Motivational Story: बड़ी नौकरी छोड़, डॉ. ने सैलरी नहीं इंसानियत चुनी, लोगों के लिए बना दिया ₹50 वाला अस्पताल
Motivational Story: जहां आज की दुनिया में डॉक्टर बनना एक सम्मानजनक और आर्थिक रूप से सुरक्षित करियर माना जाता है, वहीं एक डॉक्टर ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। दिल्ली में बतौर कार्डियोलॉजिस्ट काम कर रहे डॉ. एस. एम. ज़ियाउर रहमान ने अपनी लाखों की नौकरी छोड़कर वो किया, जिसकी आज समाज को सबसे ज्यादा ज़रूरत है, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा।
खगड़िया के छोटे से गांव में मात्र ₹50 में इलाज
डॉ. रहमान ने बिहार के खगड़िया ज़िले में एक ऐसा अस्पताल खोला है, जहां हर मरीज का इलाज मात्र ₹50 में होता है, चाहे वो सामान्य बुखार हो, ब्लड प्रेशर की समस्या हो या फिर सांप काटने जैसा इमरजेंसी केस। यहां न कोई भेदभाव है, न लंबी फीस की टेंशन।

70 से ज़्यादा मरीज हर दिन
हर दिन इस अस्पताल में लगभग 70 मरीज पहुंचते हैं। कोई किसान है, कोई मज़दूर, कोई बुज़ुर्ग, सबको इलाज मिलता है एक जैसा, एक सम्मान के साथ। डॉ. रहमान कहते हैं, "मुझे वो सुकून यहां मिलता है, जो दिल्ली के बड़े अस्पताल में लाखों कमाकर भी नहीं मिलता था।"
एक सपना, जो सेवा में बदल गया
डॉ. ज़िया ने MBBS की पढ़ाई दरभंगा मेडिकल कॉलेज से की और फिर स्पेशलाइजेशन कर दिल्ली में एक नामी अस्पताल से जुड़ गए। लेकिन जब उन्होंने देखा कि गांवों में इलाज के नाम पर लोग या तो कर्ज़ में डूब जाते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं, तो उन्होंने फैसला लिया कि अब उनका कर्तव्य गाँव के लोगों के लिए काम करना है।
पैसे से ऊपर है सेवा की भावना
यह अस्पताल सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है - जो इस बात को साबित करता है कि जब किसी के भीतर सेवा का जज़्बा हो, तो बड़े शहरों की चमक भी उसे रोक नहीं सकती। डॉ. रहमान जैसे लोग हमें प्रेरणा दे रहे हैं कि बदलाव सिर्फ सरकारों से नहीं, बल्कि ऐसे नागरिकों से आता है जो खुद मिसाल बनते हैं।












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