलवे वार्ड नामांकित हैं।

‘रेलवे स्कूल में पढ़ते हैं 2 % से अधिक वार्ड के बच्चे’
दानिश महबूब ने कहा कि ध्यान देने वाली बात है कि 4-18 साल की उम्र वाले रेलवे वार्डों के बच्चों की कुल तादाद 7 लाख 99 हज़ार 703 यानी लगभग 8 लाख है। रेलवे के 2% से अधिक वार्ड के बच्चे रेलवे स्कूल में पढ़ते हैं। ऐतिहासिक रूप से, इन स्कूलों को स्थापित करने की आवश्यकता थी क्योंकि उन क्षेत्रों में बाजार की विफलता थी। स्कूलों के संचालन में रेलवे प्रबंधन का बड़ा समय लगता है, जिसकी मुख्य क्षमता रेलवे सेवा को चलाने और बनाए रखने में है। इस प्रकार हम अनुशंसा करते हैं कि रेलवे प्रबंधन समय पर जहां जरूरी है वहां स्कूल चला रहा है।

बहुत ही ज़रूरी था स्कूल का संचालन
दानिश महबूब ने कहा कि यहा स्कूल का संचालन बहुत ही ज़रूरी था क्योंकि यहां शिक्षा का लिए कोई और अच्छा विकल्प नहीं था। मुक्तेश्वर वर्मा ( अध्यक्ष समाजसेवा संघर्ष समिति) ने कहा कि स्थानीय नेताओं से लेकर केंदीय मंत्री तक सभी लोगों की कोशिश से इस स्कूल को फिर से संचालित किया गया है। वहीं उन्होंने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि स्थानीय रेलवे प्रसाशन की तरफ से स्कूल को नज़रअंदाज़ करना दुख की बात है। इसके साथ ही प्रवीर कुमार सिंह( प्राचार्य, गढ़हरा, इंटर कॉलेज) ने कहा कि सभी लोगों के सहयोग से यह मुमकिन हो पाया है। अब बच्चों को गुणव्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। राकेश राय ( सामाजिक कार्यकर्ता ) ने भी स्कूल खुलने पर खुशी ज़ाहिर किया। वहीं उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे स्कूल में जो छोटी छोटी कमियां हैं वह भी दूर हो जाएग। शिव जी ( पूर्व पार्षद, बीहट) ने कहा कि स्कूल के पुनह संचालने बच्चों का भविष्य संवरेगा। शिक्षा से बड़ी को पूंजी नहीं है।
ये भी पढ़ें: बिहार: 'एक विद्यालय ऐसा भी’, मुस्लिम बच्चे शौक से पढ़ते हैं संस्कृत और बोलते हैं फ़र्राटेदार श्लोक












Click it and Unblock the Notifications