बिहार: ‘एक विद्यालय ऐसा भी’, मुस्लिम बच्चे शौक से पढ़ते हैं संस्कृत और बोलते हैं फ़र्राटेदार श्लोक
बुज़ुर्गों की मानें तो दरभंगा जिला मुख्यालय से क़रीब 8 किलोमीटर दूरी पर यह विद्यालय है। साल 1950 में इस विद्यालय की स्थापना बहेड़ी मार्ग के रघुनाथपुर में हुई थी। सरकार की तरफ़ से इस विद्यालय को साल 1971 में मान्यता मिली।
दरभंगा, 22 सितंबर 2022। संस्कृत और उर्दू विषय बहुत ही कम छात्र पढ़ना चाहते हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उर्दू पढ़ते हैं और हिंदू समुदाय के लोग संस्कृत पढ़ते हैं। आज हम आपको एक ऐसे विद्यालय के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मुस्लिम समुदाय के बच्चे शौक से संस्कृत पढ़ते हैं और फ़र्राटेदार श्लोक बोलते हैं। हम त्रिवेणी संस्कृत मध्य विद्यालय हायाघाट की बात कर रहे हैं। इस मध्य विद्यालय में मुस्लिम परिवारों के क़रीब तीन दर्जन बच्चे पढ़ते हैं । ग़ौरतलब है कि वह शौर से संस्कृत विषय पढ़ते हैं और सबसे ज्यादा नंबर उसी सब्जेक्ट में लाते हैं। इतना ही नहीं वह फर्राटेदार श्लोक भी बोलते हैं।

1950 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
बुज़ुर्गों की मानें तो दरभंगा जिला मुख्यालय से क़रीब 8 किलोमीटर दूरी पर यह विद्यालय है। साल 1950 में इस विद्यालय की स्थापना बहेड़ी मार्ग के रघुनाथपुर में हुई थी। सरकार की तरफ़ से इस विद्यालय को साल 1971 में मान्यता मिली थी। इस विद्यालय में कक्षा 8 तक पढ़ाई होती है। वहीं स्कूल में कुल छात्रों की तादाद 130 है, जिसमें छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

संस्कृत में भविष्य तलाश रहे छात्र
त्रिवेणी संस्कृत मध्य विद्यालय में मुस्लिम बच्चे दाखिला तो लेते ही है, इसके साथ ही संस्कृत पढ़ते हुए ज़िला टॉप भी कर रहे हैं। इस स्कूल में अल्पसंख्यक समुदाय के क़रीब 40 फ़ीसद बच्चे पढ़े हैं। सभी छात्र अन्य विषयों के साथ-साथ संस्कृत पढ़ने में काफी दिलचस्पी दिखाते हैं। विद्यालय के छात्रों से जब मीडियाकर्मी ने बात की तो उन्होंने कहा कि संस्कृत में वह अपने कैरियर की तलाश कर रहे हैं। वह भविष्य में संस्कृत के शिक्षक बनना चाहते हैं।

संस्कृत में बेबाकी से बात करते हैं छात्र
अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की संस्कृत में दिलचस्पी देख कर आप भी कहेंगे कि वाकई विद्यालय हो तो ऐसा, जहां के बच्चे विषय को शौक से पढ़ तो रहे ही हैं, साथ ही इसमे अपना भविष्य तलाश रहे हैं। मुस्लिम छात्र संस्कृत पढ़ने के साथ ही संस्कृत में बात भी बड़ी बेबाकी से कर लेते हैं। आप जब स्कूल में दाखिल होंगे तो संस्कृत में फर्राटेदार बात चीत करते हुए छात्र नज़र आ जाएंगे।

नाजिया परवीन ने किया था जिला टॉप
त्रिवेणी संस्कृत मध्य विद्यालय में संस्कृत की इतनी अच्छी पढ़ाई होती है कि बच्चे इस विषय से जिला टॉप भी कर चुके हैं। साल 2017 में इसी स्कूल की स्टूडेंट नाजिया परवीन ने संस्कृत सब्जेक्ट में जिला टॉप किया था। बिहार में शिक्षा व्यवस्था तो लचर है ही, इसके साथ ही प्रदेश के संस्कृत स्कूलों की भी स्थिति दयनीय होती जा रही है। इन सबके बावजूद यहां के छात्र संस्कृत में तालीम हासिल कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

स्कूल को नहीं मिल रही सरकारी सुविधाएं
संस्कृत मध्य विद्यालयों के शिक्षकों की मानें तो इस स्कूल में दूसरे सरकारी स्कूलों की सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। छात्रों के विकास या फिर विद्यालय का विकास, किसी भी प्रकार की विकास से जुड़ी योजनाएं इस विद्यालय को नहीं दी जा रही है। सुविधाओं के अभाव में यहां के बच्चे प्रतियोगिता में भी शिरकत नहीं करते हैं। सरकार द्वारा छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाएं चलती हैं लेकिन यहां के छात्रा सरकारी द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
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